देश के साठ करोड़ लोग झेल रहे हैं पानी की गंभीर किल्लत

नई दिल्ली| पुनः संशोधित गुरुवार, 14 जून 2018 (17:42 IST)
नई दिल्ली। की लगभग आधी आबादी यानी 60 करोड़ लोगों को पानी की गंभीर किल्लत झेलनी पड़ रही है जबकि 75 प्रतिशत आबादी को पीने के पानी के लिए दूर दूर तक जाना पड़ता है।
द्वारा आज यहाँ जारी एक रिपोर्ट में यह बात कही गई है। इसमें बताया गया है कि गांवों में 84 प्रतिशत आबादी जलापूर्ति से वंचित है। जो पानी उपलब्ध है उसमें भी 70 प्रतिशत प्रदूषित है। वैश्विक जल गुणवत्ता सूचकांक में 122 देशों में भारत 120वें स्थान पर है।

आयोग ने जल प्रबंधन के क्षेत्र में राज्यों में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए आज उनकी रैंकिंग जारी की है। नदी विकास, जल संसाधन एवं गंगा संरक्षण मंत्री नितिन गडकरी और नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमिताभ कांत तथा उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने 'समेकित जल प्रबंधन सूचकांक' नामक यह रिपोर्ट जारी करते हुए बताया कि इस मामले में गुजरात पहले स्थान पर है। इसके बाद क्रमश: मध्य प्रदेश, आंध्रप्रदेश, त्रिपुरा, हरियाणा और महाराष्ट्र का स्थान रहा है। रिपोर्ट वर्ष 2015-16 और 2016-17 के आंकड़ों पर तैयार की गई है।

गडकरी ने कहा कि देश की सबसे बड़ी समस्या पानी की है। इसके लिए उन्होंने खराब जल प्रबंधन को जिम्मेदार बताया। उन्होंने कहा कि मैं कहता हूं पानी की कमी नहीं है, पानी के नियोजन की कमी है। राज्यों के बीच जल विवाद सुलझाना, पानी की बचत करना और बेहतर जल प्रबंधन कुछ ऐसे काम हैं जिनसे कृषि आमदनी बढ़ सकती है और गांव छोड़कर शहर आए लोग वापस गांव की ओर लौट सकते हैं।

उन्होंने कहा कि चिरस्थायी संवहनीय कृषि का राज्यों का विकास में बड़ा योगदान होता है और इसके लिए पानी का प्रबंधन महत्वपूर्ण है। कुमार ने कहा कि देश में पानी की स्थिति अच्छी नहीं है। पिछले 70 साल में इस पर ध्यान नहीं दिया गया। हर साल इतनी बारिश होती है, बाढ़ आती है कि हमने कभी सोचा ही नहीं कि कभी पानी की समस्या भी हो सकती है। लेकिन, अब स्थिति ऐसी हो गई है कि इस विषय को गंभीरता से लेना होगा। उन्होंने कहा कि यदि हम अपने शहरों को केपटाउन नहीं बनाना चाहते तो अभी से जल प्रबंधन शुरू करना होगा।

दक्षिण अफ्रीका के शहर केपटाउन में पिछले दो साल से जारी सूखे के कारण लोग प्रति व्यक्ति प्रति दिन 50 लीटर पानी पर गुजारा कर रहे हैं। शहर ने कहा है कि अगले साल तक स्थिति और बिगड़ सकती है, जिससे जलापूर्ति बंद कर दी जाएगी और शहर के चुनिंदा स्थानों से लोगों को अपने राशन का 25 लीटर पानी लेकर आना पड़ेगा।

नीति आयोग द्वारा जारी रैंकिंग में 24 राज्यों के आंकड़े जारी किए गए हैं जिनमें बड़े राज्यों की श्रेणी में नीचे से चार राज्य झारखंड, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और बिहार हैं। वहीं, पूर्वोत्तर के तथा हिमालयी राज्यों में मेघालय का प्रदर्शन सबसे खराब रहा है। वर्ष 2015-16 की तुलना में 16-17 में सबसे ज्यादा सुधार राजस्थान, मेघालय, सिक्किम, त्रिपुरा, झारखंड, हरियाणा और गुजरात में देखा गया है।
राज्यों की रैंकिंग के लिए नौ वृहद पैमानों के 28 संकेतकों को आधार बनाया गया है। इन वृहद पैमानों में भूजल स्तर सुधार, बड़ी तथा मध्यम सिंचाई का आपूर्ति प्रबंधन तथा नीति एवं प्रशासन के लिए 15-15 अंक, वाटरशेड के विकास, सहभागी सिंचाई, खेतों में पानी बचाने के उपायों, ग्रामीण पेयजल तथा शहरी पेयजल एवं स्वच्छता के लिए 10-10 अंक रखे गए हैं। पांच अंक जल स्रोतों के विकास तथा जलाशयों के जीर्णोद्धार के लिए दिए गए हैं। कांत ने बताया कि वर्ष 2017-18 के लिए आँकड़े एकत्र करने का काम शुरू हो चुका है तथा आंकड़े जल्द ही जारी किए ज सकेंगे। (वार्ता)


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