कठुआ गैंगरेप मामला, पीड़िता की वकील को भी रेप का डर

सुरेश एस डुग्गर| पुनः संशोधित सोमवार, 16 अप्रैल 2018 (18:33 IST)
जम्मू। बहुचर्चित रसाना मामले में नए मोड़ आ रहे हैं। अगर जम्मू की जनता मामले की जांच सीबीआई से करवाने की मांग को लेकर आंदोलनरत है तो मामले के मुख्य आरोपी की मांग है कि सबका नारको टेस्ट करवाया जाए। अब मामले की सुनवाई 28 अप्रैल को में होगी। सोमवार को चीफ ज्युडिशियल मजिस्ट्रेट कठुआ ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद मामले की सुनवाई सेशन कोर्ट में स्थानांतरित कर दी। इस दौरान मुख्य आरोपी सांझीराम ने कोर्ट में चिल्लाकर नारको टेस्ट करवाने की मांग की। वहीं पीड़िता की वकील दीपिकासिंह राजावत ने अपने साथ रेप या हत्या कराए जाने की आशंका जताई है।

इससे पहले सोमवार सुबह दस बजे कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच पुलिस सभी आठ आरोपियों को चीफ ज्युडिशियल मजिस्ट्रेट कोर्ट में ले आई। सभी आरोपियों को आज जिला अदालत के समक्ष पेश किया गया। सुनवाई के बाद अभियुक्तों के वकील अंकुर शर्मा ने कहा कि न्यायालय ने निर्देश दिया है कि सभी आरोपियों को चार्जशीट की कॉपी दी जाएं। हम नारको टेस्ट के लिए तैयार हैं। सुनवाई के दौरान आरोपियों की ओर से पेश हुए वकीलों एके साहनी, अंकुर शर्मा ने कहा कि अभी तक आरोपियों को क्राइम ब्रांच की ओर से पेश की गई चार्जशीट की कॉपी तक नहीं दी गई है।

उन्होंने मामले की सुनवाई 28 अप्रैल करने का विरोध करते हुए कहा कि चार्जशीट 400 से अधिक पन्नों की है। इसे पढ़ने के लिए भी समय चाहिए, इसमें कई कमियां हैं। वकीलों ने यह भी कहा इसमें 239 गवाह हैं और इन्हें पेश करने में ही काफी समय लग जाएगा। ऐसे में फास्ट ट्रैक कोर्ट में 90 दिन में सुनवाई करना संभव नहीं है। इस दौरान कोर्ट में मौजूद आरोपी सांझीराम ने सभी आरोपियों के नारको टेस्ट करवाने की भी मांग की। करीब एक घंटे तक चली सुनवाई के दौरान कोर्ट लोगों और मीडिया से खचाखच भरा हुआ था।

इस दौरान सभी आठ आरोपी सांझीराम, परवेश, विशाल शर्मा, सुरेंद्र वर्मा, दीपक खजूरिया, तिलक राज और आनंद दत्ता समेत एक नाबालिग मौजूद थे। वहीं, मुख्य आरोपी सांझीराम ने भी कहा है कि वह नारको टेस्ट के लिए तैयार है। आरोपी का कहना है कि नारको टेस्ट के बाद सारी सच्चाई खुद सामने आ जाएगी। कोर्ट से बाहर आरोपी सांझी ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि उन्हें इस मामले में फंसाया जा रहा है। इसमें उनके नारको टेस्ट होने चाहिए ताकि सच सामने आए।

आरोपियों की ओर से मौजूद एडवोकेट अंकुर शर्मा ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि यह मामला राजनीति से प्रेरित है। इसमें सरकार को सीबीआई से जांच करवानी चाहिए। आरोपी सांझीराम की बेटी ने कहा कि उनके पिता और भाइयों को सोची समझी साजिश के तहत फंसाया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार को इस मामले में सीबीआई जांच करवाने से क्या ऐतराज है। कठुआ मामले में मुख्य आरोपी सांझीराम की बेटी ने इस घटना को षड्यंत्र बताया है। उसने कहा कि वो बच्ची कोई हिंदू-मुसलमान की बच्ची नहीं थी। उस बच्ची के साथ कोई दुष्कर्म नहीं हुआ है, उसका मर्डर हुआ है। उस मर्डर की छानबीन सीबीआई करे, तभी यह केस हल होगा अन्यथा निर्दोष
ही फंसेंगे।

यह सुनवाई आठ आरोपियों के खिलाफ की गई, जिन पर 8 साल की बच्ची के साथ सामूहिक दुष्कर्म के बाद उसकी हत्या करने का आरोप लगा है। आरोप है कि इन्होंने 8 साल की बच्ची को जनवरी में अगवा किया और एक सप्ताह तक मंदिर में बंधक बनाकर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। आरोपियों में एक नाबालिग भी शामिल है, जिसके खिलाफ एक अलग चार्जशीट दाखिल की गई है। वहीं पीड़िता की वकील दीपिकासिंह राजावत ने अपने साथ रेप या हत्या कराए जाने की आशंका जताई है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर से बाहर केस ट्रांसफर करने की मांग की है।

अधिकारियों ने कहा कि कठुआ के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कानून के अनुसार एक चार्जशीट को सुनवाई के लिए सत्र अदालत के पास भेजेंगे जिसमें सात लोग नामजद हैं। हालांकि नाबालिग आरोपी के खिलाफ मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुनवाई करेंगे, क्योंकि किशोर कानून के तहत यह विशेष अदालत है। जम्मू-कश्मीर सरकार ने इस संवेदनशील मामले में सुनवाई के लिए दो विशेष वकीलों की नियुक्ति की है और दोनों ही सिख हैं। इस बीच कठुआ (रसाना) हत्याकांड की जांच और पूरे प्रकरण में वकीलों की भूमिका की समीक्षा करने के लिए बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) की पांच सदस्यीय टीम 20 अप्रैल को जम्मू जाएंगी।

यह टीम कठुआ के रसाना गांव जाकर जमीनी हालात की समीक्षा करेगी। टीम अपने दौरे के दौरान पीड़ित परिवार के सदस्यों से भी मिलेगी। उसके बाद जम्मू में जे एंड के हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों से बैठक कर पूरे प्रकरण में वकीलों की भूमिका की पड़ताल करेगी। दरअसल रसाना मामले में राष्ट्रीय स्तर पर यह संदेश गया है कि बार एसोसिएशन ने आरोपितों को बचाने का प्रयास किया और इसके चलते जम्मू बंद रखा गया। ऐसे में बार काउंसिल की टीम का यह दौरा महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

रविवार को दिल्ली में बार काउंसिल ऑफ इंडिया की बैठक हुई जिसमें पूरे मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया। दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस तरुण अग्रवाल की अध्यक्षता में गठित कमेटी में बार काउंसिल ऑफ इंडिया के सह-चेयरमैन एस प्रभाकरण व रमेश चंद्रा, बार काउंसिल ऑफ उत्तराखंड की प्रमुख रजिया बेग तथा पटना हाई कोर्ट के वकील नरेश दीक्षित शामिल हैं। बीसीआई ने फैसला किया है कि उक्त कमेटी की रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट के सामने पेश की जाएगी।


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