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वल्लभाचार्य चरण का प्राकट्य
जगद्गुरु श्रीमद् वल्लभाचार्य चरण का प्राकट्य
श्रीवल्लभाचार्य जयंती
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अखंड भूमंडलाचार्य जगद्गुरु श्रीमद् वल्लभाचार्य चरण का प्राकट्य ही दैवी जीवों के उद्धार व जगत-कल्याण के लिए ही हुआ था। इसीलिए आपने तीन बार पैदल पृथ्वी परिक्रमा की तथा दैवी जीवों को शरण में लेकर चौरासी स्थानों पर श्रीमद् भागवत का पारायण करके चौरासी बैठकों की स्थापना की तथा अपने दिव्य ब्रह्मवाद की स्थापना की तथा भगवद्नुग्रह स्वरूप पुष्टि भक्तिमार्ग के सैद्धांतिक संप्रदाय का प्रचार-प्रसार किया।

आद्याचार्य वर्य श्रीविष्णुस्वामी संप्रदाय का नेतृत्व करते हुए चारों संप्रदायों के आचार्य, संत, महंत तथा साधुओं के अति आग्रह से आपने-अपने पुष्टि भक्ति मार्गीय वैष्णवों के समूह को भी साथ में लेकर प्रथम प्रधान महाकुंभ पर्व स्नान किया। यह इतिहास प्रसिद्ध है।

इसी प्रकार आप के आत्मजाचार्य प्रवर द्वय श्रीगोपीनाथचरण तथा श्रीमद् विट्ठलनाथजी (श्रीगुँसाईजी) ने भी इसी परंपरा को प्रशस्त करते हुए चतुः वैष्णव संप्रदायों के विशेष आग्रह से पुष्टि वैष्णव सृष्टि के साथ प्रथम स्नान किया।

तत्पश्चात्‌ श्रीविष्णु स्वामी संप्रदाय वालों ने आपको मंगलमय आचार्य तिलक किया था। स्वतः उस समय समस्त दिशाओं में झालर, घंटा, शंख ध्वनि से अलौकिक वातावरण सर्जित हो गया। इन सभी बातों के प्रमाण 84, 252 वैष्णव की वार्ता क्र. 105 में, निजवार्ता तथा घरू वार्ता में तथा श्रीबैठक चरित्र इत्यादि में उपलब्ध होता है।
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