बाबा के अद्भुत कृतित्व के लिए उनकी जो मानसिकता उत्तरदायी है उसकी बुनावट का एक महत्वपूर्ण धागा यह अभय साधना है। इस केंद्र बिंदु के साथ ही अन्य महत्वपूर्ण बिंदु रहे बाबा की रूमानी तबीयत और स्वयं को पूरी तरह झोंक देने की आदत। उनकी रूमानी तबीयत की अभिव्यक्ति बाबा द्वारा स्थापित विभिन्न परिसरों आनंदवन, सोमनाथ, हेमलकसा, अशोक वन की रचना में साफ दिखाई देती है। ऋषि-मुनियों की भाँति ही बाबा को अरण्यों से बेहद लगाव रहा और उन्हीं की भाँति बाबा ने ऋचाएँ भी रची। बाबा कवि हैं। जहाँ तक स्वयं को झोंक देने का सवाल है, हालत यह है कि बाबा पर गंभीर बीमारियों के ही नहीं आदमियों.... |