ये हैं मां दुर्गा के प्रसिद्ध मंदिर...


*  मां दुर्गा के प्रसिद्ध मंदि‍रों की जानकारी  
 
हिन्दू धर्म के अनुसार देवी भागवत पुराण में 108, कालिका पुराण में 26, शिवचरित्र में 51, दुर्गा सप्तशती और तंत्रचूड़ामणि तालिका में शक्ति पीठों की संख्या 52 बताई गई है। साधारत: 51 माने जाते हैं। आपके लिए हम यहां प्रस्तुत कर रहे हैं वर्तमान में मां दुर्गा के प्रसिद्ध मंदि‍रों की जानकारी।
 
*  मां वैष्णोदेवी- भारतीय राज्य जम्मू और कश्मीर के जम्मू के पास कटरा से माता वैष्णोदेवी के दर्शनार्थ यात्रा शुरू होती है। कटरा जम्मू से 50 किलोमीटर दूर है। कटरा से पहाड़ी लगभग 14 किलोमीटर की पर्वतीय श्रृंखला की सबसे ऊंची चोटी पर विराजमान है मां वैष्णोदेवी। यहां देशभर से लाखों भक्त दर्शन के लिए आते हैं।
 
*  मनसा देवी- भारतीय राज्य उत्तरप्रदेश के हरिद्वार शहर में शक्ति त्रिकोण है। इसके एक कोने पर नील पर्वत पर स्थित भगवती देवी चंडी का प्रसिद्ध स्थान है। दूसरे पर दक्षेश्वर स्थान वाली पार्वती। कहते हैं कि यहीं पर सती योग अग्नि में भस्म हुई थीं और तीसरे पर बिल्वपर्वतवासिनी मनसा देवी विराजमान हैं। 
 
मनसा देवी को दुर्गा माता का ही रूप माना जाता है। शिवालिक पहाड़ पर स्थित इस मंदिर पर देश-विदेश से हजारों भक्त आकर पूजा-अर्चना करते हैं। यह मंदिर बहुत जागृत है।
 
*  पावागढ़-काली माता-  गुजरात की प्राचीन राजधानी चंपारण के पास वडोदरा शहर से लगभग 50 किलोमीटर दूर पावागढ़ की पहाड़ी की चोटी पर स्थित है मां काली का मंदिर। काली माता का यह प्रसिद्ध मंदिर मां के शक्तिपीठों में से एक है। माना जाता है कि पावागढ़ में मां के वक्षस्थल गिरे थे।
 
*  नयना देवी- कुमाऊं क्षेत्र के नैनीताल की सुरम्य घाटियों में पर्वत पर एक बड़ी-सी झील त्रिऋषिसरोवर अर्थात अत्रि, पुलस्त्य तथा पुलह की साधना स्थली के समीप मल्लीताल वाले किनारे पर नयना देवी का भव्य मंदिर है। प्राचीन मंदिर तो पहाड़ के फूटने से दब गया, लेकिन उसी के पास स्थित है यह मंदिर।
 
*  शारदा मैया- भारतीय राज्य मैहर (मैयर) नगर की पहाड़ी पर माता शारदा का प्राचीन मंदिर है जिसे आला और उदल की इष्टदेवी कहा जाता है। यह मंदिर बहुत जागृत एवं चमत्कारिक माना जाता है। कहते हैं कि रात को आला-उदल आकर माता की आरती करते हैं, जिसकी आवाज ‍नीचे तक सुनाई देती है।
 
*  दाक्षायनी (मानस)- तिब्बत स्थित कैलाश मानसरोवर के मानसा के निकट एक पाषाण शिला पर माता का दायां हाथ गिरा था। यहीं पर माता साक्षात विराजमान हैं। यह माता दाक्षायनी का मुख्य स्थान है।
 
*  कालका माता- भारतीय राज्य बंगाल के कोलकाता शहर के हावड़ा स्टेशन से पांच मील दूर भागीरथी के आदि स्रोत पर कालीघाट नामक स्थान पर कालका जी का मंदिर है। रामकृष्ण परमहंस यहीं पर साधना करते थे। यह बहुत ही जागृत शक्तिपीठ है।
 
*  ज्वालामुखी- भारत के हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में जहां माता की जीभ गिरी थी उसे ज्वाला जी स्थान कहते हैं। इस स्थान से आदिकाल से ही पृथ्वी के भीतर से कई अग्निशिखाएं निकल रही हैं। यह बहुत ही जागृत स्थान है।
 
*  भवानी माता- महाराष्ट्र के पूना में भगवती के दो मंदिर हैं पहला पार्वती का प्रसिद्ध मंदिर, दूसरा प्रतापगढ़ नामक स्थान पर भगवती भवानी का मंदिर। भवानी माता छत्रपति शिवाजी महाराज की इष्टदेवी हैं।
 
*  तुलजा भवानी- महाराष्ट्र के उस्मानाबाद जिले में स्थित है तुलजापुर। एक ऐसा स्थान जहां छत्रपति शिवाजी की कुलदेवी मां तुलजा भवानी स्थापित हैं, जो आज भी महाराष्ट्र व अन्य राज्यों के कई निवासियों की कुलदेवी के रूप में प्रचलित हैं। तुलजा माता का यह प्रमुख मंदिर है। इंदौर के पास देवास की टेकरी पर भी तुलजा भवानी का प्रसिद्ध मंदिर है।
 
