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मदर्स डे : बिन मां के...न मायका, न जायका

Author प्रीति सोनी|


मां...इस एक छोटे से शब्द में छि‍पे हैं - असंख्य, अपार, अकल्पनीय, अप्रत्यक्ष उमड़ते बेहद अहम भाव। जिन्हें न तो कहा जा सकता है, न सुना, ना ही जताया जा सकता है और ना बताया जा सकता है। इसे बस महसूस किया जा सकता है...संजोया जा सकता है।
 
एक पूरी दुनिया समायी है इस शब्द में, जो मां से शुरु होकर बस मां पर ही खत्म होती है। इस मां शब्द में ही छुपा है एक मां से लेकर बच्चे, परिवार, संस्कार, संवेदनाओं और खुशियों का संपूर्ण संसार। 
 
मां है तो सब कुछ है, मां नहीं तो कुछ नहीं
बिन मां के, न सजे बेटी का मायका 
न पकवान में हो जायका 
 
न घर की देहरी पर, सुहानी लगे शाम 
न दिया बाती लगे न राम का नाम 
 
मातृदिवस यानि मां के रूप में धरती पर ईश्वर के अवतार को धन्यवाद देने का दिन, उसके स्नेह, और त्याग के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का दिन और मां के प्रति अपने भावों को अभिव्यक्त करने का दिन। हां यह सच है कि इन सभी के लिए कोई एक विशेष दिन नहीं होना चाहिए, बल्कि ममता की उस मूरत के प्रति हर दिन भी कृतज्ञता व्यक्त की जाए तब भी पूरा जीवन कम पड़ जाए, लेकिन यह भी सच है कि इस विशेष दिन की बदौलत हममें से कई लोग संकोच और शर्मीली मुस्कान के साथ मां को शुभकामनाएं देते हैं। 
 
मां से प्रेम अथाह हो भले, मुंह से कभी कहा ना जाए
मां समझे हर बात है मन की, उससे कुछ न छुपे-छुपाए 
 
 
जितने अधिकार के साथ साल भर, हर दिन मां को परेशान करते हैं उतने ही सॉरी और थैंक्यू के भाव होते हैं उस शर्मीली-सी मुस्कान में, जिसे मां तुरंत पकड़ भी लेती है। लेकिन उसे अच्छा लगता है...भले ही बच्चों द्वारा दिए जाने वाले भरे उपहार, उसके और असंख्य उपकारों के आगे कुछ भी न हो, लेकिन उसे देखते ही कई बार मां की पलकें भीग जाती है। 
 
वो महसूस करती है, कि उसके शरीर और आत्मा का वह अंश, जिसके प्रति उस मां का पूरा जीवन समर्पित है, मां को समझता है...उसकी चिंताओं को समझता है। भले ही मां के रोकने-टोकने या ज्यादा चिंता व देखभाल से वह कभी चिड़चिड़ा हो जाता है, लेकिन इन भावों के पीछे उमड़ते प्रेम के भाव को अनदेखा नहीं करता। वह समझता है और उसे एहसास भी होता है। वह जानता है कि मां हर गलती माफ कर देगी...। 
 
 
हर नादानी माफ करे वो, समंदर से गहरा उसका मन 
लाख कहो और लाख न मानो, फिर भी लाख करे है जतन 
 
 
भले ही पिता के साथ मिलकर वह मां की छोटी-छोटी बातों पर मस्ती में हंसता हो, लेकिन पिता से कहा-सुनी होने पर वह मां के साथ ही खड़ा दिखाई देता है। भले ही किसी कार्यक्रम में जाते वक्त वह मां पर गुस्सा करता हो - फिर वहीं साड़ी पहन ली तुमने, कितनी बार कहा है यह साड़ी मत पहना करो...। लेकिन वह चाहता है कि उसकी मां सबसे अच्छी दिखे। वह जितनी खूबसूरत बच्चे के लिए है, उतनी ही खूबसूरत दुनिया को भी दिखे।
 
दुनिया में सबसे सुंदर है बस मां मेरी 
इक छोटी सी बात दुनिया को बताना है 
 
 
भले ही बच्चा मां के बनाए खाने में कई नुक्स निकाल ले, लेकिन मां जानती है कि घर से बाहर वह सबसे ज्यादा मां के हाथ के खाने को ही तरसता है। तबियत  खराब होने पर वह मां की घरेलू दवाईयों से चाहे वह कितना भी मुंह बनाए, लेकिन जरा-सी चोट लगने पर भी मुंह से मां का नाम ही नि‍कलता है।
 
न कोई अपना लगे मां सा, न कोई त्याग है ममता सा 
वो है तो दूर है हर परेशानी, 
वो रखती है इंतजाम हर नजर हर हाय का 
 
घर में चाहे मां के पास बैठकर बतियाने का समय न हो उसके पास, लेकिन पढ़ाई के लिए परदेस जाकर हर बच्चा सबसे ज्यादा मां को ही याद करता है। मां अच्छे से जानती है, तभी तो...हर गलती को नजर अंदाज कर, हर नादानी को माफ कर सदा प्यार ही लुटाती है। वह सदा ममता और प्रेम की मूरत के रूप में ही मन में बसती है, और अंतिम सांस तक बसी रहती है। मां के जन्म से साथ जुड़ा रिश्ता जीवन पर्यन्त साथ चलता है...ममता की छांव सा।
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