* उल्लेखनीय कार्य :- अपने कार्यकाल के दौरान और कार्यकाल के पश्चात भी किरण बेदी ने कई उल्लेखनीय कार्य किए। जिनके जरिए उन्हें प्रसिद्धि मिली।
जब किरण बेदी को 7,200 कैदियों वाली 'तिहाड़ जेल' की महानिरीक्षक बनाया गया तो उन्होंने वहाँ एक नया मिशन चलाया। इसके अंतर्गत उन्होंने कैदियों के प्रति 'सुधारात्मक रवैया' अपनाते हुए उन्हें योग, ध्यान, शिक्षा व संस्कारों का पाठ पढ़ाया।
यह बहुत कठिन लक्ष्य था किंतु दृढ़निश्चयी किरण बेदी ने तिहाड़ जेल का नक्शा बदलकर उसे 'तिहाड़ आश्रम' बना दिया। इसके लिए किरण बेदी को आज भी जाना जाता है।
जब किरण नई दिल्ली की 'ट्रैफिक कमिश्नर' बनीं तब तीखे तेवरों वाली इस महिला ने पार्किंग वाइलेशन करने पर भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री की गाड़ी को भी नहीं बक्शा।
किरण ने कानून को सभी नागरिकों के लिए समान मानते हुए अपना कर्तव्य निभाते हुए प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी की गाड़ी को भी क्रेन से उठवा दिया। तभी से किरण बेदी 'क्रेन बेदी' के नाम से विख्यात हुईं।
* किरन को नवाज़ा गया :- पुरस्कार किरण बेदी के अदम्य साहस का प्रतीक मात्र थे क्योंकि उन्होंने जो किया वह समाजसेवक होने के नाते किया न कि पुरस्कार पाने के लिए। किरण बेदी को उनकी उल्लेखनीय सेवाओं के कई राष्ट्रीय व अंतराष्ट्रीय पुरस्कारों से नवाजा गया।
इनमें से प्रमुख पुरस्कार प्रेसीडेंट गेलेट्री अवार्ड (1979), वीमेन ऑफ दी ईयर अवार्ड (1980), एशिया रिजन अवार्ड फॉर ड्रग प्रिवेंशन एंड कंट्रोल (1991), महिला शिरोमणि अवार्ड (1995), फादर मैचिस्मो ह्यूमेटेरियन अवार्ड (1995), प्राइड ऑफ इंडिया (1999) तथा मदर टेरेसा मेमोरियल नेशनल अवार्ड (2005) आदि प्रमुख हैं। इन सभी पुरस्कारों के अलावा किरण बेदी को सराहनीय सेवा के लिए सन् 1994 में 'रोमन मैग्सेसे अवार्ड' से भी नवाजा गया।
* किरन पर बनी डॉक्यूमेंट्री फिल्म :- डार्क सिटी, मिशन इंपासिबल 2, होली स्मोक जैसी फिल्मों की सहायक एडीटर रह चुकी मशहूर ऑस्ट्रेलियाई फिल्मकार मेगन डॉनमेन का यह पहला स्वतंत्र प्रोजेक्ट था। जिसमें उन्होंने किरन बेदी के जीवन के उतार-चढ़ावों व संघर्षों को एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म के रूप में प्रस्तुत किया है।