पाक को जोरदार घूंसा देने की दरकार...



खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे। की ये नागवार हरकतें इस को सौ प्रतिशत
चरितार्थ करती हैं। पाकिस्तान पर अलग-थलग पड़ गया है अमेरिका की
लताड़ सैकड़ों बार पड़ चुकी है। चीन की पुचकार से उसका वहम कायम रहता है। लेकिन चीन
के लिए फायदा भारत का आर्थिक साझेदार बनकर है, न कि पाकिस्तान का कूटनीतिक
हमदर्द बनने में। पिछले 3 सालों में चीन भी इस बात को समझ चुका है कि भारत उसके लिए कितना बड़ा बाजार है।

चीनी सामान के बहिष्कार की अपील भर से दिवालियों में चीनी बाजार बेजार हो जाते हैं।
यदि चीनी सामान पर आधिकारिक तौर पर बैन किया जाता है तो नि:संदेह वो भिखारी या
कंगाल तो नहीं, मगर तंगहाल जरूर हो जाएगा। ये वही चीन है, जहां अजान तो क्या
मस्जिदों की भी इजाजत नहीं, मगर पाकिस्तान है कि समझता ही नहीं।

खैर, बात पाकिस्तान की करते हैं। पिछले कुछ समय से का मुद्दा अंतरराष्ट्रीय मंच पर सुर्खियां बटोर रहा था। भारत की कूटनीतिक कामयाबी का नतीजा है कि
उसे इस मुद्दे पर पर दबाव बनाने में कामयाबी मिल भी रही थी। अभी बात आगे बढ़ती
थी कि पाक ने फिर अपनी जानी-पहचानी नापाक नपुंसकता वाली हरकत कर दी और वह 2
भारतीय जांबाजों के सिर कलम करके ले गया।

सोचिए, बेचारे पाक के पास रास्ते क्या है अपनी दुर्भावना को व्यक्त करने के। वो हमारा बीमार कमजोर पड़ोसी है। भारत से प्रतियोगिता की चाह है। उससे आगे निकलने की होड़ में
वो क्या कर सकता है?

कभी आपने सुना है कि उसने कोई सैटेलाइट लांच किया हो। अमुक दवाई की खोज की हो
या अंतरराष्ट्रीय मंच पर कोई ऐसा काम किया हो जिसमें एशिया का सर गर्व से ऊंचा हुआ
हो? मेरी समझ में तो ऐसी कोई घटना ही नहीं है इक्का-दुक्का क्रिकेट को छोड़कर।
पाकिस्तान के ज्यादातर गंभीर बीमारी से पीड़ित यहां (भारत के) सरकारी और निजी अस्पतालों में जान बचाने के लिए आते हैं।

आर्थिक और तकनीकी रूप से पाकिस्तान की हालत दो कौड़ी की भिखारी वाली है। बरसों तक
अमेरिका के टुकड़ों पर पला और अब पाला बदल लिया। उसकी हालत उस अहसानफरामोश
कुत्ते वाली है, जो उसको हड्डी फेंकता है उसकी तरफ दुम हिला देता है। लेकिन हमारे यहां
कुत्ते भी पाकिस्तानी परंपरा में पले-बढ़े नहीं हैं। वफादारी की मिसालों से उनकी कहानियां
भरी पड़ी हैं।

के बाद पाकिस्तान अलग-थलग पड़ गया था। भले ही वो सर्जिकल स्ट्राइक
को झुठलाता रहा हो लेकिन झुठलाने की उसकी पुरानी आदत है। इसमें नया क्या है? चाहे
मुंबई हमला हो, सिलसिलेवार विस्फोट हो, शहीदों के सिर काटने की बात हो या घुसपैठ की
कोशिशें हों, उसको हर बात का सबूत चाहिए वरना खारिज! पाकिस्तान की हालत उस नामुराद बेटे की तरह है, जो अपने बाप से भी बाप होने का सबूत मांगता है।

की आजादी को दशकों हो चुके हैं लेकिन वैमनस्य और जलन के
कारण वो आज भी वहीं है, जहां से 1947 से चला था। इसके विपरीत तमाम विरोधाभासी
परिस्थितियो में भी भारत विश्व की आर्थिक सामरिक शक्ति बनने के कगार पर है। उसके पास इतना बड़ा सैन्य बेड़ा या साजोसामान भी नहीं होगा जितना प्रतिवर्ष भारत रिटायर कर
देता होगा या कबाड़ में बेच देता होगा।

ले-देकर उसके पास गीदड़भभकी बचती है परमाणु हमले की, जो या तो उसे भीख में मिली है
या चोरी की है। लेकिन हुजूर, जरा सोचिए 20 साल से आपकी परमाणु तकनीक में भी कोई
परिवर्तन नहीं हुआ है जबकि भारत के पास डीआरडीओ जैसे कई संस्थान हैं। आईआईटी का
बच्चा-बच्चा हर पल सैन्य उपकरणों को और बेहतर बनाने की जुगत में रहता है और आप हैं कि तांबे-पीतल के तार से आरडीएक्स जोड़कर खुश हो जाते हों।

