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Navratri 2019: नवरात्रि में मां दुर्गा के 9 रूप करते हैं 9 ग्रहों को शांत, हर ग्रह की देवी है खास

गुरुवार,सितम्बर 26, 2019
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सूर्य की शांति करने के लिए इन पांच विधियों में से किसी भी एक विधि का प्रयोग किया जाता है। गोचर में सूर्य के अनिष्ट प्रभाव को दूर करने में ये उपाय विशेष रूप से उपयोगी हो सकते हैं।
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बुध सूर्य के सबसे निकट का ग्रह है। यह सौरमंडल का सबसे छोटा ग्रह है। यह जातक के दांत, गर्दन, कंधे व त्वचा पर अपना प्रभाव डालता है।
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हमारा जीवन प्रकृति और प्रारब्ध के द्वारा संचालित होता है, और भी कई कारण होते हैं लेकिन यहां हम बात करेंगे प्रकृति की और जानेंगे कि कैसे रंग और ग्रह हमारे जीवन को प्राभावित करते हैं। दरअसल, ग्रहों के कारण ही धरती पर तरह तरह की वनस्पतियां, खनिज पदार्थ ...
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एक बार सूर्य और चंद्र द्वारा शिकायत करने पर भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से इसका धड़ सिर से अलग कर दिया। फलस्वरूप धड़ केतु तथा सिर राहु कहलाया।
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पीड़ित जातक को चाहिए कि वह पीड़ित ग्रह के दंड को पहचान कर उक्त ग्रह की अनुकूलता हेतु उक्त ग्रह का रत्न धारण करें और संबंधित ग्रह के मंत्र को जपें तो जातक सुखी बन सकता है। साथ में जातक संबंधित ग्रह के क्षेत्र का दान और उस ग्रह के रत्न की माला से जप ...
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बुध युवा, राजकुमार, आकर्षक और सुकुमार ग्रह माने गए हैं। आइए जानें उन्हें कैसे शुभ बनाया जाए...
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मंगल को कुंडली में शुभ करना है तो 250 ग्राम बताशे मंगलवार को बहते जल में प्रवाहित करें। मंगलवार को किसी से भेंट स्वीकार न करें।
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चंद्र देव सौम्य और शीतल देवता हैं लेकिन कुंडली में अशुभ हो तो कई परे‍शानियां देते हैं आइए जानते हैं उन्हें शुभ कैसे बनाया जाए...
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सूर्य प्रत्यक्ष देवता हैं आइए जानें उन्हें अपनी चमकती सफलता के लिए कैसे शुभ बनाया जाए...
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केतु ग्रह की शुभता के लिए प्रस्तुत है मंत्र और उपाय ...
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राहु ग्रह से डरने के बजाय बेहतर है कि उन्हें कुंडली में अनुकूल बनाने के प्रयास किए जाए... आइए जानें मंत्र और उपाय
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काम, कला और सुंदरता के ग्रह शुक्र की शुभता कुंडली में बहुत जरूरी है। जीवन की समस्त भौतिक संपन्नताएं उन्हीं से मिलती है। आइए जानें उपाय.. .
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देवताओं के गुरुदेव बृहस्पति को कुंडली में शुभ कैसे बनाएं, आइए जानें सरल उपाय
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शनिदेव अत्यंत विशिष्ट देव हैं। वे ग्रह भी है और देवता भी.... उनका प्रताप ऐसा है कि वे राजा को रंक और रंक को राजा बना देते हैं.... आइए जानते हैं उनकी यह 16 विशेषताएं...
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श्री शनिदेव के बारे में भ्रांतियां प्रचलित हैं लेकिन बहुत कम लोग उनके बारे में जानते हैं। आइए जानते हैं श्री शनिदेव का संक्षिप्त परिचय:
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भारतीय ज्योतिष और पौराणिक कथाओं में 9 ग्रह गिने जाते हैं, सूर्य, चंद्रमा, बुध, शुक्र, मंगल, गुरु, शनि, राहु और केतु। सात घो़ड़े खींचते हैं सूर्य रथ को। यह सभी ग्रहों का मुखिया है।
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शुक्र ग्रह आकर्षण, ऐश्वर्य, सौभाग्य, धन, प्रेम और वैभव के कारक हैं। शुक्र जिसके केंद्र में त्रिकोणगत हों वह अत्यंत आकर्षक होता है।
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मनुष्य के जीवनकाल में उसके कुछ मित्र व शत्रु होते हैं। समान गुणधर्म एवं आचार-विचार वाले व्यक्तियों में अक्सर मित्रता होती है, वहीं विपरीत गुणधर्म एवं आचार-विचार वाले व्यक्तियों में मित्रता का अभाव होता है।
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राहु एक रहस्यमयी ग्रह है। आइए जानते हैं इसके विषय में 20 खास बातें
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