सुकरात की तरह ज्ञान के साथ ही उनके पास उसी तरह की विनम्रता थी, जैसी सुदामा के पास, जो भगवान कृष्ण के भवन से लौटे तो खाली हाथ थे, मगर धनी होकर। गाँधी जी के लिए सत्य ही साध्य था, सत्य ही सब कुछ था, आज यही सत्य सार्थक है, इसे केवल अहिंसा और विनम्रता से प्राप्त किया जा सकता है, गाँधी जी की शब्दावली में अहिंसा का अर्थ है असीम प्रेम और असीम कष्ट उठाने की क्षमता।
बड़े दु:ख का विषय है कि आज मनुष्य क्रूर होते जा रहा है। करुणा के क्रंदन को ठोकर मारकर पर्यावरण के साथ खिलवाड़ कर संस्कारहीन पीढ़ी बनाने पर हम आमादा हो गए हैं।
कभी मेरी भी संगीत की शिक्षा आपकी जितनी उम्र में ही शुरू हुई थी। मैंने अपनी चाची से संगीत सीखना शुरू किया था। वे मुझे बड़े प्यार से संगीत सिखाती थीं। उनका मानना था कि मैं एक दिन संगीत की दुनिया में जरूर नाम कमाऊँगी। चाची के साथ ही मैंने गुरुजी बलराम पुरी से भी संगीत सीखा। बचपन से ही मैं गंभीर और शांत लड़की थी। मेरा शौक संगीत ही था और मुझे संगीत सीखना ही ...