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बाबा के अद्भुत कृतित्व के लिए उनकी जो मानसिकता उत्तरदायी है उसकी बुनावट का एक महत्वपूर्ण धागा यह अभय साधना है। इस केंद्र बिंदु के साथ ही अन्य महत्वपूर्ण बिंदु रहे बाबा की रूमानी तबीयत और स्वयं को पूरी तरह झोंक देने की आदत। उनकी रूमानी तबीयत की अभिव्यक्ति बाबा द्वारा स्थापित विभिन्न परिसरों आनंदवन, सोमनाथ, हेमलकसा, अशोक वन की रचना में साफ दिखाई देती है। ऋषि-मुनियों की भाँति ही बाबा को अरण्यों से बेहद लगाव रहा और उन्हीं की भाँति बाबा ने ऋचाएँ भी रची। बाबा कवि हैं। जहाँ तक स्वयं को झोंक देने का सवाल है, हालत यह है कि बाबा पर गंभीर बीमारियों के ही नहीं आदमियों....
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रूमानी दिल, फौलादी चरित्र
जिन युवाओं ने बाबा को सदा लेटे हुए ही देखा- कसरावद या आनंदवन की उनकी कुटिया में या किसी मंच पर, शायद ही कभी अंदाज लगा पाए होंगे कि यह शख्स जब खड़ा रहा करता था तब क्या कहर ढाता था। अपनी युवावस्था में धनी जमींदार का यह बेटा तेज कार चलाने और हॉलीवुड की फिल्म देखने का शौकीन था। अँगरेजी फिल्मों पर लिखी उनकी समीक्षाएँ इतनी दमदार हुआ करती थीं कि एक बार अमेरिकी अभिनेत्री नोर्मा शियरर ने भी उन्हें पत्र लिखकर दाद दी, लेकिन जब कुष्ठरोगियों की पीड़ा देखकर बाबा ने अपना घर छोड़ा तो वे सारी...
• बाँध पी‍ड़ितों के लिए आनंदवन छोड़ा • समाजसेवा के लिए वकालत छोड़ दी
• मौत के बाद भी जारी रहेगा आंदोलन • बापू और बाबा आमटे
• युवा नई राह ढूँढेंगे... • बाबा का सपना पूरा हो-मेधा पाटकर
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