बाल कहानी : टीना की सूझबूझ...


Author प्रभुदयाल श्रीवास्तव| Last Updated: सोमवार, 22 मई 2017 (17:52 IST)
 
 
* बच्चों की कहानी : टीना ने चोरी पकड़वाई...
'दरियां ले लोऽऽऽ, दरियांऽऽऽ, रंग-बिरंगी मजबूत टिकाऊ दरियां'।
 
जैसे ही टीना ने आवाज सुनी, वह बस्ता जस का तस छोड़कर बाहर की तरफ भागी। 
 
अम्मा चिल्लाईं, 'अरे कहां भाग रही है, पढ़ाई तो पूरी कर ले?' परंतु टीना को तो भागना ही था दरीवाले की आवाज पर।
 
'पता नहीं क्या हो गया है इस टीना को? दरीवाले की आवाज आती है तो सब काम छोड़कर भाग जाती है।' अम्मा मन ही मन बुदबुदातीं। उन्होंने टीना के बापू से शाम को इस बाबत चर्चा की।
 
परंतु बाबू जमनालालजी ने हंसकर कहा, 'तुम भी कहां की बातें ले बैठती हो, अरे बच्ची है, दरीवाले की आवाज सुनकर दरी देखने दौड़ जाती है तो इसमें क्या बुराई है? मैं भी तो बचपन में ठेले वालों की आवाज सुनकर खाने की थाली छोड़कर भाग जाता था।'
 
बात तो सच थी। वह भी तो जब छोटी थी तो आसमान में हवाई जहाज की आवाज सुनकर बाथरूम में से आधी नहाई ही बाहर दौड़ पड़ती थी। खैर, बात आई-गई हो गई। 
 
दूसरे दिन मोहल्ले में हल्ला मचा कि रतनलालजी के घर में चोरी हो गई। पुलिस की गाड़ी हूटर बजाती हुई आई और चोरी वाले घर के सामने भीड़ लग गई। रतनलालजी एक दिन पहले ही से नागपुर गए थे और सुबह ही वापस आए थे। घर का सारा सामान उन्होंने बिखरा पाया और अलमारी का ताला टूटा पड़ा था। चोरों ने अलमारी की नकदी और सोने-चांदी के जेवरों पर हाथ साफ कर दिया था। पुलिस अपनी कागजी खानापूर्ति करके चली गई थी।
 
'मैं जानती थी आज कहीं-न-कहीं चोरी होगी', टीना धीरे-धीरे बड़बड़ा रही थी।
 
'क्या कह रही है बिटिया, क्या बुदबुदा रही है?' अम्मा नीलू ने प्रश्न किया तो वह बोली, 'कुछ नहीं अम्मा, बाद में बताऊंगी।'
 
नीलू सोच रही थी कि टीना को जाने क्या हो गया है? कुछ तो बड़बड़ाती रहती है। 
 
उस दिन रविवार था। जमनालालजी का आज अवकाश था। कभी-कभी वे अवकाश के दिन भी कार्यालय चले जाते थे। काम ही इतना ज्यादा था कि छुट्टी के दिन भी कार्यालय में बैठना पड़ता था किंतु आज उनका मूड था कि घर पर ही पत्नी और बच्चों के साथ रहकर वे थोड़ा मनोरंजन करें। खाना खाया और टीना के साथ लूडो खेलने बैठ गए।
 
अचानक दरीवाले की आवाज सुनाई पड़ी। टीना कुछ चौंकी और उठकर बाहर भागने लगी, परंतु कुछ सोचती हुई वापस पलटी और जमनालालजी से बोली, 'बापू आज आप भी चलिए न दरीवाले को देखने।'
 
'क्या, मैं चलूं, क्यों, क्या मैं बच्चा हूं?' वे ठहाका मारकर हंसने लगे। 'जा, तू ही जा, उस दरीवाले को देखने।' इतने सारे प्रश्न सुनकर पहले तो वह कुछ नर्वस हुई किंतु तुरंत संभल गई। 
 