भारत की उन्नत सैन्य तकनीक को समझना आपके बस की बात नहीं। बस में है तो चोरों
की तरह घुसपैठ, बम धमाकों की कायराना साजिश और सैनिकों के शवों के साथ खिलवाड़।
जिन सैनिकों के आपने सिर काटे, ये बात तो पक्की है कि वे जिंदा नहीं होंगे। अगर जिंदा
होते तो आपकी घरवापसी करवा देते।

भारतीय सैनिकों के सिर कटने के लिए ही बने हैं, क्योंकि वे झुकना नहीं जानते। एक आपके सैनिक हैं, जिन्होंने 1971 की लड़ाई में सिर झुकाए थे याद है ना? भारत जवाब देगा और
नि:संदेह पाकिस्तान को अपनी गलती पर पछतावा होगा, मगर तब तक एक बार फिर देर हो
चुकी होगी।

थप्पड़ कई बार मारा है पाक को इसलिए तिलमिलाया हुआ है। अब उसको थप्पड़ की नहीं,
जोरदार घूंसे की दरकार है।





वेबदुनिया हिंदी मोबाइल ऐप अब iOS पर भी, डाउनलोड के लिए क्लिक करें। एंड्रॉयड मोबाइल ऐप डाउनलोड करने के लिए क्लिक करें। ख़बरें पढ़ने और राय देने के लिए हमारे फेसबुक पन्ने और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं।



और भी पढ़ें :

इसलिए जरूरी है बच्चों का मुंडन संस्कार, पढ़ें 5 जरूरी बातें

इसलिए जरूरी है बच्चों का मुंडन संस्कार, पढ़ें 5 जरूरी बातें
मुंडन संस्कार के बारे में मान्यता है कि इससे शिशु का मस्तिष्क और बुद्धि दोनों ही पुष्ट ...

दूध नहीं पीते हैं मोटे होने के डर से तो यह 4 स्वादिष्ट ...

दूध नहीं पीते हैं मोटे होने के डर से तो यह 4 स्वादिष्ट विकल्प हैं आपके लिए
अगर आप वजन को बढ़ने से रोकना चाहते हैं और हेल्थ से किसी तरह के समझौते को तैयार नहीं तो ...

हमारे देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी मानते हैं मोर ...

हमारे देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी मानते हैं मोर पंखों को शुभ, पढ़ें 10 चौंकाने वाली बातें
मोर, मयूर, पिकॉक कितने खूबसूरत नाम है इस सुंदर से पक्षी के। जितना खूबसूरत यह दिखता है ...

अजी अंडा छोड़िए, इन 5 शाकाहारी चीजों में है भरपूर प्रोटीन

अजी अंडा छोड़िए, इन 5 शाकाहारी चीजों में है भरपूर प्रोटीन
हाल ही में पोलैंड की पशु चिकित्सा सेवा ने करीब 40 लाख अंडों को बाजार से हटा लिया है। ये ...

तुरंत फेंक दे अपना पुराना लूफाह वर्ना संक्रमण का है खतरा

तुरंत फेंक दे अपना पुराना लूफाह वर्ना संक्रमण का है खतरा
नहाते हुए अपने शरीर की वह त्वचा व हिस्सा, जो केवल साबुन से साफ नहीं हो पाता, उसकी सफाई के ...

शादीशुदा लोगों को कम होता है हृदय रोग का खतरा

शादीशुदा लोगों को कम होता है हृदय रोग का खतरा
लंदन। एक अध्ययन में दावा किया गया है कि शादी से लोगों को दिल की बीमारियों और स्ट्रोक से ...

4 टिप्स से जानें आपकी त्‍वचा के लिए कितने एसपीएफ वाला ...

4 टिप्स से जानें आपकी त्‍वचा के लिए कितने एसपीएफ वाला सनस्क्रीन सही होगा?
आमतौर पर आपने दूसरों से सुना होगा कि जितना ज्यादा एसपीएफ वाला सनस्क्रीन लगाएंगे उतना ही ...

हाथों में मेहंदी का रंग गहरा करने के 10 टिप्स

हाथों में मेहंदी का रंग गहरा करने के 10 टिप्स
मेहंदी से रचे हाथ किसे अच्छे नहीं लगते! जिनके हाथों में मेहंदी लगती है वे उसके रंग को ...

अचानक धन मिल जाए तो बात बन जाए.. अगर आप भी ऐसा सोचते हैं तो ...

अचानक धन मिल जाए तो बात बन जाए.. अगर आप भी ऐसा सोचते हैं तो यह 6 उपाय आजमाएं
परिश्रम से बड़ा कोई धन नहीं। लेकिन सांसारिक सुखों को हासिल करने के लिए जो धन चाहिए वह अगर ...

धूमावती जयंती 2018 : मनोवांछित फल पाना है तो ऐसे करें पूजन, ...

धूमावती जयंती 2018 : मनोवांछित फल पाना है तो ऐसे करें पूजन, पढ़ें ये विशेष मंत्र...
वर्ष 2018 में 20 जून, बुधवार को धूमावती जयंती है। इस विशेष अवसर पर ब्रह्म मुहूर्त में ...