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Last Updated : बुधवार, 17 जुलाई 2019 (23:11 IST)

उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में श्रावण मास की पहली भस्‍म आरती, 1,000 से अधिक श्रद्धालु शामिल हुए

Mahakal temple Bhasm Aarti। श्रावण मास की पहली भस्‍म आरती में 1,000 से अधिक श्रद्धालु शामिल हुए - Mahakal temple
उज्‍जैन। मध्यप्रदेश के उज्जैन में भगवान महाकालेश्वर मंदिर में श्रावण मास के पहले दिन बुधवार को 1,000 से अधिक दर्शनार्थी भस्‍म आरती में शामिल हुए और दर्शन कर पूजा-अर्चना की।
 
महाकालेश्वर देश का एकमात्र ऐसा शिवालय है, जहां प्रतिदिन भस्‍म आरती होती है और इस मंदिर में श्रावण महोत्सव भी मराठी पंचांग के अनुसार मनाया जाता है। इस वजह से डेढ़ माह तक श्रावण चलता है। श्रावण मास के बुधवार को पहली भस्‍म आरती में 1,211 श्रद्धालु शामिल हुए।
 
बीती रात्रि में लगे चं‍द्रग्रहण के कारण बुधवार तड़के होने वाली भस्‍म आरती 2.30 घंटे देरी से हुई। ग्रहण समाप्ति के बाद फायर ब्रिगेड द्वारा महाकालेश्‍वर मंदिर परिसर और शिखर की धुलाई की गई। मंदिर के शुद्धिकरण के पश्‍चात श्रद्धालुओं को तड़के 4.30 बजे से मंदिर में प्रवेश दिया गया। इसके बाद प्रात:काल 5 से 6.30 बजे तक भस्‍म आरती हुई।
 
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार महाकालेश्‍वर मंदिर में श्रावण/भादौ मास में होने वाली भस्‍म आरती के समय में परिवर्तन किया गया है। श्रावण/भादौ मास में भगवान की भस्‍म आरती का समय बुधवार को 17 से 26 अगस्‍त तक तड़के 3 बजे होगा। इसके अलावा प्रत्येक सोमवार भस्‍म आरती का समय तड़के 2.30 बजे होगा और 27 अगस्‍त के बाद पूर्ववत रहेगा।
 
मंदिर में श्रावण-भाद्रपद माह को दृष्टिगत रखते हुए मंदिर प्रबंध समिति द्वारा श्रद्धालुओं हेतु सुगम दर्शन की व्यवस्था की गई है जिससे सभी भक्तों को भगवान के दर्शन शीघ्र हो सकें।
 
मंदिर प्रबंध समिति के उपप्रशासक आशुतोष गोस्वामी ने बताया कि सामान्य दर्शनार्थी भगवान के दर्शन के लिए माधव सेवा न्यास परिसर से पुराने प्रशासनिक कार्यालय के बैरिकेड्स से टनल की छत पर से फेसेलिटी सेंटर होते हुए दर्शन करेंगे।
 
इसी प्रकार 250 रुपए शीघ्र दर्शन की व्यवस्था शंख द्वार से रहेगी। कावड़ यात्री, पुजारी-पुरोहित, नियमित दर्शनार्थी, दिव्यांग व वृद्धजन एवं प्रेस भस्‍म आरती द्वार से प्रवेश करेंगे। डी गेट पूर्णत: प्रतिबंधित रहेगा। सभी का निर्गम रुद्र सागर की ओर वाले निर्गम द्वार से होगा।
उन्होंने बताया कि श्रावण-भाद्रपद माह के प्रत्येक सोमवार को भगवान की सवारी निकाली जाएगी, जो 22 व 29 जुलाई के अलावा 5, 12 एवं 19 अगस्त तथा शाही एवं अंतिम सवारी 26 अगस्त को निकलेगी। भगवान श्री महाकाल विभिन्न रूपों में अपनी प्रजा का हाल जानने नगर भ्रमण पर निकलेंगे और 5 अगस्त को नागपंचमी पर्व मनाया जाएगा।
 
मंदिर प्रबंध समिति द्वारा गत वर्ष की भांति इस वर्ष भी श्रावण महोत्सव आयोजित किया जा रहा है। श्रावण महोत्सव में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के कलाकारों को आमंत्रित किया गया है।
 
इस वर्ष श्रावण महोत्सव में 21 जुलाई को विवेक कर्महे (जबलपुर) का शास्त्रीय गायन, मेहताब अली का सितार वादन व स्वाति सिन्हा (दिल्ली) के कथक नृत्य, 28 जुलाई को रोहित चावरे (उज्जैन) का शास्त्रीय गायन, दिव्येश कुमार महाराज (इंदौर) का पखावज, दिल्ली की कविता ठाकुर द्वारा कथक नृत्य की प्रस्तुति दी जाएगी।
 
इसी प्रकार 4 अगस्त को दिल्ली के प्रशांत मलिक व निशांत मलिक का ध्रुपद गायन, उज्जैन की अवनि शुक्ला व अनन्या गौर का युगल कथक, उज्जैन की ऋचा बेडेकर का सरोद वादन, उज्जैन की ही मोनिका यादव के कथक नृत्य की प्रस्तुति होगी। 11 अगस्त को दिल्ली के मुकेश गंगाणी के कथक नृत्य, दिल्ली के कशिश मित्तल के शास्त्रीय गायन, उज्जैन की जान्हवी तेलंग का कथक और भोपाल के अमित मलिक का वायलिन वादन होगा।
18 अगस्त को दिल्ली की समीक्षा शर्मा अरुण का कथक, कोलकाता के अजय प्रसन्ना का बांसुरी वादन, मुंबई के भूपेन्द्र पाठक का ध्रुपद गायन तथा उज्जैन की सुरभि पराशर के कथक नृत्य की प्रस्तुति होगी।
 
महोत्सव के अंतिम रविवार 25 अगस्त को वडोदरा की मेघा भोंसले का उपशास्त्रीय गायन, इंदौर की प्रियंका वैद्य की संस्था शिव अनादि नृत्य कला संस्थान के समूह कथक व इंदौर के ही सुनील मसूरकर के शास्त्रीय गायन की प्रस्तुति होगी। 
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