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Last Updated : रविवार, 23 जनवरी 2022 (18:36 IST)

Subhash Chandra Bose: ‘मौत के रहस्‍य से लेकर गुमनामी बाबा तक’ नेताजी के बारे में 8 बेहद रोचक बातें जो आप नहीं जानते होंगे

Subhash Chandra Bose: ‘मौत के रहस्‍य से लेकर गुमनामी बाबा तक’ नेताजी के बारे में 8 बेहद रोचक बातें जो आप नहीं जानते होंगे - Subhash Chandra bose, who is Subhash Chandra bose
भारत के स्वतंत्रता संग्राम के महा नायक नेताजी सुभाषचंद्र बोस की 23 जनवरी को जयंती है। उन्होंने साल 1920 में ब्रिटिश सरकार की प्रतिष्ठित आईसीएस की परीक्षा पास करने के बाद भी उन्होंने वह नौकरी नहीं की। आइए जानते हैं उनके बारे में कुछ बेहद दिलचस्‍प बातें।

नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जन्म कब हुआ था?
उनका जन्म 23 जनवरी, 1897 को ओडिशा, बंगाल डिविजन के कटक में हुआ था। उनके परिवार में 14 सदस्य थे।

उन्होंने आईसीएस की जॉब क्यों छोड़ दी थी?
नेताजी ने 1920 में इंग्लैंड में इंडियन सिविल सर्विस एग्जामिनेशन क्लियर किया था। लेकिन जब उन्होंने आजादी के लिए भारत की लड़ाई के बारे में सुना तो 23 अप्रैल, 1921 को जॉब छोड़ दी थी।

इंडियन नेशनल कांग्रेस से उनका क्या संबंध रहा?
नेताजी कांग्रेस के गरम दल के युवा लीडर थे। वह 1938 और 1939 में कांग्रेस के अध्यक्ष बने। लेकिन महात्मा गांधी और कांग्रेस आलाकमान से मतभेदों के बाद 1939 में उन्होंने कांग्रेस के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था।

गांधी जी से उनको किस बात को लेकर मतभेद था?
वह गांधी जी की अहिंसा की विचारधारा से सहमत नहीं थे। उनका मानना था कि आजादी हासिल करने के लिए सिर्फ अहिंसात्मक आंदोलन ही पर्याप्त नहीं होंगे और सशस्त्र प्रतिरोध की वकालत की।

आजाद हिंद फौज के बारे में आप क्या जानते हैं?
उन्होंने 1942 में जापान के सहयोग से आजाद हिंद फौज का गठन किया था। उनकी आजाद हिंद फौज में ब्रिटिश मलय, सिंगापुर और अन्य दक्षिण पूर्व एशिया के हिस्सों के युद्धबंदी और बागानों में काम करने वाले मजदूर शामिल थे।

गांधी जी ने उनको क्या उपाधि दी थी?
राष्‍ट्रपिता महात्‍मा गांधी उन्‍हें बहुत मानते थे। उन्‍होंने नेताजी को 'देशभक्‍तों के देशभक्‍त' की उपाधि से नवाजा था। दिल्‍ली में संसद भवन में उनका विशालकाय पोर्टेट लगा है तो पश्चिम बंगाल विधानसभा भवन में उनकी प्रतिमा लगाई गई है।

उनकी मौत का क्या रहस्य है?
भारतमाता के वीर सपूत नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 18 अगस्‍त 1945 को विमान हादसे में रहस्‍यमयी ढंग से मौत हो गई थी। नेताजी की मौत आज भी लोगों के लिए पहेली बनी हुई है। तमाम किस्‍से कहानियों में उन्‍हें जीवित बताया गया है। नेताजी ने ताइवान से जापान के लिए उड़ान भरी थी। लेकिन उनका विमान ताइवान की राजधानी ताइपे में ही दुर्घटनाग्रस्‍त हो गया। वह टोक्‍यो जा रहे थे। विमान में अचानक से तकनीकी खराबी आ जाने के कारण आग लग गई और जलते-जलते वह क्रैश हो गया। बताया जाता है कि इस हादसे में नेताजी बुरी तरह से जल गए थे और उन्‍होंने पास के ही जापान के अस्‍पताल में दम तोड़ दिया। यह भी माना जाता है कि विमान हादसे में जो व्‍यक्ति बुरी तरह से जख्‍मी था और जिसने अस्‍तपाल में दम तोड़ा वह वाकई में सुभाषचंद्र बोस थे भी या नहीं। यह भी संभावना जताई गई के वह हादसे में बच गए हों। सरकार ने इस मामले की जांच के लिए तमाम जांच समितियां गठित कीं, लेकिन आज तक उनकी मौत कोई पुख्‍ता सुबूत नहीं मिल पाए हैं।

गुमनामी बाबा से उनका क्या संबंध है?
कहा जाता है कि नेताजी, गुमनामी बाबा बनकर फैजाबाद में लंबे समय तक रहे। 1985 में जब गुमनामी बाबा की मृत्यु हुई तो उनके सामान को देखकर सब दंग रह गए। गुमनामी बाबा फर्राटेदार अंग्रेजी, बांग्ला और जर्मन बोलते थे। उनके पास महंगी सिगरेट, शराब, अखबार, पत्रिकाएं आदि थीं। उनके सामान से नेताजी की निजी तस्वीरें भी मिलीं जिससे कयास लगाए गए कि वही नेताजी थी। रॉलेक्स की घड़ी, आजाद हिंद फौज की यूनीफॉर्म, 1974 में आनंद बाजार पत्रिका में छपी 24 किस्तों वाली 'विमान दुर्घटना की कहानी', शाहनवाज और खोसला आयोग की रिपोर्ट, आदि मिले। कहते हैं गुमनामी बाबा का अंतिम संस्कार उसी जगह किया गया जहां भगवान श्रीराम ने जल समाधि ली थी।