'नहीं बापू कुछ खास बात है, मैं आपको... कुछ बताना चाहती हूं।' वह थोड़ा झिझकी और उनका हाथ पकड़कर बाहर खींचने लगी। आखिर जमनालालजी थे तो एक बेटी के बाप ही, उठकर खड़े हो गए। 
 
'कहां ले चलती है चल, ये लड़की भी...' यह कहते हुए उसके पीछे चल दिए। 
 
बाहर उन्हें वह दरीवाला दिखाई दिया। दूसरी गली की ओर वह मुड़ रहा था। टीना उन्हें घसीटकर दूसरी गली के किनारे तक ले गई। धीरे से बोली, 'बापू यह गली तो आगे बंद है, इसमें से ही किसी घर में आज चोरी होगी।'
 
'क्या पागलों-सी बातें करती है? क्या तू सीआईडी है? तुझे कैसे पता?' 
 
'बापू, मैं सच्ची कह रही हूं। इस गली का कोई घर मालिक जरूर ताला लगाकर बाहर गया होगा। उसके यहां चोरी होगी।'
 
जमनालालजी को याद आया कि इस गली में रहने वाले उसके एक मित्र रतनलालजी सुबह ही नागपुर एक विवाह समारोह में गए हैं। 
 
उन्होंने पूछा, 'तुमने यह कैसे अंदाज लगाया कि आज यहां चोरी होगी?' 
 
'बापू, मैं तीन माह से इस दरी वाले को देख रही हूं। जब भी यह आता है और जिस गली में जाता है, वहां चोरी होती है।'
 
'मगर तुम गारंटी से कैसे कह सकती हो? अंदाज गलत भी हो सकता है। किसी पर शक करना...?' वे वाक्य पूरा कर पाते, इसके पहले ही टीना चहक उठी।
 
'बापू, अपने घर के सामने पुलिस अंकल रहते हैं, तो उन्हें बताने में क्या हर्ज है', टीना ने अपनी छोटी-सी बुद्धि का गोला दागा। 
 
शाम को जमनालालजी ने अपने पड़ोसी पुलिस इंस्पेक्टर शुक्लजी को टीना की बातों से अवगत कराया। उन्होंने सादी वर्दी में एक पुलिस वाले को उस गली के आसपास तैनात कर दिया। रात को तो कमाल ही हो गया। दो चोर रंगेहाथों घर के फाटक के भीतर घुसते हुए पकड़े गए। 
 
दूसरे दिन उस दरीवाले को भी पकड़ लिया गया। थाने में ले जाकर जब उसकी पिटाई हुई तो उसने दो दर्जन चोरियों का खुलासा किया, जो पिछले तीन साल से शहर में हो रही थीं और पुलिस पकड़ने में नाकाम रही थी।
 
पुलिस इंस्पेक्टर शुक्ल ने टीना से पूछा, 'बेटी, तुमने कैसे जाना कि इस दरीवाले का चोरियों से कुछ सबंध है?' 
 
'अंकल, अपने मुहल्ले में जब लगातार दो चोरियां हुईं तो मैंने अनुभव किया कि चोरी उसी दिन होती है, जब यह दरीवाला आता है। फिर अगली बार जब यह दरीवाला आया तो मैंने उसका चोरी से पीछा किया। उसी दिन उस गली में चोरी हुई, जिस गली में वह फेरा लगाने भीतर तक गया था। फिर तो यह निश्चित हो गया कि चोरी और इस दरीवाले के बीच कुछ तो संबंध है और मैं अपने बापू को साथ ले गई।'
 
टीना की सूझबूझ से चोरियों का भंडाफोड़ हो गया। 
 
अब दरीवाला नहीं आता। आएगा कहां से? वह तो हवालात में है। टीना की अम्मा को भी अब टीना के बाहर भागने की चिंता नहीं सताती। 

वेबदुनिया हिंदी मोबाइल ऐप अब iOS पर भी, डाउनलोड के लिए क्लिक करें। एंड्रॉयड मोबाइल ऐप डाउनलोड करने के लिए क्लिक करें। ख़बरें पढ़ने और राय देने के लिए हमारे फेसबुक पन्ने और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं।

और भी पढ़ें :

दुर्घटनाएं अमावस्या और पूर्णिमा पर ही क्यों होती है? आइए ...

