नहीं रहे गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर, लंबी बीमारी के बाद हुआ निधन

Last Updated: सोमवार, 18 मार्च 2019 (00:21 IST)
पणजी। गोवा के मुख्यमंत्री और देश के पूर्व रक्षा मंत्री का रविवार को दु:खद निधन हो गया। वे 63 वर्ष के थे। 4 बार गोवा के मुख्यमंत्री रहे पर्रिकर ने डोना पौला में स्थित अपने निजी आवास में शाम 6 बजकर 40 मिनट आखिरी सांस ली। उनका अंतिम संस्कार सोमवार को शाम 5 बजे पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा।
पिछले साल फरवरी में ही पर्रिकर को एडवांस्ड पैनक्रियाटिक कैंसर होने का पता चला था। इसके बाद न्यूयॉर्क, दिल्ली, मुंबई और गोवाके अस्पतालों में भी उनका इलाज चला था।

उनके निधन पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने गहरा शोक व्यक्त किया। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने ट्वीट किया, ‘गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर के निधन की सूचना पाकर शोकाकुल हूं।’ उन्होंने कहा कि पर्रिकर बेहद साहस और सम्मान के साथ अपनी बीमारी से लड़े।

राष्ट्रीय शोक का ऐलान : केंद्र सरकार ने पूर्व रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर के निधन पर सोमवार को राष्ट्रीय शोक का ऐलान किया है। राष्ट्रीय राजधानी और सभी राज्यों की राजधानियों व केंद्र शासित राज्यों में सोमवार को तिरंगा ध्वज आधा झुका रहेगा। उनका अंतिम संस्कार भी राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा।

मनोहर पर्रिकर का अंतिम संस्कार शाम 5 बजे : मनोहर पर्रिकर का पार्थिव शरीर सुबह 9.30 बजे पणजी में भाजपा के मुख्य कार्यालय लाया जाएगा, जहां भाजपा नेता उन्हें 10.30 बजे तक श्रद्धांजलि देंगे। 11 बजे से गोवा की आम जनता द्वारा उन्हें कला अकादमी में श्रद्धाजंलि अर्पित की जाएगी। यहीं से शाम 4 बजे उनकी अंतिम यात्रा निकलेगी और शाम 5 बजे एसएजी ग्राउंड, कैम्पल में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

गोवा में 7 दिन का राजकीय शोक : मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर के निधन के बाद गोवा में 7 दिन के लिए राजकीय शोक घोषित किया गया है। सोमवार को गोवा में सभी स्कूल कॉलेज बंद रहेंगे।

पूर्व रक्षा मंत्री पर्रिकर शनिवार देर रात से ही जीवनरक्षक प्रणाली पर थे। पर्रिकर के परिवार में दो पुत्र और उनका परिवार है।पणजी के पास स्थित उनके निजी आवास में ही मनोहर पर्रिकर का इलाज किया जा रहा था। डॉक्टर उनकी स्थिति में सुधार के लिए पूरी ताकत लगा रहे थे लेकिन आखिरकार उन्हें बचाया नहीं जा सका। जब देर शाम मनोहर पर्रिकर के घर बाहर सुरक्षा बढ़ा दी गई थी, तभी कुछ अनहोनी होने का आभास होने लगा था।
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रचारक के तौर पर शुरुआत कर गोवा के मुख्यमंत्री और देश के रक्षा मंत्री बनने वाले पर्रिकर की छवि हमेशा ही बहुत सरल और सामान्य व्यक्ति की रही। वह सर्वस्वीकार्य नेता थे। ना सिर्फ भाजपा बल्कि दूसरे दलों के लोग भी उनका मान-सम्मान करते थे। उन्होंने गोवा में भाजपा को मजबूत आधार प्रदान किया। लंबे समय तक कांग्रेस का गढ़ रहने वाले गोवा में क्षेत्रीय संगठनों की पकड़ के बावजूद भाजपा उनके कारण मजबूत हुई।
मध्यमवर्गिय परिवार में 13 दिसंबर, 1955 में जन्मे पर्रिकर ने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रचारक के रूप में करियर शुरू किया। यहां तक कि आईआईटी बंबई से स्नातक करने के बाद भी वह संघ से जुड़े रहे। सक्रिय राजनीति में पर्रिकर का पदार्पण 1994 में पणजी सीट से भाजपा टिकट पर चुनाव जीतने के साथ हुआ। वह 2014 से 2017 तक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कैबिनेट में रक्षा मंत्री रहे।
पर्रिकर के निधन पर शोक जताते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ट्वीट किया है, ‘श्री मनोहर पर्रिकर बेमिसाल नेता थे। एक सच्चे देशभक्त और असाधारण प्रशासक थे, सभी उनका सम्मान करते थे। देश के प्रति उनकी निस्वार्थ सेवा पीढ़ियों तक याद रखी जाएगी। उनके निधन से बहुत दुखी हूं। उनके परिवार और समर्थकों के प्रति संवेदनाएं। शांति।’
मोदी ने कहा कि जब पर्रिकर रक्षा मंत्री थे तो भारत ने कई फैसले दिए जिसने देश की सुरक्षा क्षमताओं को बढ़ाया, स्वदेशी रक्षा उत्पादन बढ़ाया और पूर्व सैनिकों के जीवन को बेहतर बनाया। उन्होंने कहा, ‘यह उनका मधुरभाषी व्यक्तित्व और मिलनसार स्वभाव था कि वह वर्षों तक राज्य के पसंदीदा नेता रहे। उनकी जन समर्थक नीतियों ने गोवा को प्रगति की नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया।’

