नृत्यगोपाल दास ने जताई शीघ्र श्रीराम मंदिर निर्माण की आशा

कानपुर| Author अवनीश कुमार| Last Updated: शनिवार, 7 अप्रैल 2018 (16:10 IST)
कानपुर। देश की जनता राम मंदिर निर्माण की आतुरता से प्रतीक्षा कर रही है। केंद्र में मोदी व प्रदेश में योगी की पूर्ण बहुमत की सरकारें हैं। इन सरकारों के कार्यकाल में ही अपेक्षा है कि मंदिर का निर्माण कार्य शुरू हो जाना चाहिए।

यदि ऐसा नहीं होता तो यह विश्वासघात होगा और संत समाज फिर मोदी सरकार का विरोध करेगा। यह बात देर शाम कानपुर आए न्यास बोर्ड के अध्यक्ष महंत ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कही।
कानपुर के सरसैया घाट स्थित श्रीराम-जानकी मंदिर में पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए श्रीराम मंदिर न्यास बोर्ड के अध्यक्ष महंत ने कहा कि केंद्र में मोदी और प्रदेश में योगी सरकारों को जनता ने पूर्ण बहुमत दिया है, लिहाजा उनका उत्तरदायित्व है कि वे जनभावनाओं के अनुरूप कार्य करें।

उन्होंने कहा कि राम मंदिर निर्माण में जो भी अड़चनें आ रही हैं, मोदी सरकार को उसे संवैधानिक तरीके से दूर करना चाहिए। उन्होंने विश्वास जताया कि मोदी सरकार के कार्यकाल में राम मंदिर निर्माण का कार्य शुरू हो जाएगा।
सरकार पर दबाव की बात आई, तो उन्होंने साफ किया कि जहां अपने होते हैं वहां पर दबाव नहीं बनाया जाता। लेकिन इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अगर अब मंदिर निर्माण नहीं हुआ तो भविष्य में भाजपा का ग्राफ गिर जाएगा।

यही नहीं, मोदी सरकार अगर मंदिर निर्माण शुरू नहीं करा पाई तो संत समाज आगे उनका विरोध करेगा। देश की जनता ने नरेन्द्र मोदी को अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर निर्माण कराने के लिए बहुमत दिया है। करोड़ों हिन्दुओं की भावनाओं का सम्मान करते हुए संसद में कानून बनाकर मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री से बहुत उम्मीदें हैं। आशा ही नहीं, पूर्ण विश्वास है कि संसद में कानून बनेगा और फिर श्रीराम मंदिर का निर्माण होगा। वर्ष 2019 से पहले मंदिर का निर्माण शुरू हो जाएगा। अब तो राज्यसभा में भी बहुमत मिल गया।
उन्होंने कहा कि अयोध्या में सरयू नदी काफी प्रदूषित हो रही है। सरकार को सरयू में गिरने वाले फैजाबाद के कई नालों पर तुरंत रोक लगा देनी चाहिए। हालांकि महंत ने कहा कि सरयू, गंगा की तुलना में अभी काफी निर्मल है।

मध्यप्रदेश की सरकार में संत को राज्यमंत्री का दर्जा दिए जाने पर उन्होंने कहा कि संत समाज के लोगों को राजनीति में नहीं आना चाहिए। संत समाज को राजनीति से दूर ही रहना चाहिए। योगी, साक्षी महाराज को लेकर उन्होंने कहा कि वे शुरू से ही राजनीति में हैं।

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