0

उठो, जागो और नेक इनसान बनो

शुक्रवार,अगस्त 14, 2015
0
1
धर्म के द्वारा पुण्य की पूंजी बढ़ाई जा सकती है। निर्मल और पवित्र मन से भक्ति करने से भगवान के चरणों में स्थान पाया जा ...
1
2
रामकृष्ण परमहंस एक अद्भुत संत थे। उन्हें संत कहना गलत है, क्योंकि वे परमहंस थे। हिन्दू धर्म में परमहंस की उपाधि उसे दी ...
2
3
तुम्हारी वजह से जीते जी किसी की आंखों में आंसू आए तो यह सबसे बड़ा पाप है। लोग मरने के बाद तुम्हारे लिए रोए, यह सबसे ...
3
4
मनुष्य को आचार शास्त्र द्वारा सब तरह की ट्रेनिंग दी जाती है। माता, पिता और आचार्य बच्चे के ज्ञान का मार्ग प्रशस्त करते ...
4
4
5
आप भगवान के आश्रय में ही हैं, लेकिन भूल गए हैं। सामने वाला दृश्य खराब नहीं है, तुम्हारी आंखें कमजोर हो गई हैं। दृश्य ...
5
6
अगर तुम कोशिश करते हो और फिर भी सफलता नहीं मिलती तो निराश म‍त होओ, बल्कि उस व्यक्ति को याद करो जिसने 21वें वर्ष में ...
6
7
एक बार गौतम बुद्ध को एक जगह प्रवचन देना था। वक्त हो गया, बुद्ध आए और बिना कुछ बोले वहां से चल दिए। वहां पर करीब-करीब ...
7
8

ईश्वर का स्वरूप क्या है?

शुक्रवार,जनवरी 4, 2013
एक महात्मा से किसी ने पूछा- 'ईश्वर का स्वरूप क्या है?' महात्मा ने उसी से पूछ दिया-'तुम अपना स्वरूप जानते हो?'
8
8
9
नववर्ष 2013 का आगाज मंगलवार के दिन हो रहा है। मंगल का अर्थ सर्वत्र शुभकारी है। भारतीय संस्कृति में लोग अंग्रेजी नववर्ष ...
9
10

क्या है जीवन का सार....

गुरुवार,दिसंबर 20, 2012
दुख एक मानसिक कल्पना है। कोई पदार्थ, व्यक्ति या क्रिया दुख नहीं है। संसार के सब नाम-रूप गधा-हाथी, स्त्री-पुरुष, ...
10
11
एक महात्मा अपने शिष्यों के साथ जंगल में आश्रम बनाकर रहते थे और उन्हें योगाभ्यास सिखाते थे। वह सत्संग भी करते थे। एक ...
11
12
गहन वन से तृषार्त पाण्डव गुजर रहे थे। पानी की तलाश में वे इधर-उधर घूम ही रहे थे कि अकस्मात उन्हें एक सरोवर दिखाई दिया। ...
12
13
यह आर्थिक युग है। इसमें पदार्थ की अधिक इच्छा के कारण व्यक्ति अशांत रहता है। अति योगवाद स्वच्छंद और अनियंत्रित भोगवाद के ...
13
14
प्रत्येक देहधारी प्राणी को अपने कर्म तो भोगने ही पड़ते हैं। चाहे वह ज्ञानी हो या मूर्ख। अंतर इतना ही है कि ज्ञानी अपने ...
14
15
अध्यात्म विद्या के विषय में अधिकांश भौतिक विद्वान शिक्षा को ही विद्या मान बैठते हैं। वे विद्या और शिक्षा के अंतर को भी ...
15
16
हर बात सोचने की तो होती है, पर हर बात कहने की नहीं होती। इसलिए व्यवहार को प्रभावी बनाने के लिए शब्दों का चयन हमेशा ...
16
17
समाज को नई दिशा देते क्रांतिकारी संत मुनिश्री तरुण सागर के कड़वे प्रवचन...
17
18
जानिए दिगंबर जैन क्रांतिकारी संत मुनिश्री तरुण सागरजी के कडवे प्रवचन के बारे में जानकारी...
18
19
मुनिश्री तरुण सागर जी के कड़वे प्रवचन - मनुष्य विचारों का जीर्णोद्धार करें! समाज को आज संस्कार, चरित्र से ज्यादा नीति ...
19