मुख्य पृष्ठ >  विविध >  उर्दू साहित्‍य
मजमून
Sadik
Aziz Ansari WD
 
दहशत गर्दी का खात्मा सूफ़ीइज़्म से-प्रो. सादिक़
प्रो. सादिक़ की मादरी ज़ुबान उर्दू है लेकिन उन्हें हिन्दी, मराठी, गुजराती, सिन्धी, पंजाबी, वग़ैरा ज़ुबानें न सिर्फ़ आती हैं बल्कि इन ज़ुबानों में भी उन्हें वैसी ही महारत हासिल है जैसी उर्दू में।
आगे पढें...  
शेरो-अदब
ग़ज़लें : जिगर मुरादाबादी
ग़ज़लें : ग़ा‍लिब
ग़ज़लें : ख्वाजा मीर दर्द देहलवी
ग़ज़लें : ख्वाजा अल्ताफ़ हुसैन हाली
ग़ज़लें : नवाब मिर्ज़ा ख़ाँ दाग़ देहलवी
ग़ज़लें : मोईन हसन जज़बी
ग़ज़ल : इब्ने इन्शा
ग़ज़लें : ख्वाजा मीर दर्द
 
और भी
नई शायरी
WD
 
शायर माहिर बुरहानपुरी
मेरे दाग़ों में निहाँ शम्सोक़मर देखेगा, कौन ये नज़ारा दिल की आँखें खोल कर देखेगा, कौन अपनी नज़रों से सुलगता अपना घर देखेगा...
आगे पढें...  
वेबदुनिया में और भी
Firak
WD
 
रुबाईयाँ : फ़िराक गोरखपुरी
लहरों में खिला कंवल नहाए जैसे, दोशीज़: ए सुबह गुनगुनाए जैसे, ये रूप, ये लोच, ये तरन्नुम, ये निखार, बच्चा सोते में मुसकुराए जैसे...
मंडेला के जन्मदिन की तैयारी
नज़्में : प्रो. सादिक़
शाहरुख के घर आएँगे खली!
प्रभाकर के खिलाफ मामला खारिज
डेयरी टेक्नॉलॉजी में करियर
होनहार...