एक दिन पहले ही मुख्यमंत्री आवास ने ट्विटर पर जानकारी दी थी कि पर्रिकर की हालत स्थिर है। चार बार गोवा के मुख्मंत्री की कुर्सी संभालने वाले मनोहर पर्रिकर के बारे रविवार की सुबह ही खबर आई थी कि खराब स्वास्थ्य के कारण वे इस बार लोकसभा चुनाव प्रचार में हिस्सा नहीं लेंगे लेकिन शाम होते होते सोशल मीडिया पर यह खबर जंगल में आग की तरह फैल गई कि उनकी हालत बेहद नाजुक बनी हुई है लेकिन कौन जानता था कि देर शाम वे इस दुनिया से दूसरी दुनिया में कूच कर जाएंगे।

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने रविवार को कहा कि भारत ने एक सच्चा देशभक्त खो दिया जिसका पूरा जीवन राष्ट्र और सिद्धांतों को समर्पित था। शाह ने कहा कि पर्रिकर ने दिखाया कि कैसे भाजपा का एक कार्यकर्ता ‘उसके सबसे कठिन समय में भी, राष्ट्र सर्वप्रथम, फिर पार्टी और स्वयं को अंत में रखने के सिद्धांत पर अटल रहता है।’

रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी उनके निधन पर शोक जताते हुए कहा कि सशस्त्र बलों को ताकतवर और आधुनिक बनाने में उनका योगदान अद्वितीय है।
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शाह ने कहा, ‘मनोहर पर्रिकर का निधन बेहद दुखदायी है। उनके रूप में भारत ने एक सच्चा देशभक्त खोया है जिसने निस्वार्थ भाव से अपना पूरा जीवन देश और सिद्धांतों के हवाले कर दिया। जनता के प्रति पर्रिकर का समर्पण और उनका कर्तव्य अनुकरणीय है। भारत के रक्षा मंत्री और गोवा के मुख्यमंत्री के रूप में उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा।’ उन्होंने कहा कि पूरी भाजपा पर्रिकर के परिवार के साथ है।
शाह ने ट्वीट किया है, ‘भाजपा के लाखों कार्यकर्ताओं और खास तौर से गोवा के लोगों के प्रति मैं संवेदनाएं व्यक्त करता हूं। गोवा के लोग उनके परिवार जैसे थे। ईश्वर उनके परिवार को यह आघात सहन करने की शक्ति दे। ओम शांति शांति शांति।’ पर्रिकर को निष्कपट, ईमानदार और संवेदनशील राजनीतिक कार्यकर्ता बताते हुए सीतारमण ने कहा कि ‘मैंने उनसे बहुत कुछ सीखा है।’

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उन्होंने ट्वीट किया, ‘मनोहर पर्रिकर नहीं रहे। निष्कपट, ईमानदार और संवेदनशील राजनीतिक कार्यकर्ता। वह सरल और जमीन से जुड़े थे, मैंने पर्रिकर से बहुत कुछ सीखा है। रक्षा मंत्री के तौर पर सशस्त्र बलों को आधुनिक और ताकतवर बनाने में उनका योगदान अद्वितीय है।’

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्वीट किया है, ‘गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर के निधन की सूचना से मैं बहुत दुखी हूं। वह एक साल तक पूरे साहस से अपनी बीमारी से लड़ते रहे। दलगत राजनीति से इतर सभी उनका मान-सम्मान करते थे और वह गोवा के सबसे लोकप्रिय बेटों में से एक थे। दुख की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिजन के साथ हैं।’ तमाम केन्द्रीय मंत्रियों, कांग्रेस नेताओं और विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने भी पर्रिकर के निधन पर शोक व्यक्त किया है।


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