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स्मृति शेष : नामवर जी एक मजबूत वटवृक्ष थे

शुक्रवार,फ़रवरी 22, 2019
namvar singh
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हिरोशिमा की परमाणु बम आपदा पर आधारित नाटक 'मैं ढूंढ रहा हूं' का मंचन 28 फरवरी 2019 को नई दिल्ली मंडी हाउस के LTG ...
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डर या भय की पद्धति को ही आतंकवाद कहा जाता है, जो कि हमारे देश ही नहीं बल्कि पूरे विश्व के लिए एक विकराल समस्या बन चुकी ...
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पाकिस्तान दुनिया का नासूर है.... घृणा,नफ़रत और जिन्ना के जिन्न से उसका जन्म हुआ।
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विश्व में एक विशेष प्रकार की मनुष्य जाति पाई जाती है उसका नाम है- 'रायचंद'। वैसे तो यह विश्व के सभी देशों में पाए जाते ...
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सबसे बड़ी बात यह थी कि यह सूचना दे कौन रहा था? स्वयं डॉक्टर नामवर सिंह जी। मैं कुछ देर के लिए जैसे स्तब्ध सा हो गया। वे ...
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नामवर सिंह जी का जाना हिन्‍दी की आलोचना परम्‍परा के बहुत बड़े स्‍तम्‍भ का ढह जाना है।
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लोकतांत्रिक सत्ता में आतंकवाद का पनपना और देश के फौजियों का आतंकवादियों द्वारा मारा जाना वहशतनाक के साथ शर्मनाक इसलिए ...
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जबसे हुआ है पुलवामा हमला, हर भारतवासी मांगे पाकिस्तान से बदला। प्रतिशोध की ज्वाला भड़क रही है, हर मां अपने बेटे से फौज ...
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अब मौन तोड़ बजा युद्ध-नाद, अब सुना दे जग को सिंह-नाद जिस क्षण वन में पद धरे श्वान आए उसी क्षण उसे सिंह याद
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पूरे हिन्दुस्तान को हमेशा से अपनी सेना और अपने वीर सैनिकों के शौर्य और वीरता पर गर्व है। जब भी हमारी सेना और हमारे ...
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सचमुच ही युद्ध किसी समस्या का हल नहीं, लेकिन यदि बातचीत ही समस्या का हल होती तो राम-रावण का युद्ध नहीं होता और महाभारत ...
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‘सेप्पुकु’और ‘सच्चा झूठ' (पत्रकारिता के पतन) से शुरू हुई कवि, उपन्यासकार और कला समीक्षक विनोद भारद्वाज की उपन्यास-त्रयी ...
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हे मातृभूमि तेरे चरणों में अंतिम वंदन करता हूं, पुष्प नहीं पर पुष्प तुल्य ये शीश समर्पित करता हूं। मां तेरी विरहा ने ...
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हम पिछले करीब 3 वर्ष से निजी तौर पर नरेन्द्र मोदी, उनकी सरकार एवं भाजपा के खिलाफ राहुल गांधी का उच्च आक्रामक तेवर देख ...
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पुलवामा आतंकी हमले के बाद सुरक्षा में चूक को लेकर सवाल स्वाभाविक हैं और उठना भी चाहिए। ढ़ेरों पैकेटों लदे विस्फोटक से ...
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जब रोना है, मैं रो लेती हूं। हंसना है, वह भी कर लेती हूं। खाना-पीना भी ले लेती हूं। अपना जीवन भी जी लेती हूं। खुशियां ...
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समूचा देश पुलवामा में हुए आतंकी हमले से स्तब्ध है। हर देशवासी की आंखें नम है। चहुं ओर जहां आतंकियों के इस कायराना ...
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सरहद और संसद दोनों पर ही मानसिक हमला हुआ है। न केवल घाटी दहल गई बल्कि उसी के साथ भारत की वो पीढ़ी भी दहल रही है जिसके ...
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आज लहू केसर बन जाए, दुश्मन को ललकार कर। आज उठा बंदूक है भारत, वीरों की जयकार कर।
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