मुख्य पृष्ठ >  धर्म-संसार
व्रत-त्योहार
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परशुराम जयंती
परशुरामजी का जन्म वैशाख शुक्ल पक्ष की तीसरी तिथि अर्थात तृतीया को रात्रि के प्रथम प्रहर में हुआ था। अतः इस दिन को परशुराम जयंती के रूप में मनाते हैं। यह प्रदोष व्यापिनी ग्राह्य होती है। यदि दो दिन प्रदोष व्यापिनी हो तो दूसरे दिन व्रत करना चाहिए....
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धर्मयात्रा
रोहणी नक्षत्र में जन्मे परशुराम  
दक्षिण कैलाश के शिव-शंभु... 
स्तंभेश्वर महादेव 
माँ चन्द्रिका देवी धाम 
हनुमान का अनोखा संग्रहालय 
अमंगल का करते मंगलनाथ 
दिगम्बर जैन क्षेत्र श्री महावीर 
देवास माता टेकरी 
 
और भी
ज्योतिष
 
शनि की अंतर्दशा ने बनाया मंत्री
कांग्रेस के युवा तेजतर्रार नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया का जन्म मंगल की महादशा में हुआ था। मंगल की महादशा के कारण इनकी बाल्यावस्था...
 
ज्योतिष एक नजर में
हर राशि का एक ग्रह होता है। वह उसका स्वामी कहलाता है। मेष और वृश्चिक का स्वामी मंगल है। वृषभ और तुला का स्वामी शुक्र है। मिथुन...
धर्म-दर्शन
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घावों की रामबाण दवा हैं क्षमा
किसी को क्षमा करना या किसी व्यक्ति से क्षमा माँगना दोनों ही कार्य अत्यधिक साहस, हिम्मत व विशाल हृदय होने पर ही पूर्ण हो सकते हैं। क्षमा की सीधी-सादी परिभाषा है माफ करना या अपने कृत्य के लिए माफी माँगना या प्रायश्चित करना...
पूजन का अंतकर्म आरती
अपनी आदत क्यों छोड़ें हम?
नवग्रह तीर्थ का निर्माण
जयंतसेनजी का चातुर्मास गुंटूर में
आचार्यश्री देवेन्द्रमुनिजी मसा
मानवीय स्वभाव है प्रशंसा सुनना