जिन्हें फेसबुक ने भी नौकरी नहीं दी थी, कुछ ऐसी है WhatsApp के संस्थापकों की कहानी

Last Updated: बुधवार, 16 मई 2018 (15:43 IST)
WhatsApp.. आज के समय में सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप.. 2009 में बने इस ऐप के दुनियाभर में 1.5 बिलियन से ज़्यादा एक्टिव यूजर्स हैं, और अकेले भारत में ही इसके 200 मिलियन यूजर्स हैं।

लेकिन क्या आप जानते हैं कि की शुरुआत किस तरह से हुई.. जिस फेसबुक ने WhatsApp को खरीदा है, उसी कंपनी ने एक समय WhatsApp के संस्थापकों को नौकरी देने से इनकार कर दिया था! तो आइए जानते हैं WhatsApp के संस्थापकों के संघर्ष की कहानी..

WhatsApp के संस्थापकों जेन कौम और ब्रायन एक्टन की दोस्ती याहू कंपनी में काम करने के दौरान हुई। लगभग 10 साल काम करने के बाद दोनों ने 2007 में याहू की नौकरी छोड़ दी और अपने दम पर कुछ नया करने की सोचा।

जनवरी 2009 में जेन कौम ने जब एप्पल का आईफोन खरीदा तो उनके दिमाग में आया कि क्यों न एक ऐसा ऐप बनाया जाए जिससे दोस्तों को आसानी से अपना ‘स्टेटस’ जैसे- ‘मैं अभी जिम में हूं’ या ‘बैटरी लो है’ का नोटिफिकेशन पहुंचाई जा सके, ताकि कोई कॉल मिस न हो।

इस प्रकार, फरवरी 2009 में जेन कौम ने आईफोन के लिए एक ऐप बनाया और उस ऐप का नाम रखा- WhatsApp. शुरुआती दिनों में WhatsApp ज्यादा सफल ना हो सका, क्योंकि यह बार-बार क्रैश या हैंग हो जाता था। तंग आगर कौम इस प्रोजेक्ट को बंद करने का भी सोच चुके थे, लेकिन ब्रायन एक्टन ने उन्हें समझाया कि अगर वह इस समय WhatsApp को छोड़ देंगे तो यह उनकी सबसे बड़ी गलती होगी।

फिर क्या था, कौम जी-जान से WhatsApp की कमियों को दूर करने में लग गए और जून 2009 में WhatsApp का नया वर्जन तैयार कर लिया जिसमें मैसेजिंग कंपोनेंट भी था। फिर एक समय ऐसा आया कि कौम के पास WhatsApp को आगे ले जाने के लिए पैसे नहीं थे, तो उन्होंने दोबारा नौकरी करने का निर्णय लिया और फेसबुक में अप्लाई किया, लेकिन वहां उन्हें रिजेक्ट कर दिया गया। उन्होंने अन्य कई बड़ी कंपनियों में भी कोशिश की, पर उन्हें कहीं भी नौकरी नहीं मिली।

इस दौरान ब्रायन एक्टन को भी फेसबुक और ट्विटर जैसी बड़ी कंपनियों ने रिजेक्ट कर दिया था और वे किसी दूसरे स्टार्टअप में लगे हुए थे, जो अच्‍छा परफॉर्म नहीं कर पा रही थी। वैसे तो WhatsApp की स्थिति ठीक नहीं थी, फिर भी कौम ने एक्टन को अपनी कंपनी ज्वाइन करने के लिए मना लिया।

अब सबसे बड़ी चिंता थी फंड की.. तो अक्तूबर 2009 में एक्टन ने याहू के पुराने दोस्तों से मदद मांगी। फंड मिलने के बाद दोनों रात-दिन एक करते हुए WhatsApp को डेवलप करने में लग गए और फिर धीरे-धीरे दूसरे प्लेटफॉर्म के लिए भी WhatsApp वर्जन तैयार किए गए।

इस तरह WhatsApp की शुरुआत ‘स्टेटस’ का नोटिफिकेशन भेजने के आइडिया से हुई जो बाद में एक इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप में तब्दील हो गया।

साल 2010 से 2014 तक WhatsApp के यूज़र्स पूरे विश्व भर में फैल गए। 2014 के अंत तक WhatsApp यूज़र्स की संख्या 60 करोड़ से भी ज्यादा हो चुकी थी। जिस फेसबुक ने एक समय जेन कौम और ब्रायन एक्टन को नौकरी देने के लिए मना कर दिया था, उसी कंपनी ने वर्ष 2014 में एक लाख करोड़ से अधिक की कीमत में उनकी कंपनी WhatsApp को खरीदा।

प्रस्तुति:
मैरी रोज़ बाबा

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