संसार के जो द्वंद्व हैं मान-अपमान, सुख-दुःख, राग-द्वेष आदि उन सब को मिटाने में हरिनाम संकीर्तन सिद्ध औषधि है। सिद्ध का अर्थ है जो कभी विफल न जाए। सिद्ध शब्द वहाँ प्रयोग होता है जो परिपक्व हो गया हो। जब चावल पक जाता है, तब बंगाल में कहते हैं कि चावल सिद्ध हो गया। वैसे ही जब साधक पक जाता है तो उसको सिद्ध कहते हैं। संसार के सभी द्वंद्वों को, सभी रोगों को...