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रोज हो रही है हत्या गाँधी की

शुक्रवार,अक्टूबर 1, 2010
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संत का अंत नहीं होता है

शुक्रवार,अक्टूबर 1, 2010
संत का अंत नहीं होता बल्कि संत देहमुक्त होकर अनंत हो जाता है। आज आदमी, आदमी के बीच नफरत, जाति-जाति के बीच दुश्मनी और ...
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गाँधीगिरी, गाँधीवाद नहीं है

शुक्रवार,अक्टूबर 1, 2010
गाँधी, गाँधीवाद और गाँधीगिरी तीनों जुदा-जुदा हैं, लेकिन तीनों का संबंध एक ऐसे शख्स के साथ है, जो सारी दुनिया में एक ही ...
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मनु के लिए माँ बने बापू

शुक्रवार,अक्टूबर 1, 2010
राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के वैसे तो अपने चार पुत्र थे लेकिन वे तमाम भारतीयों को अपनी मानस संतान के तौर पर देखते थे। ...
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भारत की आजादी के संघर्ष के दौरान अहिंसात्मक अंदोलन का नेतृत्व करने वाले महात्मा गाँधी को आज की पीढ़ी के कुछ लोग ...
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एक खत, बापू के नाम

शुक्रवार,अक्टूबर 1, 2010
आज आपका जन्मदिन है और सही मायनों में जन्मदिन है। यूँ तो हर साल ही आपका जन्मदिन आता है मगर यह जन्मदिन इस बार कुछ खास ...
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बापू : एक मं‍त्र अहिंसा का

शुक्रवार,अक्टूबर 1, 2010
गाँधीजी न तो शांतिवादी थे, न ही समाजवादी और न ही व्याख्यामय राजनीतिक रंग में रंगने वाले व्यक्ति थे। वे बस, जीवन के ...
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सत्य- अहिंसा के सबसे बड़े प्रवर्तक महात्मा गाँधी की हत्या 30 जनवरी 1948 को कर दी गई थी, लेकिन उनकी हत्या की साजिश रचने ...
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उड़ीसा के संबलपुर के भटारा गाँव के ग्रामीणों ने एक मंदिर का निर्माण करके महात्मा गाँधी की छह फीट उँची काँसे की मूर्ति ...
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पोरबंदर के भीड़भाड़ वाले चौपाटी बीच पर वे शांत खड़े हैं, उनका सुनहरे रंग का चश्मे का फ्रेम यथावत है और सुबह की धूप में ...
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बापू को आज के दौर में प्रासंगिक करार देते हुए महात्मा गाँधी की पौत्री इला गाँधी ने कहा है कि हमारे आसपास की दुनिया में ...
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अहिंसा से मन की स्वतंत्रता

शुक्रवार,जनवरी 29, 2010
गाँधी जी कहते हैं कि हमारा समाजवाद अथवा साम्यवाद अहिंसा पर आधारित होना चाहिए जिसमें मालिक-मजदूर एवं जमींदार-किसान के ...
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महात्मा गाँधी की प्रपौत्री नीलम पारिख ने बापू के पत्रों के संग्रह पर आधारित पुस्तक ‘जहाँ रहो, महकते रहो’ में कहा कि ...
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जो भी हो गाँधीवाद के पक्ष और विपक्ष दोनों में ही तर्क जुटाएँ जा सकते हैं। सोचने वाली बात यह है कि वर्तमान युग में ...
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अवतार की तरह रच-बस गए गाँधी

गुरुवार,जनवरी 28, 2010
स्वराज आंदोलन के उस युग में तो भारत गाँधीमय था ही- कविता, कला, रंगमंच, फिल्म, संगीत, आराधना- जीवन का कोई भी क्षेत्र ...
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गाँधीजी ने सारी जिंदगी सादगी का न केवल संदेश दिया, बल्कि अपनी जिंदगी में उसे उतारकर भी दिखाया। ग‍त वर्ष उनके जन्मदिन से ...
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