गुना में अपने ही चेले से हार गए सियासत के 'महाराज'

पर कांग्रेस के प्रत्याशी और सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने ही चेले से हार गए हैं। कांग्रेस का गढ़ मानी जाने वाली गुना-शिवपुरी लोकसभा सीट पर ज्योतिरादित्य सिंधिया का हारना भाजपा की एक बड़ी सफलता मानी जा सकती है, क्योंकि लंबे समय से गुना लोकसभा सीट पर सिंधिया राजघराने का ही कब्जा रहा है।
अब तक के इतिहास में गुना-लोकसभा सीट पर कोई भी दावेदार सिंधिया को हराने में सफलता प्राप्त नहीं कर पाया था। अगर बात केपी यादव की करें तो केपी यादव कांग्रेस से ही पूर्व सांसद प्रतिनिधि रहे हैं और विधानसभा चुनाव से ठीक पहले उन्होंने भाजपा की सदस्यता लेकर विधानसभा का चुनाव लड़ा था और हारे भी थे, पर भाजपा ने केपी यादव पर फिर से विश्वास जताया और गुना-शिवपुरी लोकसभा सीट पर उनको फिर से मौका दिया और केपी यादव ने जीतकर एक नया रिकॉर्ड बना दिया है।

चुनाव के दौरान सिंधिया की पत्नी ने केपी यादव पर ट्वीट कर तंज भी कसा था कि कल तक महाराज के सेल्फी लेने का इंतजार करने वाला अब उनको चुनौती देगा? केपी यादव की ये जीत कई मायनों में ऐतिहासिक है। 1957 से से सिंधिया राजघराने के कब्जे में रहने वाली गुना सीट पर ज्योतिरादित्य सिंधिया की हार से अब इस परंपरागत गढ़ से भविष्य में सिंधिया की डगर काफी कठिन हो जाएगी।

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