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कुछ अनमोल दोहे नीरज के

बुधवार,जुलाई 8, 2015
नीरज
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प्रख्यात कवि और गीतकार गोपाल दास नीरज का फिल्मी सफर भले ही सिर्फ पाँच साल का रहा हो लेकिन मरते दम तक लिखने के ...
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कारवाँ गुजर गया...!

मंगलवार,जून 24, 2008
साहित्य के उज्जवल नक्षत्र नीरज का नाम सुनते ही सामने एक ऐसा शख्स उभरता है:जो स्वयं डूबकर कविताएँ लिखता हैं और पाठक को ...
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गीत

शनिवार,अप्रैल 26, 2008
अब बुलाऊँ भी तुम्हें तो तुम न आना! टूट जाए शीघ्र जिससे आस मेरी छूट जाए शीघ्र जिससे साँस मेरी, इसलिए यदि तुम कभी आओ इधर ...
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अभी न जाओ प्राण ! ......

शनिवार,अप्रैल 26, 2008
अभी न जाओ प्राण ! प्राण में प्यास शेष है, प्यास शेष है, अभी बरुनियों के कुञ्जों मैं छितरी छाया, पलक-पात पर थिरक रही ...
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मगर निठुर न तुम रुके.....

शनिवार,अप्रैल 26, 2008
मगर निठुर न तुम रुके, मगर निठुर न तुम रुके! पुकारता रहा हृदय, पुकारते रहे नयन, पुकारती रही सुहाग दीप की ...
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नारी .....

शनिवार,अप्रैल 26, 2008
अर्ध सत्य तुम, अर्ध स्वप्न तुम, अर्ध निराशा-आशा अर्ध अजित-जित, अर्ध तृप्ति तुम, अर्ध अतृप्ति-पिपासा, आधी काया आग ...
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यदि मैं होता घन सावन का ....

शनिवार,अप्रैल 26, 2008
पिया पिया कह मुझको भी पपिहरी बुलाती कोई, मेरे हित भी मृग-नयनी निज सेज सजाती कोई, निरख मुझे भी थिरक उठा करता मन-मोर किसी ...
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अंतिम बूँद...

शनिवार,अप्रैल 26, 2008
अंतिम बूँद बची मधु को अब जर्जर प्यासे घट जीवन में। मधु की लाली से रहता था जहाँविहँसता सदा सबेरा, मरघट है वह मदिरालय अब ...
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निभाना ही कठिन है ......

शनिवार,अप्रैल 26, 2008
प्यार करना तो बहुत आसान प्रेयसि ! अन्त तक उसका निभाना ही कठिन है। है बहुत आसान ठुकराना किसी को, है न मुश्किल भूल भी ...
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बहार आई....

शनिवार,अप्रैल 26, 2008
तुम आए कण-कण पर बहार आई तुम गए, गई झर मन की कली-कली। तुम बोले पतझर में कोयल बोली, बन गई पिघल गुँजार भ्रमर-टोली, तुम ...
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नींद भी मेरे नयन की...

शनिवार,अप्रैल 26, 2008
प्राण! पहले तो हृदय तुमने चुराया, छीन ली अब नींद भी मेरे नयन की। बीत जाती रात हो जाता सवेरा, पर नयन-पंछी नहीं लेते ...
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पाती तक न पठाई

शनिवार,अप्रैल 26, 2008
ऐसी सुधि बिसराई कि पाती तक न पठाई। बरखा गई मिलन-ऋतु बीती, घोर घटा गहरी मन-चीती, पर गागर रीती की रीती, अधरों बूंद न आई
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धर्म है...

शनिवार,अप्रैल 26, 2008
जिन मुश्किलों में मुस्कराना हो मना, उन मुश्किलों में मुस्कराना धर्म है! जिस वक्त जीना गैर-मुमकिन-सा लगे, उस वक्त जीना ...
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धनियों के तो धन हैं लाखों

शनिवार,अप्रैल 26, 2008
धनियों के तो धन हैं लाखों धनियों के तो धन हैं लाखों मुझ निर्धन के धन बस तुम हो। कोई पहने माणिक-माला कोई लाल ...
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प्यार न होगा...

शनिवार,अप्रैल 26, 2008
जग रूठे तो बात न कोई तुम रूठे तो प्यार न होगा। मणियों में तुम ही तो कौस्तुभ तारों में तुम ही तो चन्दा, नदियों में तुम ...
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मुझे न करना याद...

शनिवार,अप्रैल 26, 2008
मुझे न करना याद, तुम्हारा आँगन गीला हो जाएगा। रोज़ रात को नींद चुरा ले जाएगी पपीहों की टोली, रोज़ प्रात को पीर जगाने आएगी ...
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'कवि मंच अब कपि मंच बन गया है'

शनिवार,अप्रैल 26, 2008
हिंदी के सुप्रसिद्घ गीतकार गोपालदास नीरज मानते हैं कि कवि मंच अब पहले जैसा कवि मंच नहीं रह गया बल्कि कपि (बंदर) मंच बन ...
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अब तुम रूठो....

शनिवार,अप्रैल 19, 2008
अब तुम रूठो, रूठे सब संसार, मुझे परवाह नहीं है। दीप, स्वयं बन गया शलभ अब जलते-जलते,
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किसलिए आऊं तुम्हारे द्वार ?

शनिवार,अप्रैल 19, 2008
जब तुम्हारी ही हृदय में याद हर दम, लोचनों में जब सदा बैठे स्वयं तुम,
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