बंदर जैसा बिल्कुल नहीं है हिममानव

यूट्यूब photo
पुनः संशोधित सोमवार, 4 दिसंबर 2017 (11:48 IST)
या येति कोई अलग जीव नहीं हैं। से जुटाए गए कई नमूनों की गहन डीएनए जांच करने के बाद वैज्ञानिकों ने येति का राज खोला है।
हड्डियों, दांतों, बाल, त्वचा और अन्य हिस्सों के ये नमूने दुनिया भर के कलेक्शनों और म्यूजियमों से लिये गये। कई स्तर की गहन जांच के बाद वैज्ञानिकों ने दावा किया कि हिम मानव या येति कोई अलग जीव नहीं है। सारे नमूनों के डीएनए के तार भालू से ही जुड़े। जेनेटिक सीक्वेसिंग में पता चला कि ये नमूने कई भालुओं से मिलते जुलते हैं। एक नमूना कुत्ते का निकाला।

ज्यादातर अवशेष एशियाई काले भालू, तिब्बत के भूरे भालू और हिमालय के भूरे भालू के थे। शोध का नेतृत्व करने कर रही वैज्ञानिक शारलोटे लिंडक्विस्ट कहती हैं, "हमारे नतीजे मजबूती से दिखाते हैं कि येति जैविक रूप से स्थानीय भालू पर निर्भर है।" लिंडक्विस्ट का दावा है कि रॉयल सोसाइटी जर्नल "प्रोसिडिंग्स बी" में छपा यह शोध येति या हिममानव के बारे में अब तक की सबसे सटीक जानकारी है।
शोध के दौरान तिब्बत, नेपाल और भारत से जुटाये गये नमूनों का माइटोक्रॉन्ड्रियल डीएनए निकाला गया। इसी के आधार पर जेनेटिक सीक्वेसिंग की गयी। किस्सों और कहानियों के मुताबिक हिममानव या येति हिमालय में पाया जाने वाला एक विशाल मानव है। की तरह दिखता ये हिममानव दो पैरों पर चलता है। पर्वतारोहियों के कई ग्रुप भी पहाड़ों में हिममानव को देखने का दावा करते रहे हैं। उत्तर अमेरिका में भी बिगफुट नामक विशाल हिममानव का जिक्र किया जाता है।
वैज्ञानिकों को लगता है कि हिमालय के ऊंचे इलाके में रहने वाले भालू क्रमिक विकास के साथ बदले होंगे। ऊंचे इलाके में बेहद दुश्वार हालात में जीने के लिए उन्हें ऊर्जा बचाने की जरूरत पड़ी होगी। खाना खोजने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती होगी। दूर दूर तक नजर मारनी पड़ती होगी।

लिहाजा वो कभी कभार चार पैरों के बजाय दो पैरों पर खड़े हो जाते होंगे। लिंडक्विस्ट कहती हैं, "तिब्बती पठार के ऊंचे इलाके में घूमने वाले भूरे भालू और पश्चिमी हिमालय के पहाड़ों के भूरे भालू, अलग अलग झुंड के हैं। शायद अलगाव 6,50,000 साल पहले हुआ होगा, ग्लेशियरों के बनते समय।" और इसके बाद एक दूसरे के संपर्क में नहीं आये।
ओएसजे/एके (एएफपी, रॉयटर्स)

वेबदुनिया हिंदी मोबाइल ऐप अब iOS पर भी, डाउनलोड के लिए क्लिक करें। एंड्रॉयड मोबाइल ऐप डाउनलोड करने के लिए क्लिक करें। ख़बरें पढ़ने और राय देने के लिए हमारे फेसबुक पन्ने और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं।



और भी पढ़ें :

भारत में इंसानी मल को ढोते हजारों लोग

भारत में इंसानी मल को ढोते हजारों लोग
भारत में 21वीं सदी में भी ऐसे लोग मौजूद हैं जो इंसानी मल को उठाने और सिर पर ढोने को मजबूर ...

क्या होगा जब कंप्यूटर का दिमाग पागल हो जाए

क्या होगा जब कंप्यूटर का दिमाग पागल हो जाए
क्या होगा अगर कंप्यूटर और मशीनों को चलाने वाले दिमाग यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पागल हो ...

चंद हज़ार रुपयों से अरबपति बनने वाली केंड्रा की कहानी

चंद हज़ार रुपयों से अरबपति बनने वाली केंड्रा की कहानी
गर्भ के आख़िरी दिनों में केंड्रा स्कॉट को आराम के लिए कहा गया था। उसी वक़्त उन्हें इस ...

सिंगापुर डायरी: ट्रंप-किम की मुलाकात की जगह बसता है 'मिनी ...

सिंगापुर डायरी: ट्रंप-किम की मुलाकात की जगह बसता है 'मिनी इंडिया'
सिंगापुर का "लिटिल इंडिया" दो किलोमीटर के इलाक़े में बसा एक मिनी भारत है। ये विदेश में ...

जर्मन बच्चे कितने पढ़ाकू, कितने बिंदास

जर्मन बच्चे कितने पढ़ाकू, कितने बिंदास
जर्मनी में एक साल के भीतर कितने बच्चे होते हैं, या बच्चों को कितनी पॉकेट मनी मिलती है, या ...

पत्नी के चेहरे पर दाढ़ी, आवाज मर्दों जैसी, तलाक चाहिए ...

पत्नी के चेहरे पर दाढ़ी, आवाज मर्दों जैसी, तलाक चाहिए लेकिन...
अहमदाबाद का एक शख्स अपनी पत्नी से इसलिए तलाक चाहता था क्योंकि उसकी पत्नी की आवाज मर्दों ...

लाखों लोगों को शुद्ध पानी दे सकते हैं सहजन के बीज : शोध

लाखों लोगों को शुद्ध पानी दे सकते हैं सहजन के बीज : शोध
सहजन... मुनगा और ड्रमस्टिक नाम से पहचाने जाने वाले पेड़ का एक अन्य इस्तेमाल वैज्ञानिकों ...

मनीष सिसोदिया की हालत बिगड़ी, अस्पताल ले जाया गया

मनीष सिसोदिया की हालत बिगड़ी, अस्पताल ले जाया गया
नई दिल्ली। दिल्ली के उपमुख्‍यमंत्री मनीष सिसोदिया की अनशन के छठे दिन हालत बिगड़ गई। ...