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कारवाँ गुजर गया...! ND
कारवाँ गुजर गया...!

साहित्य के उज्जवल नक्षत्र नीरज का नाम सुनते ही सामने एक ऐसा शख्स उभरता है:जो स्वयं डूबकर कविताएँ लिखता हैं और पाठक को भी डूबा देने की क्षमता रखता है। जब नीरज मंच पर होते हैं तब उनकी नशीली कविता और लरजती आवाज श्रोता वर्ग को दीवाना बना देती है। जब नीरज गुनगुनाते हैं ‘’अब के सावन में शरारत ये मेरे साथ हुई, मेरा घर छोड कर सारे शहर में बरसात हुई।‘’ सुनने वाले सचमुच सावन की तरह झूम उठते हैं। नीरज के सुहाने गीतों कारवां लेकर आए हैं ; ‘’पेंगुईन बुक्स इंडिया प्रकाशन ‘’। इस महकती पुस्तक में नीरज के उन सभी गीतों को जगह...

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नीरज
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'कवि मंच अब कपि मंच बन गया है'
हिंदी के सुप्रसिद्घ गीतकार गोपालदास नीरज मानते हैं कि कवि मंच अब पहले जैसा कवि मंच नहीं रह गया बल्कि कपि (बंदर) मंच बन गया है। उनका कहना है कि फिल्मों में भी गीत और गीतकार के सुनहरे दिन बीत गए हैं। नीरज से बात करें तो वे किसी मुद्दे को शिक्षक की तरह समझाने लगते हैं। उनसे कविता और गीतों पर बात करते-करते लगेगा कि आप किसी दार्शनिक से बात कर रहे हैं...
गीत
अभी न जाओ प्राण ! ......
मगर निठुर न तुम रुके.....
नारी .....
यदि मैं होता घन सावन का ....
अंतिम बूँद...
नीरज दा की फोटोगैलरी
विविध
प्रेम का न दान दो
प्रेम-पथ हो न सूना
जलाओ दिए पर रहे ध्यान इतना
छिप-छिप अश्रु बहाने वालों
आदमी को प्यार दो...
सेज पर साधें बिछा लो,
बेशरम समय शरमा ही जाएगा
प्यार की कहानी चाहिए
तुम ही नहीं मिले जीवन में
एक तेरे बिना प्राण ओ प्राण के !
कितने दिन चलेगा?
और भी
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