संगत | विजयशंकर की कविताएँ | हरिवंशराय बच्चन | नीरज | मील के पत्थर | मंच अपना | कथा-सागर | काव्य-संसार | व्यंग्य | मुलाकात | पत्रिकाएँ | आलेख | पुस्तक-समीक्षा | संस्मरण
मुख पृष्ठ » लाइफ स्‍टाइल » साहित्य (Literature )
 
धूप घनी तो अम्मा बादल छांव ढली तो अम्मा पीपल गीली आंखें, अम्मा आंचल मैं बेकल तो अम्मा बेकल। रात की आंखें अम्मा काजल बीतते दिन का अम्मा पल-पल जीवन...
 
 
 
 
जीजी को अपने नीम के पेड़ से बड़ा मोह था। मजाल कि कोई एक पत्ती, डाली या निंबोली तोड़ ले! दातून के लिए भी नीम को हाथ नहीं लगा सकते थे। जब कभी हमें शरारत...
 
 
 
'एक जगह साथ' (कविता संग्रह) में कवि ने आज की भागदौड़ भरी जिंदगी की जद्दोजहद, अतीत और वर्तमान, मानव समाज में हो रहे परिवर्तन, पारिवारिक सामंजस्‍य की कमी, भ्रष्‍टाचार, बाजारवाद एवं नारी की दुर्दशा को बड़े ही मार्मिक एवं सूझबूझ भरे अंदाज में प्रस्‍तुत किया है। यह निश्चित तौर पर पठनीय है।
 
 
 
 
जब हम आज के हिन्दी साहित्य पर नजर दौड़ाते हैं तो पता चलता है कि आज साहित्य में निरंतर गिरावट का दौर जारी है। आज साहित्य के प्रस्तुतीकरण का स्तर लगातार...
 
 
 
कविवर डॉ. हरिवंशराय बच्चन का व्यक्तित्व व कृतित्व साकार हो जाता है। बच्चनजी का साहित्य पढ़ने से यह बात स्वतः ही सिद्ध हो जाती है। काव्य रचनाओं के साथ-साथ...
 
 
 
 
मैंने बीबीसी के लिए जगजीतसिंह पर एक लेख लिखा था। उसमें किसी जगह पर लिखा था- जगजीत की आवाज खुदा की नेमत है। उनकी शोहरत इसी नेमत की वसीयत है।...
 
 
 
प्रख्यात कवि और गीतकार गोपाल दास नीरज का फिल्मी सफर भले ही सिर्फ पाँच साल का रहा हो लेकिन मरते दम तक लिखने के ख्वाहिशमंद इस अदीब को इस अवधि में...
 
 
 
 
प्रेम कई तरह से आपको छूता है, स्पर्श करता है. आपकी साँसों को महका देता है। और यह सब इतने महीन और नायाब तरीकों से होता है कि कई बार आप उसे समझ नहीं...
 
 
 
नई हवा के झोंकों की तरह जब आए थे शहरयार तो किसी को अहसास नहीं था कि जाते-जाते वे यूं छा जाएंगे, किसी बरगद के पेड़ की तरह। जिसकी छांव में उदासी ही उदासी...