गुरुवार, 3 अप्रैल 2025
  • Webdunia Deals
  1. धर्म-संसार
  2. धर्म-दर्शन
  3. धार्मिक आलेख
  4. mauli kalawa
Written By

कलावा, मौली या नाड़ा, जानिए इसे बदलने के नियम

मौली
मौली बदलने के सिर्फ दो दिन शुभ हैं, पढ़ें जानकारी, बचें गलती से...
 
हिंदू धर्म में हाथ पर मौली बांधने का काफी महत्व है। हर पूजा पाठ या किसी भी शुभ काम से पहले हाथ पर मौली बांधी जाती है, जिसे कलावा या रक्ष सूत्र भी कहते हैं। अक्सर हम हाथ पर बंधे कलावा को बदलने से पहले दिन नहीं देखते। हाथ पर बंधा कलावा अगर काफी पुराना हो जाता है तो उसे कभी भी बदल कर नया बांध लेते हैं, लेकिन इसे अशुभ माना जाता है। 
 
- किसी भी धार्मिक कर्म कांड शुरू होने से पहले कलावा बांधा जाता है। वैसे मांगलिक कार्यक्रमों पर भी इसे बांधा जाता है। माना जाता है कि ये कलावा ही संकटों के समय हमारा रक्षा कवच बनता है, लेकिन इस कलावा को कभी भी नहीं बदलना चाहिए। 
 
सिर्फ मंगलवार और शनिवार कलावा बदलने का शुभ दिन होता है।  
 
- इसे बांधने से सकारात्मक ऊर्जा भी मिलती है। 
 
कलावा
 
- हमेशा ही ये दुविधा बनी रहती है कि पुरुष और औरतों के किस हाथ में कलावा बांधना चाहिए। पुरुषों और अविवाहित कन्याओं के दाएं हाथ पर और विवाहित स्‍त्री के बाएं हाथ पर कलावा बांधना चाहिए। कलावा बांधते समय याद रखें कि आपकी मुट्ठी बंधी होनी चाहिए।  
 
- कलावा को सिर्फ तीन बार ही लपेटना चाहिए। वैसे कलावा भी दो तरह के होते हैं। तीन धागों वाला और पांच धागों वाला। तीन धागों वाले कलावा में लाल, पीला और हरा रंग होता है। वहीं पांच धागे वाले कलावे में लाल, पीरा व हरे रंगे के अलावा सफेद और नीले रंग का भी धागा होता है। पांच धागे वाले कलावा को पंचदेव कलावा भी कहते हैं। 
 
- वैज्ञानिक तौर पर इसकी अहमियत देखी जाए तो कलावा डायबिटीज, ब्लड प्रेशर और हार्टअटैक जैसे रोगों से बचाने में मदद करता है। 
ये भी पढ़ें
गरुड़ पुराण : हरगिज न करें ये 5 काम, इनसे हो सकती है उम्र कम