रोज हो रही है हत्या गाँधी की

आज गाँधी जयंती है। पुण्यतिथि नौ माह पहले गुजर चुकी है। गाँधी प्रतिमाओं और उनकी तस्वीरों को पिछली पुण्यतिथि के बाद धोने-पोंछने का यह पहला अवसर आया है। प्रत्येक वर्ष ऐसा ही होता है, जयंती और पुण्यतिथि के बीच की अवधि में गाँधीजी के साथ कोई नहीं होता है। कड़वी बात तो यह है कि बचे-खुचे गाँधीवादी भी नहीं। वे गाँधीजी का साथ दे भी नहीं सकते हैं क्योंकि जरूरतों और परिस्थितियों ने उन्हें भी सिखा दिया है कि गाँधी बनने से केवल प्रताड़ना मिल सकती है, संपदा, संपत्ति नहीं।

मनु के लिए माँ बने बापू

राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के वैसे तो अपने चार पुत्र थे लेकिन वे तमाम भारतीयों को अपनी मानस संतान के तौर पर देखते थे। फिर भी उन्होंने अंतिम दिनों ...

गाँधीवाद ही सफल हो सकता है

भारत की आजादी के संघर्ष के दौरान अहिंसात्मक अंदोलन का नेतृत्व करने वाले महात्मा गाँधी को आज की पीढ़ी के कुछ लोग अज्ञानतावश देश का बँटवारा करने ...

एक खत, बापू के नाम

आज आपका जन्मदिन है और सही मायनों में जन्मदिन है। यूँ तो हर साल ही आपका जन्मदिन आता है मगर यह जन्मदिन इस बार कुछ खास लग रहा है। बापू, आपके देश ...

बापू : एक मं‍त्र अहिंसा का

गाँधीजी न तो शांतिवादी थे, न ही समाजवादी और न ही व्याख्यामय राजनीतिक रंग में रंगने वाले व्यक्ति थे। वे बस, जीवन के शुद्ध विद्यमान सत्यों से जुड़े ...

20 जनवरी को होती गाँधीजी की हत्या

सत्य- अहिंसा के सबसे बड़े प्रवर्तक महात्मा गाँधी की हत्या 30 जनवरी 1948 को कर दी गई थी, लेकिन उनकी हत्या की साजिश रचने वालों ने इससे कुछ दिन ...

भगवान की तरह पूजते है गाँधी को

उड़ीसा के संबलपुर के भटारा गाँव के ग्रामीणों ने एक मंदिर का निर्माण करके महात्मा गाँधी की छह फीट उँची काँसे की मूर्ति लगवाई है। वहाँ के ग्रामीण ...

अनोखा है श्रद्धांजलि देने का यह अंदाज

पोरबंदर के भीड़भाड़ वाले चौपाटी बीच पर वे शांत खड़े हैं, उनका सुनहरे रंग का चश्मे का फ्रेम यथावत है और सुबह की धूप में चमक रहा है, उनके आसपास ...

अंतर्मन में उतर जाते हैं बापू : इला गाँधी

बापू को आज के दौर में प्रासंगिक करार देते हुए महात्मा गाँधी की पौत्री इला गाँधी ने कहा है कि हमारे आसपास की दुनिया में जबर्दस्त बदलाव के बाद भी ...

अहिंसा से मन की स्वतंत्रता

गाँधी जी कहते हैं कि हमारा समाजवाद अथवा साम्यवाद अहिंसा पर आधारित होना चाहिए जिसमें मालिक-मजदूर एवं जमींदार-किसान के मध्य परस्पर सद्भावपूर्ण ...

पत्रों से आशीष बरसाते बापू

महात्मा गाँधी की प्रपौत्री नीलम पारिख ने बापू के पत्रों के संग्रह पर आधारित पुस्तक ‘जहाँ रहो, महकते रहो’ में कहा कि तमाम व्यस्तताओं के बावजूद ...

क्या गाँधीवाद विवाद का विषय है?

जो भी हो गाँधीवाद के पक्ष और विपक्ष दोनों में ही तर्क जुटाएँ जा सकते हैं। सोचने वाली बात यह है कि वर्तमान युग में गाँधीवाद की आवश्यकता है या कि ...

अवतार की तरह रच-बस गए गाँधी

स्वराज आंदोलन के उस युग में तो भारत गाँधीमय था ही- कविता, कला, रंगमंच, फिल्म, संगीत, आराधना- जीवन का कोई भी क्षेत्र गाँधी की छाप से अछूता न रहा। ...

बापू की सादगी और व्यावसायिक हथकंडे

गाँधीजी ने सारी जिंदगी सादगी का न केवल संदेश दिया, बल्कि अपनी जिंदगी में उसे उतारकर भी दिखाया। ग‍त वर्ष उनके जन्मदिन से ऐन पहले एक विदेशी कंपनी ...

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