'यस मैडम, सर' नाम की इस फिल्म में मशहूर हॉलीवुड अभिनेत्री हेलेन मिरेन ने सूत्रधार के रूप में अपनी आवाज दी है।
भारतीय महिलाओं के लिए मिसाल बनी किरन बेदी के जीवन के सभी पहलुओं व अनुभवों को समेटने का प्रयास इस डॉक्यूमेंट्री फिल्म में किया गया है। जिसे बनने में लगभग छह साल का वक्त लगा है।
इस फिल्म का प्रोजेक्ट काफी लंबा था। अत: इस कार्य में आर्थिक समस्या पेश आना लाज़मी था। ऐसे में कुछ निजी निवेशकों के सहयोग से यह फिल्म बनकर तैयार हुई।
* क्यों लिया वी. आर. एस.? :-
वर्षों तक देश सेवा के कार्य में अपना जी-जान लुटाने वाला हर व्यक्ति तरक्की चाहता है। किरण बेदी के साथ भी यही हुआ।
दिल्ली के उपराज्यपाल ने किरन बेदी को दिल्ली का पुलिस कमिश्नर बनाए जाने की सिफारिश की थी किंतु गृह मंत्रालय किरण बेदी के स्थान पर वाई. एस. डडवाल को यह पद देने के पक्ष में था।
अत: किरण के स्थान पर 1974 बैच के वाई. एस. डडवाल को दिल्ली का पुलिस कमिश्नर बनाया गया, जिससे क्षुब्ध होकर किरण बेदी ने वी. आर. एस. ले लिया।
* समाजसेवा की पहल :-
अपने निर्धारित कार्य के अलावा भी किरण बेदी ने समाजसेवा में अपनी रुचि को मूर्त रूप प्रदान करते हुए दो एन.जी.ओ. की शुरुआत की। सन् 1987 में किरण ने 'नवज्योति' तथा 1994 में 'इंडिया विजन फाउंडेशन' नामक संस्थान की स्थापना की।
इनका प्रमुख लक्ष्य नशाखोरी पर अंकुश लगाना तथा गरीब व जरूरतमंद लोगों की सहायता करना है। इस संस्थाओं को यूनाइटेड नेशन्स की ओर से 'सर्ज सॉइटीरॉफ मेमोरियल अवार्ड' से भी नवाजा जा चुका है।
* कामयाबी का श्रेय :- किरण अपनी कामयाबी का श्रेय अपने माँ-बाप को भी देती हैं, जिनके हौसलों ने उन्हें आगे बढ़ने की ताकत प्रदान की। किरण के पिता हमेशा से ही अपनी बेटियों को कहते थे कि 'तुम अपना जीवन खुद बनाओ, तुम किसी से कम नहीं हो, आसमान अनंत है और पढ़ाई तुम्हारा असली धन है।'
बुद्धि, कौशल हर चीज में किरण लड़कों से कम नहीं। 'लोग क्या कहेंगे' इस बात की किरण ने कभी भी परवाह नहीं करते हुए अपनी जिंदगी के मायने खुद निर्धारित किए।
अपने जीवन व पेशे की हर चुनौती का हँसकर सामना करने वाली किरण बेदी साहस व कुशाग्रता की एक मिसाल हैं, जिसका अनुसरण इस समाज को एक सकारात्मक बदलाव की राह पर ले जाएगा। 'क्रेन बेदी' के नाम से विख्यात इस महिला ने बहादुरी की जो इबारत लिखी है, उसे सालों तक पढ़ा जाएगा।