कमाई के मामले में गूगल का जवाब नहीं

# माय हैशटैग
अगर गूगल का नाम दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों में शुमार है और उसके शेयर के दाम आकाश पर हैं, तो इसका मतलब यह है कि जबरदस्त है। हर 3 महीने में सामने आने वाले गूगल एड सेल्स के आंकड़े यही बात साबित करते हैं। गूगल नए-नए तरीके से विज्ञापनदाताओं को आकर्षित भी करता है और दबाव भी डालता है।

जनवरी से मार्च 2018 के एड सेल्स की बात करें, तो गूगल की आय में पिछले वर्ष इसी अवधि के तीन महीनों की तुलना में लगभग तीन गुना ज्यादा राजस्व की प्राप्ति हुई। 2017 में इस अवधि में गूगल को 250 करोड़ डॉलर की आय एड सेल्स से हुई थी, जो इस साल बढ़कर 730 करोड़ डॉलर हो गई। रुपए में देखा जाए, तो यह राशि करीब-करीब 43800 करोड़ होती है। तीन महीने में 43800 करोड़ रुपए। आप अंदाज लगा लीजिए की एक माह और एक दिन में यह कितनी आय होगी। खास बात यह है कि इसमें दिन गुनी और रात चौगुनी वृद्धि होती जा रही है। औसतन प्रतिमाह गूगल को विज्ञापन से होने वाली आय में वृद्धि होती ही जा रही है।

गूगल को इतनी आय तब हो रही है, जबकि चीन और जापान जैसे कई देशों में उसकी पहुंच बहुत सीमित है। चीन ने गूगल की तरह अपना खुद का सर्च इंजन और नेटवर्क तैयार कर रखा है। बिग डाटा के मामले में गूगल का जवाब नहीं। उसके पास फेसबुक, ट्विटर, वाट्सएप और यू-ट्यूब से कहीं ज्यादा गुना डाटा उपलब्ध है। पूरी दुनिया में अलग-अलग देशों की सरकारें इस बात की वकालत करती रहती हैं कि कोई ऐसी प्रणाली विकसित की जाए, जिससे डाटा पर गूगल का नियंत्रण थोड़ा कम हो सके।

बड़ी दिलचस्प बात यह है कि बिजनेस घरानों से लेकर सरकारें तक गूगल पर विज्ञापन कर रही हैं। लोगों को लगता है कि का नया और प्रभावी माध्यम है। इसके जवाब में गूगल भी अपना विज्ञापन करता है, लेकिन गूगल के विज्ञापन टेलीविजन चैनल और बस स्टॉप पर होर्डिंग के रूप में भी नजर आते हैं। मतलब यह कि गूगल को लगता है कि बस स्टॉप पर होर्डिंग लगाना फायदे का सौदा है और कंपनियों और सरकारों को लगता है कि गूगल उनके लिए विज्ञापन का सशक्त माध्यम है।

गूगल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुंदर पिचाई ने अपने अधिकारियों से बातचीत में यह बात स्पष्ट की कि गूगल की आय का प्रमुख स्त्रोत विज्ञापन के बजाय सर्च के दौरान पहले लिंक दिखाना है। इसका मतलब यह है कि जब आप गूगल पर कुछ भी सर्च करते हैं और आपकी सर्च के रिजल्ट के ऊपर जो भी नतीजे दिखाए जाते हैं, वे सब विज्ञापन होते हैं। गूगल ने उसे अल्फाबेट नाम दिया है।

गूगल की आय के कारण उसके शेयर होल्डर्स को भी अच्छा खासा मुनाफा हो रहा है। गूगल ने जनवरी से मार्च के तीन महीनों में अपने शेयर होल्डर्स को 940 करोड़ डॉलर लाभांश दिया यानि प्रति शेयर 13.33 डॉलर। इसी हिसाब से देखें, तो प्रति शेयर 40 डॉलर की इनकम शेयर धारकों को अपेक्षित है। अनुमान था कि इस तिमाही में शेयर धारक प्रति शेयर 9.28 डॉलर तो कमा ही देंगे, लेकिन शेयर धारकों की आय ज्यादा हुई।

गूगल के अल्फाबेट्स को ज्यादा आय हुई है, नए स्टार्टअप से। खासकर उबर और एयर बीएनबी जैसी कंपनियों से। नए स्टार्टअप आमतौर पर गूगल अल्फाबेट की सेवा लेते हैं। गूगल को यूएस में टैक्स की कमी का फायदा भी हुआ। पिछले साल यह टैक्स 20 प्रतिशत था, जो घटकर 11 प्रतिशत रह गया है।

अपनी विशाल जमापूंजी से गूगल दुनियाभर में प्रमुख कंपनियों का अधिग्रहण कर रहा है। उसने ताईवान में 110 करोड़ डॉलर में एचटीसी कॉर्प का अधिग्रहण किया, जिसके 2000 कर्मचारी हैं। यू-ट्यूब की नई टीवी सीरीज में भी गूगल ने पैसा लगा रखा है, जहां उसने स्ट्रीमिंग के अधिकार ले रखे हैं। गूगल असिस्टेंट वर्च्युअल हेल्पर सर्विस और डाटा एनालिटिक्स टूल्स भी गूगल की सेवाओं में शामिल है। अपनी आय का बड़ा स्त्रोत गूगल अब मेडिकल टेक्नोलॉजी और ड्रोन्स में भी निवेश कर रहा है। इसके अलावा अपने आप चलने वाले वाहन का विकास भी गूगल की प्राथमिकताओं में है।

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