महादेव यानी शिव यानी अमरत्व के देवता भगवान भोले की पूजा-अर्चना का मास श्रावण आते ही क्यों इतना महत्वपूर्ण होता है। जबकि भगवान की आराधना किसी भी मास में किसी भी दिन की जा सकती है। लेकिन श्रावण मास में इसका महत्व इसलिए अधिक माना गया है कि चहुँओर हरियाली ही हरियाली होती है। प्रत्येक नर-नारी का मन प्रसन्न रहता है। और भगवान की आराधना मन प्रसन्न होने पर ही सफल होती है।
आज हम महँगाई से जूझ रहे हैं। तनावग्रस्त जिंदगी में जी रहे हैं। किसी को घर की टेंशन तो किसी को दफ्तर की, किसी को बहू की तो किसी को जॉब की टेंशन। ऐसे में भगवान की आराधना करना बहुत मुश्किल होता है। श्रावण मास ऐसा है कि जब वर्षा की रिम-झिम बौछार पड़ती है और हरियाली देख मन को सुकून मिलता है।
भगवान शिव की प्रिय वस्तुएँ भी इसी माह में बहुतायत में मिलती हैं जैसे आँकड़े के फूल, धतूरे के फल, भाँग-बूटी आदि। भगवान को ये सब क्यों प्यारे हैं क्योंकि आम जनता इसका प्रयोग नहीं करती। ये जहरीली वस्तुएँ होती हैं। इसका तात्पर्य यह है कि भगवान शिव ने समस्त प्राणियों के दु:ख हर लेने की प्रवृत्ति अपना ली है और सभी को प्रसन्नचित रहने का आशीर्वाद दिया है। भगवान सदैव ध्यानमग्न रहते हैं। | | महादेव यानी शिव यानी अमरत्व के देवता भगवान भोले की पूजा-अर्चना का मास श्रावण आते ही क्यों इतना महत्वपूर्ण होता है। जबकि भगवान की आराधना किसी भी मास में किसी भी दिन की जा सकती है। लेकिन श्रावण मास में इसका महत्व इसलिए अधिक माना गया है। |
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श्रावण मास में भगवान शिव का ध्यान भक्तों की तरफ रहता है। इसीलिए इस मास में शिव आराधना कर उन्हें प्रसन्न कर आशीर्वाद लिया जाता है। जो नर-नारी शिवलिंग पर गंगा जल या शुद्ध जल में दूध-मिश्री मिलाकर उससे मस्तकाभिषेक कर महामृत्युंजय का यथाशक्ति जाप करते हैं, उनके सारे दु:ख भगवान हर लेते हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।
यदि मन में श्रद्धा, भक्ति, विश्वास हो तो निश्चित ही उस जातक के दु:ख दूर होते हैं। इस मास में नित्य प्रति पाठ किया जाए तो उस जातक के शरीर में एक नई चेतना का संचार होता है। नई ऊर्जा-शक्ति से भर जाता है। पूरे वर्ष इसी ऊर्जा के बल पर हर स्थिति से निपटने की शक्ति मिल जाती है।
अत: जिसे जितना समय मिले श्रावण मास में महामृत्युंजय का जाप करे, यदि पूरे मास न कर सके तो कम से कम श्रावण सोमवार में तो अवश्य करे। जाप करते समय कुशासन बिछाएँ व सिर पर कपड़ा अवश्य रखें।
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