गर्भावस्था में सेक्स करना ठीक है या नहीं, क्या इससे गर्भस्थ शिशु को कोई हानि हो सकती है या गर्भवती स्त्री को कोई तकलीफ। आदि प्रकार के सवाल स्त्री तथा पुरुषों के मन में उठते रहते हैं। जैसे-जैसे गर्भावस्था बढ़ती जाती है, स्त्री की परेशानी भी बढ़ती जाती है। सेक्स के सामान्य तरीके अपनाना इसलिए कठिन हो जाता है, क्योंकि गर्भवती महिला के उदर पर किसी प्रकार का दबाव उसके तथा भ्रूण दोनों के लिए कष्टदायी तथा नुकसानदेह हो सकता है।वैसे छठे या सातवें माह तक की गर्भावस्था में सेक्स किया जा सकता है, लेकिन विशेष सावधानी के साथ। इसके लिए डॉक्टर की सलाह पर विशेष प्रकार के आसन अपनाए जा सकते हैं। आसन इस प्रकार होना चाहिए, जिससे स्त्री का पेट न दबे, गर्भ पर दबाव न पड़े तथा पीड़ा का अनुभव न हो। आयुर्वेद के अनुसार इसे इस प्रकार परिभाषित किया गया है कि गर्भ के सातवें मास तक सेक्स किया जा सकता है, लेकिन सावधानीपूर्वक। आयुर्वेद का मानना है कि यदि गर्भ में लड़का है तो स्त्री की संभोग की इच्छा नहीं होगी या कम होगी। साथ ही यदि गर्भ में लड़की है तो स्त्री को संभोग की इच्छा बनी रहेगी।कुछ महिलाएँ इस काल में सेक्स का आनंद नहीं उठा पातीं। कभी-कभी वे इतनी थकान महसूस करती हैं कि उनके भीतर एक आनंदपूर्ण संभोग का मजा उठाने की ऊर्जा और उत्साह नहीं रहता। कई बार रक्त स्राव या योनि में पीड़ा होने के कारण भी वे सेक्स से मना करती हैं। डॉक्टर भी ऐसी स्थिति में पति-पत्नी को सावधानी बरतने की सलाह देते हैं।पहली बार गर्भवती हुई कई महिलाएँ शुरू के सप्ताहों में सेक्स में जरा भी रुचि नहीं लेती हैं। वहीं दो-तीन माह बीतने पर वे ही महिलाएँ गर्भावस्था में भी सेक्स का भरपूर आनंद उठाती हैं, उनकी प्रतिदिन सेक्स करने की इच्छा होती है।अध्ययनों से यह पता चला है कि पहली बार गर्भवती हुई महिला की गर्भावस्था के शुरू के सप्ताहों में सेक्स में कम रुचि होती है, जबकि दूसरी या इससे अधिक बार गर्भवती होने वाली महिलाएँ अपनी यौन भावना में कोई विशेष अंतर नहीं पाती हैं।अध्ययनों से यह भी तथ्य सामने आया है कि कुछ महिलाएँ मानती हैं कि मतली, वमन तथा अवसाद का समय बीत जाने पर उन्हें सेक्स में पहले की तुलना में अधिक आनंद प्राप्त होता है।पुरुषों को अपनी गर्भवती पत्नियों के समीप रहकर उनमें बराबर रुचि लेते रहना चाहिए। अधिकांश पुरुष शुरू में बहुत ध्यान रखते हैं, लेकिन बाद में सेक्स से वंचित रहने के कारण उनकी रुचि अपनी पत्नी में कम हो जाती है।कई लोग अपनी पत्नी की ओर से प्यार और ध्यान की कमी महसूस करते हैं और इस कारण उपेक्षा करते हैं, उन्हें सिर्फ आने वाले बच्चे के प्रति मोह रहता है, पत्नी के प्रति कम हो जाता है। वे यह सोचकर तथा कह कर अपने फर्ज की इतिश्री कर लेते हैं कि गर्भवती को तो गर्भावस्था की परेशानियों को सहन करना ही पड़ता है।गर्भावस्था में पति-पत्नी संभोग के लिए ऐसे आसन अपना सकते हैं, जो सुविधापूर्ण और आरामदेह हों, बशर्तें डॉक्टर ने किसी आसन विशेष के लिए पूरी मनाही न की हो। पूर्व गर्भपात, गर्भावस्था की स्थिति अथवा विशिष्ट स्त्रियोचित समस्या को दृष्टिगत रखते हुए डॉक्टर संभोग से दूर रहने की सलाह भी दे सकता है।वैसे निर्णय आप दोनों ही लें कि आपके लिए क्या ठीक है और आप कब तक अपने ऊपर संयम रख सकते हैं। गर्भावस्था में सेक्स न करना ज्यादा अच्छा रहेगा, इस पीरियड में स्त्री को जितना आराम दिया जाए व सेक्स से दूरी बनाकर रखी जाए, उतना ही अच्छा है। एक बार अपने चिकित्सक से सलाह अवश्य लें। |