चारधाम यात्रा के श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण की नई व्यवस्था

पुनः संशोधित शुक्रवार, 23 फ़रवरी 2018 (20:30 IST)
देहरादून। बद्रीनाथ मंदिर में स्थानीय उत्पादों से निर्मित प्रसाद बेचने से हुए लाभ से उत्साहित ने चारधाम यात्रा के मद्देनजर सभी मंदिरों के लिए ऐसे प्रसाद को प्रोत्साहित करने का निर्णय लिया है।
राज्य में हर वर्ष लगभग तीन करोड़ श्रद्धालु आते हैं जिनमें से अगर केवल 80 लाख श्रद्धालुओं को भी 100-100 रुपए का प्रसाद बेचा जाए तो महिला समूहों को 80 करोड़ रुपए की आय हो सकती है।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने आज बताया कि विश्वप्रसिद्ध बद्रीनाथ धाम में तीन महिला स्वयं सहायता समूहों ने स्थानीय उत्पादों, मंडुआ, कुट्टू और चौलाई से प्रसाद तैयार किया और स्थानीय रेशों जैसे कि बांस और रिंगाल से बनी टोकरियों में इसकी पैकेजिंग की।

वत ने बताया कि 10-10 महिलाओं के तीन समूहों ने बद्रीनाथ धाम में मात्र दो महीने में स्थानीय उत्पादों से निर्मित 19 लाख रुपए का ऑर्गेनिक प्रसाद बेचा। प्रसाद की इनपुट लागत 10 लाख रुपए रही और नौ लाख रु का शुद्ध मुनाफा हुआ। इस तरह समूह की प्रत्येक महिला को 30 हजार रुपए की आमदनी प्राप्त हुई। इस प्रयोग की सफलता के बाद उत्तराखण्ड के 625 मंदिरों में स्थानीय उत्पादों से निर्मित प्रसाद बेचा जाएगा।

रावत ने कहा कि राज्य में हर वर्ष लगभग तीन करोड़ श्रद्धालु आते हैं जिनमें से अगर केवल 80 लाख श्रद्धालुओं को भी 100-100 रुपए का प्रसाद बेचा जाए तो महिला समूहों को 80 करोड़ रुपए की आय हो सकती है। (भाषा)

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