*  मां चामुंडा देवी- चामुंडा माता के मंदिर कई हैं किंतु हिमाचल के धर्मशाला से 15 किमी पर स्थित बंकर नदी के किनारे बहुत ही प्राचीन मंदिर स्थित है। इसके अलावा राजस्थान में जोधपुर के मेहरानगढ़ किले पर स्थित चामुंडा माता का मंदिर भी प्रख्यात है। इंदौर के पास देवास की पहाड़ी पर भी मां चामुंडा का प्रसिद्ध मंदिर है।
 
*  अम्बाजी मंदिर - गुजरात का अम्बाजी मंदिर बहुत ही प्रसिद्ध है। अम्बाजी मंदिर गुजरात और राजस्थान की सीमा से लगा हुआ है। माउंट आबू से 45 किलोमीटर दूरी पर स्थित है अम्बा माता का मंदिर, जहां लाखों भक्त आते हैं।
 
*  अर्बुदा देवी- भारतीय राज्य राजस्थान के सिरोही जिले में स्थित नीलगिरि की पहाड़ियों की सबसे ऊंची चोटी पर बसे माउंट आबू पर्वत पर स्थित अर्बुदा देवी के मंदिर को 51 प्रधान शक्ति पीठों में गिना जाता है।
 
*  देवास माता टेकरी- मध्यप्रदेश के इंदौर शहर के पास स्थित जिला देवास की टेकरी पर स्थित मां भवानी का यह मंदिर काफी प्रसिद्ध है। लोक मान्यता है कि यहां देवी मां के दो स्वरूप अपनी जागृत अवस्था में हैं। इन दोनों स्वरूपों को छोटी मां और बड़ी मां के नाम से जाना जाता है। बड़ी मां को तुलजा भवानी और छोटी मां को चामुण्डा देवी का स्वरूप माना गया है।
 
*  बिजासन टेकरी- मध्यप्रदेश की व्यावसायिक नगरी इंदौर में बिजासन माता की प्रसिद्धि भी दूर-दूर तक है। वैष्णोदेवी की मूर्तियों के समान यहां भी मां की पाषाण पिंडियां हैं। यह मंदिर इंदौर एयरपोर्ट से कुछ ही दूरी पर स्थित है।
 
 *  गढ़ कालिका और हरसिद्धि- भारत के मध्यप्रदेश राज्य के नगर उज्जैन में महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर के समीप शिप्रा नदी के तट पर हरसिद्धि माता का मंदिर है, जो राजा विक्रमादित्य की कुलदेवी हैं। उज्जैन के कालीघाट स्थित कालिका माता का यहां बहुत ही प्राचीन मंदिर है, जिसे गढ़ कालिका के नाम से जाना जाता है। इसे कालिदास की इष्टदेवी माना जाता है।
 
*  मुम्बा देवी- महाराष्ट्र के प्रमुख महानगर मुंबई की मुम्बा देवी, कालबा देवी और महालक्ष्मी का मंदिर प्रसिद्ध है। महालक्ष्मी का मंदिर समुद्र तट पर, मुम्बा देवी के समीप तालाब है और कालबा देवी का मंदिर अति प्राचीन माना जाता है।
 
*  सप्तश्रृंगी देवी- सप्तश्रृंगी देवी नासिक से करीब 65 किलोमीटर की दूरी पर 4800 फुट ऊंचे सप्तश्रृंग पर्वत पर विराजित हैं। सह्याद्री की पर्वत श्रृंखला के सात शिखर का प्रदेश यानी सप्तश्रृंग पर्वत, जहां एक तरफ गहरी खाई और दूसरी ओर ऊंचे पहाड़ पर हरियाली है। इसे अर्धशक्तिपीठ माना जाता है।
 
*  मां मनु देवी- महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश राज्यों को अलग करने वाला सतपुड़ा पर्वत श्रृंखलाओं की ‍वादियों में बसा हुआ है। यहां खानदेशवासियों की श्रीक्षेत्र कुलदेवी मनु देवी का मंदिर। भुसावल से यावल 20 किमी की दूरी पर है। यावल से कुछ ही दूर आड़गाव में मनु देवी का स्थान है।
 
*  त्रिशक्ति पीठम्- श्रीकाली माता अमरावती देवस्थानम्। इस पवित्र स्थान को त्रिशक्ति पीठम् के नाम से भी जाना जाता है। आंध्रप्रदेश के विजयवाड़ा के गिने-चुने मंदिरों में से एक कृष्णावेणी नदी के तट पर बसा यह पवित्र मंदिर बेहद अलौकिक है।
 
*  आट्टुकाल भगवती- केरल के तिरुवनंतपुरम शहर में स्थित आट्टुकाल भगवती मंदिर की प्रसिद्धि पूरे दक्षिण भारत में है। पराशक्ति जगदम्बा केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम शहर की दक्षिण-पूर्व दिशा में आट्टुकाल नामक गांव में भक्तजनों को मंगल आशीष देते हुए विराजती हैं।
 
*  श्रीलयराई देवी- गोवा प्रांत के गांव में श्रीलयराई देवी का स्थान बहुत ही प्राचीन और प्रसिद्ध है। नवरात्रि में यहां पूरे गांव के लोग अंगारे पर बहुत ही सहजता से चलते हैं और उन्हें कुछ नहीं होता।
 
 

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