दुर्घटनाएं अमावस्या और पूर्णिमा पर ही क्यों होती है? आइए जानते हैं यह रहस्य-
पूर्णिमा के दिन मोहक दिखने वाला और अमावस्या पर रात में छुप जाने वाला चांद अनिष्टकारी होता ...

क्या आपका बच्चा भी अंगूठा चूसता है? तो हो जाएं सावधान, जान ...

क्या आपका बच्चा भी अंगूठा चूसता है? तो हो जाएं सावधान, जान लें नुकसान
शायद ऐसा कोई व्यक्ति नहीं होगा, जिसने किसी बच्चे को अंगूठा चूसते हुए कभी न देखा हो। अक्सर ...

यही है वह मौसम जब शरीर का बदलता है तापमान, रहें सावधान, ...

यही है वह मौसम जब शरीर का बदलता है तापमान, रहें सावधान, जानें वजह और बचाव के उपाय
मौसम आ गया है कि आपको चाहे जब लगेगा हल्का बुखार। तो क्या घबराने की कोई बात है? जी नहीं, ...

प्रेशर कुकर में नहीं कड़ाही में पकाएं खाना, जानिए क्यों...

प्रेशर कुकर में नहीं कड़ाही में पकाएं खाना, जानिए क्यों...
अगर आप से पूछा जाए कि प्रेशर कुकर में या कड़ाही खाना बनाना बेहतर है तो आप तुरंत प्रेशर ...

मलाईदार नारियल क्रश, सेहत के यह 8 फायदे पढ़कर रह जाएंगे दंग

मलाईदार नारियल क्रश, सेहत के यह 8 फायदे पढ़कर रह जाएंगे दंग
आजकल मार्केट में नारियल पानी से ज्यादा नारियल क्रश को पसंद किया जा रहा है। इसकी बड़ी वजह ...

दूषित सोच से पीड़ित एक प्रसिद्ध भारतीय अर्थशास्त्री

दूषित सोच से पीड़ित एक प्रसिद्ध भारतीय अर्थशास्त्री
पिछले सप्ताह विश्व प्रसिद्ध अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन ने मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों के ...

यदि पैरेंट्स के व्यवहार में हैं ये 4 बुरी आदतें तो आपके ...

यदि पैरेंट्स के व्यवहार में हैं ये 4 बुरी आदतें तो आपके बच्चे को बिगड़ने से कोई नहीं रोक सकता!
पैरेंट्स की कुछ ऐसी आदतें होती हैं, जो वे बच्चों को सुधारने, कुछ सिखाने-पढ़ाने और नियंत्रण ...

क्या आप भी संकोची हैं, अपना ही सामान मांग नहीं पाते हैं तो ...

क्या आप भी संकोची हैं, अपना ही सामान मांग नहीं पाते हैं तो यह एस्ट्रो टिप्स आपके लिए है
क्या आप भी संकोची हैं, अगर हां तो यह आलेख आपके लिए है...

कैंसर की रिस्क लेना अगर मंजूर है तो ही इन 7 सामान्य लक्षणों ...

कैंसर की रिस्क लेना अगर मंजूर है तो ही इन 7 सामान्य लक्षणों को नजरअंदाज करें, वरना हो सकती है बड़ी परेशानी
ये बीमारी भी ऐसे ही सामने नहीं आती। इसके भी लक्षण हैं जो आप और हम जैसे लोग अनदेखा करते ...

श्री गुरु पूर्णिमा : कैसे मनाएं घर में पर्व जब कोई गुरु ...

श्री गुरु पूर्णिमा : कैसे मनाएं घर में पर्व जब कोई गुरु नहीं हो...ग्रहण के कारण इस समय कर लें पूजन
वे लोग जिन्हें गुरु उपलब्ध नहीं है और साधना करना चाहते हैं उनका प्रतिशत समाज में अधिक है। ...