बलिहारी गुरु आपकी...

पिछले पन्‍द्रह बीस सालों में शिक्षा-व्‍यवस्‍था का ढाँचा लगभग बदल ही गया है। ऊपरी तौर पर जो-जो परिवर्तन परिलक्षित हो रहे हों लेकिन भीतर ही भीतर एक बड़ा बदलाव शिक्षा के क्षेत्र में हमें दिख रहा है। यह बदलाव आधुनिकता...

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भारत में आरती हिन्दी की और तिलक अँग्रेजी का

त्रिभाषा-सूत्र का तीसरा सूत्र काफी खतरनाक है। अँगरेजी को अनिवार्य रूप से पढ़ाना करोड़ों बच्चों की मौलिकता को नष्ट करना है। उनके आत्मविश्वास की ...

जब भाषाओं की दीवारें और भाषाई अवरोध हट जाएँगे

कभी ऐसा परिपूर्ण साफ़्टवेयर सुलभ हो जायेगा जो तमाम भाषाओं का परस्पर अर्थ करके अनुवादित कर जोड़ सके और त्वरित संप्रेषण भी हो तो हमारे भारत का ...

मत बोलो हिन्‍दी

‘हमारे स्‍कूल में हिंदी बोलना मना है। इसलिए आजकल मैं हमेशा अँग्रेजी में ही बात करती हूँ। अगर बोलने की प्रैक्टिस छूट गई तो फिर स्‍कूल में परेशानी ...

अपने ही घर में बेगानी हूँ

अपने ही घर में बेगानी हूँ अपने ही लोगों के बीच जाने-पहचाने लोगों में लगता है कि अनजानी हूँ

हिन्‍दी दिवस क्‍यों मनाएँ हम ?

तालियों की गड़गड़ाहट, शुद्ध हिन्‍दी में कविता पाठ, हिन्‍दी के भविष्‍य को लेकर लंबी-लंबी परिचर्चाएँ, हर वर्ष हिन्‍दी दिवस के दिन पूरे देश का लगभग ...

हिन्दी दिवस या हिन्दी डे

कुछ दिनों पहले एक परिचित को घर पर रात्रिभोज के लिए आमंत्रित किया। वे अपनी बीवी, चार वर्षीय बेटी और एक- डेढ़ साल के बेटे के साथ घर पर पधारे

हिन्दी फिल्मों के अँग्रेजी नाम

फिल्मों के नाम पढ़कर एक ऐसा व्यक्ति जो फिल्मों के बारे में ज्यादा नहीं जानता हो, सोचेगा कि यहाँ हम अँग्रेजी फिल्मों की चर्चा करने जा रहे हैं

हिन्‍दी इनकी नजर में

महात्मा गाँधी : कोई भी देश सच्चे अर्थो में तब तक स्वतंत्र नहीं है जब तक वह अपनी भाषा में नहीं बोलता। राष्ट्रभाषा के बिना राष्ट्र गूँगा है। ...

इन्हें है हिन्दी से प्यार

यहाँ आकर यह पहली भार हिन्दी से परिचित हुईं। पहली नजर के प्यार की तरह नतालिया को हिन्दी के सरस उच्चारण से प्यार हो गया...फिर क्या था वे नतालिया ...

भारत में बढ़ता अँग्रेजी का चलन...

जब हमारा देश स्वतंत्र हुआ था तब हमने सोचा था कि हमारे आजाद देश में हमारी अपनी भाषा, अपनी संस्कृति होगी लेकिन यह क्या? अँग्रेजों से तो हम ...

हिन्दी के समकालीन संकट

हिन्दी का सबसे बड़ा संकट उसे मातृभाषा के रूप में बोलने वालों द्वारा अपनी अस्मिता से न जोड़ने का है। एक चलताऊ फिकरा चलन में है कि भाषा कैसी भी हो, ...

हिन्दी को 'खास' नहीं 'आम' तक पहुँचाना चाहते थे ...

हिन्दी को जन-जन की भाषा के रूप में प्रतिष्ठित करने में हमारे देश के प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। हिन्दी ...

'जाओ, अगले 14 सितंबर को आना!'

मैं सड़क से गुजर रहा था तो मैंने देखा कि एक बुढ़िया जोर-जोर से रो रही थी। उसकी कराह तथा दुर्दशा को देखकर मेरा भारतीय मन संवेदनशील हो उठा। मैंने ...

अपने घर में कब तक बेगानी रहेगी हिन्दी?

हिन्दी उस बाजार में ठिठकी हुई-सी खड़ी है, जहाँ कहने को सब अपने हैं, लेकिन फिर भी बेगाने से... इस बेगानेपन की टहनियों से भी उम्मीद की कोपलें फूट ...

अनेक भाषाओं की खूशबू से रची-बसी- हिन्दी

हिन्दी, भाषाई विविधता का एक ऐसा स्वरूप जिसने वर्तमान में अपनी व्यापकता में कितनी ही बोलियों और भाषाओं को सँजोया है। जिस तरह हमारी सभ्यता ने ...

हिन्दी के लिए जब बुर्के को त्यागा

पर्दानशीं महिलाओं के बीच बैठकर और बोहरा समुदाय की होने के बावजूद एक महिला ने हिन्दी की जिस तरह सेवा की, वह हिन्दी प्रेमियों के लिए प्रेरणादायी ...

साहित्‍य के क्षेत्र में देय पुरस्‍कार

साहित्‍य के क्षेत्र में हो रहे सृजनात्‍मक कार्यों को प्रोत्‍साहित करने के लिए भारत सरकार ने साहित्‍य अकादमी संस्‍था की स्‍थापना की। 12 मार्च ...

हिन्दी के सामूहिक सम्मान का सवाल

इधर कुछ दिनों से हिन्दी दिवस आते-आते तो कुछ सवाल कुछ अधिक ही तकलीफ देने लगते हैं। कुछ सवाल ये हैं कि हमारी हिन्दी अंततः दोयम दर्जे की भाषा कैसे ...

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आम तौर पर मुखवास या पूजा पाठ में उपयोग किया जाने वाला लौंग, आपके स्वस्थ्य के लिए भी बेहद लाभदायक ...

बहुमुखी प्रतिभा के धनी पं. चंद्रधर शर्मा 'गुलेरी' की जयंती

आज हिंदी साहित्य को 'उसने कहा था' जैसी कालजयी कहानी देने वाले पं. श्री चंद्रधर शर्मा 'गुलेरी' की ...

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जब ऑडियो कैसेट में धड़कते थे दिल...

इंटरनेट के दौर में कई पुरानी तकनीक बाज़ार से बाहर हो गई, उनके स्थान पर नई तकनीक तो आ गई लेकिन कुछ ...

हिन्दी कविता : एक सवाल?

सांस लेना, प्रार्थना करना। बोलना, खाना-पीना। उठना-बैठना, हंसना-रोना, नाचना-गाना

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