9 सितंबर 2001 यानी सात साल पहले अमेरिका उस त्रासदी से रूबरू हुआ, जिसकी कल्पना भी उसने कभी नहीं की थी। न्यूयॉर्क की नाक कही जाने वाली इमारत वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पलभर में राख हो गई। अलकायदा के आतंकी हमले में हजारों अमेरिकी बेवक्त मौत की नींद सो गए। करोड़ों डॉलर मिट्टी में मिल गए। फिर क्या था अमेरिका की आँखों में जैसे खून उतर आया। अब उसने भी आतंक के खिलाफ सिर पर कफन बाँध लिया, जिसकी आपबीती भारत सालों से सुना रहा था। सुपर पॉवर की वक्रदृष्टि का पहला शिकार बना इराक। फिर अफगानिस्तान ने तालिबान के कुकर्मों की कीमत चुकाई। इसका हक वह अभी भी बेगुनाहों की मौत से... |