हिंदी के सुप्रसिद्घ गीतकार गोपालदास नीरज मानते हैं कि कवि मंच अब पहले जैसा कवि मंच नहीं रह गया बल्कि कपि (बंदर) मंच बन गया है। उनका कहना है कि फिल्मों में भी गीत और गीतकार के सुनहरे दिन बीत गए हैं। नीरज से बात करें तो वे किसी मुद्दे को शिक्षक की तरह समझाने लगते हैं। उनसे कविता और गीतों पर बात करते-करते लगेगा कि आप किसी दार्शनिक से बात कर रहे हैं...