महाभारत के अनुसार ऐसे कार्यों से द्वार पर खड़े हो जाते हैं यमराज

हिन्दू शास्त्रों में कहा गया है कि वैसे तो पाप से कोई भी अछूता नहीं है, लेकिन फिर भी कुछ ऐसे पाप है जिन पर ध्यान देना जरूरी है। अन्यथा आप धीरे-धीरे के नजदीक पहुंच जाएंगे। अत: प्रत्येक व्यक्ति को जीवन में मन, वचन, कर्म से एक रहना चाहिए। इस पर ध्यान देना चाहिए। ऐसे कई लोग है जिनके पाप उजागर हो जाते हैं और कुछ के नहीं। जिनके उजागर नहीं होते तो इसका यह मतलब नहीं कि वे बचे हुए हैं।

सभी को अपने कर्मों के अच्छे या बुरे परिणाम भुगतने ही होते हैं। धर्म शास्त्र में व्यावहारिक जीवन से जुड़े ऐसे ही बताए गए हैं। जिनको करने से व्यक्ति पाप का भागी बनता है और ऐसे पापों का बढ़ना ही अंत का कारण बनता है। अर्थात द्वार पर को खड़ा देखना। जानिए...

- शराब पीना
- शराब बेचना
- चुगली करना
- गर्भ हत्या करना
- क्रूर स्वभाव वाला
- जहर देना
- धर्म या ईश्वर का विरोध
- वेद की बुराई करना
- हथियार बनाना या बेचना
- गुरु की स्त्री से संबंध
- परायी स्त्री को बुरी नजर से देखना
- परायी स्त्री से बुरा व्यवहार या संबंध बनाना
- वाचालता या बकवास करना
- खुद के शरीर के प्रति लापरवाह
- मित्र के साथ विश्वासघात करना
- घर में आग लगाना या कलह करवाना
- शक्तिशाली होते हुए किसी के द्वारा रक्षा की मांग करने पर भी उसके साथ हिंसा करना।

दूसरों में दोष निकालने के बजाय खुद की कमियों पर भी ध्यान देना जरूरी है। यदि आप ऐसा नहीं करते हैं तो कई तरह की परेशानियों से घिर जाते हैं। जो भी लोग खुद को निर्दोष या निष्पाप समझ रहे हैं उन्हें जरा खुद के भीतर भी झांक लेना चाहिए। जो व्यक्ति खुद के गुण या अवगुण नहीं देख पाता है वह भी पाप की श्रेणी में ही आता है।



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