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भारत से बाघों के सफाए में चीनी तस्करी का हाथ

पुनः संशोधित सोमवार, 17 जुलाई 2017 (19:57 IST)
जयपुर। वन्य जीवों के अधिकारों के लिए संघर्षरत राष्ट्रीय संस्था पीपुल फॉर एनीमल्स के प्रदेश प्रभारी बाबूलाल जाजू ने कहा कि भारत में बाघों के अंगों की तस्करी के चलते पिछले ढाई वर्ष में 269 बाघों की मौत चिंताजनक है। बाघों के अंगों का चीन सबसे बड़ा खरीददार है और चीनी बाजार में एक मृत की कीमत 60 लाख रुपए आंकी जाती है।
      
जाजू ने सोमवार को एक बयान जारी कर कहा कि भारत से बाघों के सफाए में चीन का हाथ होने के साथ ही देश में राष्ट्रीय पार्कों की सुरक्षा व्यवस्था कमजोर होना भी मुख्य कारण रहा है। उन्होंने कहा कि बाघों के अंगों का चीन सबसे बड़ा खरीददार है और चीनी बाजार में एक मृत बाघ की कीमत 60 लाख रुपए आंकी जाती है। 
       
उन्होंने कहा कि बाघ की खोपड़ी 500 डॉलर, खाल 20000 डॉलर, मांस 100 डॉलर प्रति किलो, खून 600 डॉलर प्रति लीटर, लिंग 4000 डॉलर, पंजे तथा दांत 900 डॉलर, हड्डियां 6000 डॉलर प्रति किलो तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में बिक रहे हैं। भारत में सबसे अधिक बाघ अंगों की तस्करी उत्तर प्रदेश से लगती हुई सीमा से होती है जिसमें नेपाली एवं तिब्बती तस्कर भी लगे हुए हैं। 
         
उन्होंने कहा कि वर्ष 2015 में 80 बाघों का शिकार हुआ था वहीं 2016 में 122 बाघों का शिकार एवं 2017 में मात्र 6 माह में 67 बाघों की मौत चिंताजनक है। जाजू ने बताया कि टाइगर प्रोजेक्ट द्वारा वित्तीय वर्ष 2015-16 में बाघ संरक्षण पर 380 करोड़ रुपया खर्च होना बताया है, जो मौजूदा जीवित बाघों पर लगभग 25 लाख रुपया प्रति बाघ प्रतिवर्ष है।
      
जाजू ने बताया कि टाइगर प्रोजेक्ट भारत में जीवित बाघों की संख्या 3891 होने का दावा कर रहा है जो झूठ का पुलिन्दा नजर आता है। हकीकत में देश में बाघों की संख्या 2500 के लगभग ही है। उन्होंने बताया कि 20वीं सदी में जहां देश में एक लाख बाघ हुआ करते थे और आजादी के समय देश में 40 हजार बाघ मौजूद थे लेकिन करोड़ों रुपए इनके संरक्षण पर खर्च करने के बावजूद इनकी संख्या नाममात्र की रह गई है जो अत्यधिक निंदनीय एवं चिंताजनक है।
       
उन्होंने प्रधनमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर बड़ी तादाद में बाघों की हुई मौत के जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही करने तथा टाइगर रिजर्व की सुरक्षा व्यवस्था सेना को सौंपने की मांग की है। (वार्ता)


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