सेबी ने कसा क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों पर शिकंजा

नई दिल्ली| पुनः संशोधित शनिवार, 9 सितम्बर 2017 (08:14 IST)
नई दिल्ली। बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों पर शिकंजा कसते हुए ऐसी एक एजेंसी में दूसरी एजेंसी की हिस्सेदारी के लिए अधिकतम 10 प्रतिशत की सीमा रखे जाने का प्रस्ताव किया है।
एक परिचर्चा पत्र के अनुसार, नियामक ने क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों और इनकी सेवाएं लेने वाली कंपनियों के लिए अधिक पारदर्शी खुलासे की जरूरत का भी सुझाव दिया। सेबी ने इन एजेंसियों के प्रवर्तकों की वित्तीय एवं परिचालन योग्यता में भी सख्ती किए जाने के भी पक्ष में है।

सेबी ने एक अन्य मामले में सूचीबद्ध कंपनियों के नियंत्रण हासिल करने के मौजूदा प्रावधानों में किसी तरह का बदलाव नहीं करने का निर्णय लिया है। सेबी को इसमें बदलाव के उपरांत प्रावधानों के दुरुपयोग होने के बाबत सुझाव मिले।
सेबी ने एक अलग आदेश में कहा, 'मौजूदा नियामकीय परिस्थितियों को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है कि नियंत्रण हासिल करने के मौजूदा नियमों को अधिग्रहण नियमनों की परिभाषा के अनुरूप ही रखा जाए और इसमें कोई बदलाव नहीं किया जाए।'

रेटिंग एजेंसियों से संबंधित प्रस्तावित प्रावधानों का एसएंडपी, मूडीज और फिच जैसी वैश्विक रेटिंग एजेंसियों पर असर पड़ने की संभावना है क्योंकि इन एजेंसियों की देश में सीधी मौजूदगी के साथ साथ घरेलू रेटिंग एजेंसियों में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी है।
इसके अलावा ऐसे किसी भी ऐसे अधिग्रहण से पहले सेबी की स्वीकृति लेनी होगी जिसका नियंत्रण पर असर पड़ता हो। सेबी के अनुसार, वित्तीय संस्थानों और अर्थव्यवस्था की रेटिंग तथा वित्तीय शोध के अलावा किसी भी अन्य तरह की गतिविधि क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों को एक अलग कंपनी के जरिये करनी होगी।

सेबी ने स्पष्ट किया है कि जहां तक शेयरधारिता का प्रस्ताव है यह व्यापक आधार वाले घरेलू वित्तीय संस्थानों की होल्डिंग के मामले में लागू नहीं होगा। (भाषा)

Widgets Magazine
वेबदुनिया हिंदी मोबाइल ऐप अब iOS पर भी, डाउनलोड के लिए क्लिक करें। एंड्रॉयड मोबाइल ऐप डाउनलोड करने के लिए क्लिक करें। ख़बरें पढ़ने और राय देने के लिए हमारे फेसबुक पन्ने और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं।



और भी पढ़ें :