नौकरी के लिए जरूरी नहीं होगा कवर लेटर

पुनः संशोधित गुरुवार, 28 जून 2018 (11:57 IST)
नौकरी के लिए अर्जी देते समय साथ में सीवी और भी भेजे जाते हैं। जर्मन रेल अपनी ट्रेनी के लिए पत्र यानी कवर लेटर की जरूरत समाप्त कर रही है। आवेदकों के अलावा बहुत से रिक्रूटर भी इसे फालतू समझते हैं।

जर्मन उद्यमों को कर्मचारी खोजने में मुश्किल आ रही है। एक तो घटती आबादी का दबाव तो दूसरे डिजीटल युग में नौजवानों का बदलता व्यवहार। जर्मनी में कर्मचारियों की खोज व्यावसायिक प्रशिक्षण के साथ ही शुरू हो जाती है। और उद्यमों ने पाया है कि स्कूल पास करने वाले युवाओं के लिए आवेदन पत्र लिखना बड़ी बाधा है। इसलिए जर्मन रेल ने ट्रेनी पदों के लिए आवेदन पत्र की जरूरत खत्म कर दी है। इस पत्र में उम्मीदवार ये लिखते हैं कि उन्हें यही काम क्यों पसंद है, जिसमें वे अपनी क्षमता और प्रतिभा पर जोर दे सकते हैं। अब ऑनलाइन आवेदन में सिर्फ सीवी और सर्टिफिकेट अपलोड करना होगा।

जर्मन रेल के अधिकारियों का कहना है कि वे उम्मीदवारों के लिए आवेदन को आसान बनाना चाहते हैं। जर्मन रेल इस साल 19,000 कर्मचारियों और 3600 ट्रेनी की भर्ती कर रहा है। आने वाले दस सालों में उसके आधे कर्मचारी पेंशन पर चले जाएंगे। रेल अधिकारियों का मानना है कि आवेदन पत्र लिखना उम्मीदवारों के लिए बहुत बड़ी बाधा होती है। इसे या तो स्कूली शिक्षा की कमजोरी कह सकते हैं या बहुत से छात्रों की कमजोरी जिन्हें अपनी प्रतिभा और क्षमता के बखान के लिए ज्यादा सोचना पड़ता है। वहीं रिक्रूटरों का मानना है कि उम्मीदवारों के इन गुणों की जांच इंटरव्यू के दौरान यूं भी की जाती है, इसलिए आवेदन के दौरान उसे लिखने की जरूरत नहीं।

युवाओं की परेशानी
ऐसा नहीं है कि सिर्फ उद्यम आवेदन पत्र को उम्मीदवारों के लिए मुश्किल मान रहे हैं। बहुत से नौजवान भी इसे आवेदन करने में बड़ी बाधा मानते हैं। माइनेस्टाट।डीई द्वारा कराए गए एक सर्वेक्षण के अनुसार 57 फीसदी युवाओं का कहना है कि उन्हे पता नहीं होता कि उन्हें क्या लिखना है। 19 फीसदी नौजवान इसमें लगने वाले समय को बाधा मानते हैं। डिजीटल युग में 15 फीसदी ऐसे हैं जो टेक्स्ट लिखना ही नहीं जानते। 5 फीसदी के लिए बाधा ये है कि वे आवेदन पत्र अपने स्मार्टफोन पर नहीं तैयार कर सकते।

उद्यमों के लिए एक और मुश्किल है। रिक्रूटर भी आवेदन की प्रक्रिया से संतुष्ट नहीं हैं। करीब आधे आवेदन पत्र में कही गई ज्यादातर बातों को भरोसेमंद ही नहीं मानते। करीब 40 फीसदी को वह पसंद नहीं क्योंकि उसकी जानकारी वस्तुपरक नहीं होती। कंसल्टेंसी फर्म रोबर्ट हाफ के एक सर्वे के अनुसार 15 फीसदी ने माना है कि उनके पास आवेदन पत्र को पढ़ने का समय ही नहीं होता। और मजेदार बात ये है कि करीब 60 प्रतिशत उद्यम बिना चिट्ठी के साथ भेजी गई अर्जियों पर भी गौर करते हैं।

तुमयाआप
जर्मनी में तुम और आप की सख्त परंपरा रही है। अपरिचित लोगों से आप कह कर और परिचितों तथा बच्चों के साथ तुम कह कर बातचीत होती है। कुछ कुछ बंगला भाषा की तरह। ये वर्जनाएं भी टूट रही हैं। जब से उद्यमों ने सोशल मीडिया में नौकरियों का विज्ञापन करना शुरू किया तब से विज्ञापनों और बातचीत की भाषा भी बदल रही है। पहले स्कूल पास करने के बाद नौजवानों को वयस्क माना जाता था और उन्हें आप कहा जाता था। ट्रेनी पद के इंटरव्यू में भी उनसे आप कहकर बात की जाती थी। लेकिन सोशल मीडिया इस परंपरा को भी बदल दे रहा है।

समाज में बोलचाल की भाषा में बदलाव हो रहा है और भाषा में बदलाव उद्यमों को भी युवाओं के करीब ला रहा है। बढ़ते पैमाने पर सोशल मीडिया पर हो रही रिक्रूटिंग के कारण मेल के आदान प्रदान या आरंभिक बातचीत में आप की जगह तुम ने ले ली है। लेकिन अभी ये हवा हर उद्यम तक नहीं पहुंची है। प्रसिद्ध बीमा कंपनी अलियांस अभी इसके साथ परीक्षण कर रही है। स्कूली छात्रों को कंपनी के कर्मचारी तुम कहकर संबोधित करते हैं जबकि अनुभवी उम्मीदवारों को अभी भी आप कहकर संबोधित किया जा रहा है। एक सर्वे के अनुसार जर्मन शेयर बाजार के 30 उद्यम अभी यही कर रहे हैं। जर्मन रोजगार बाजार में तेजी से बदलाव आ रहा है, वर्जनाएं टूट रही हैं, नए मानक स्थापित किए जा रहे हैं।
रिपोर्ट महेश झा

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