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भारत को स्वतंत्रता चांदी की तश्तरी में भेंट स्वरूप नहीं मिल पाई। सात समंदर पार से अंग्रेजों की धरती से ही भारत मुक्ति की बात करना सामान्य नहीं थी, उनकी देश भक्ति...
 
 
 
मुद्दत से था इंतजार, लो चल बसा। यारो तुम्हारा यार, लो चल बसा।। ख़ाली पेट ही खाता रहा धोखे।कितना था होशियार, लो चल बसा।।
 
 
 
 
अपनी विलक्षण प्रेम कविताओं के लिए अशोक वाजपेयी की एक खास पहचान है। इन दिनों वे इंदौर प्रवास पर हैं। साहित्य की ‍विभिन्न गोष्ठियों में शिरकत करते हुए वेबदुनिया...
 
 
 
बालीवुड अभिनेत्री शर्मिला टैगोर का मानना है कि सैन्य बल विशेषाधिकार कानून के विरोध में करीब 12 साल से भूख हड़ताल कर रही मणिपुरी सामाजिक कार्यकर्ता इरोम...
 
 
 
 
ऐनी आपा के नाम से मशहूर कुर्रतुल ऐन हैदर का जन्म 20 जनवरी 1927 को उत्तरप्रदेश के अलीगढ़ में हुआ था, उनके पिता सज्जाद हैदर यलदरम उर्दू के जाने-माने लेखक...
 
 
 
न सिर्फ 'हिन्दी दिवस' पर बल्कि हर दिन हम हिन्दी के विरूद्ध अंगरेजी को खड़ा पाते हैं। अंगरेजी पढ़ना-बोलना और लिखना हिन्दी भाषी व्यक्ति के लिए अक्सर मुश्किल माना...
 
 
 
 
प्रख्यात कवि और गीतकार गोपाल दास नीरज का फिल्मी सफर भले ही सिर्फ पाँच साल का रहा हो लेकिन मरते दम तक लिखने के ख्वाहिशमंद इस अदीब को इस अवधि में...
 
 
 
कविवर डॉ. हरिवंशराय बच्चन का व्यक्तित्व व कृतित्व साकार हो जाता है। बच्चनजी का साहित्य पढ़ने से यह बात स्वतः ही सिद्ध हो जाती है। काव्य रचनाओं के साथ-साथ...
 
 
 
 
मीठे स्नेहमयी बोल सदैव पर्वत से शांत हो, आसमान से विराट हो, कलियों से मुस्कराते हो, भंवरों से गुनगुनाते हो या फिर झरने से चंचल हो, किन्तु कभी भी वज्र से कठोर न हों, तीर से नुकीले न हों, करेले से कड़वे न हों, सर्प से विषैले न हों। बोल न तो मिर्च से तीखे हों, न ही इमली से खट्‍टे, न तो जलते हुए हों, न ही तपते हुए। बोल ऐसे हों, जो सुनने वाले के लिए गुणकारी हों, न कि ऐसे कि सुनने के उपरांत रिश्तों के गुण-धर्म ही बदल दें!