कबीरदास : भारतीय संस्कृति का वह हीरा, जिसकी चमक शाश्वत है


जगदीश देशमुख 
आज महान कवि एवं संत की जयंती है। कबीर भारतीय मनीषा के प्रथम विद्रोही संत हैं, उनका विद्रोह अंधविश्वास और अंधश्रद्धा के विरोध में सदैव मुखर रहा है।
 
महात्मा कबीर के प्राकट्यकाल में समाज ऐसे चौराहे पर खड़ा था, जहां चारों ओर धार्मिक पाखंड, जात-पात, छुआछूत, अंधश्रद्धा से भरे कर्मकांड, मौलवी, मुल्ला तथा पंडित-पुरोहितों का ढोंग और सांप्रदायिक उन्माद चरम पर था। आम जनता धर्म के नाम पर दिग्भ्रमित थी।
 
मध्यकाल जो कबीर की चेतना का प्राकट्यकाल है, पूरी तरह सभी प्रकार की संकीर्णताओं से आक्रांत था। धर्म के स्वच्छ और निर्मल आकाश में ढोंग-पाखंड, हिंसा तथा अधर्म व अन्याय के बादल छाए हुए थे। उसी काल में अंधविश्वास तथा अंधश्रद्धा के कुहासों को चीर कर कबीर रूपी दहकते सूर्य का प्राकट्य भारतीय क्षितिज में हुआ।
 
वैसे के कोई जीवन वृत्तांत का पता नहीं चलता परंतु, विभिन्न साक्ष्यों के आधार पर साहेब का जन्म विक्रम संवत 1455 तथा मृत्यु विक्रम संवत 1575 माना जाता है। जिस तरह माता सीता के जन्म का पता नहीं चलता, उसी तरह कबीर के जन्म का भी रहस्य आज भी भारतीय लोकमानस में जीवंत है।
 
कबीर बीच बाजार और चौराहे के संत हैं। वे आम जनता से अपनी बात पूरे आवेग और प्रखरता के साथ किया करते हैं, इसलिए कबीर परमात्मा को देखकर बोलते हैं और आज समाज के जिस युग में हम जी रहे हैं, वहां जातिवाद की कुत्सित राजनीति, धार्मिक पाखंड का बोलबाला, सांप्रदायिकता की आग में झुलसता जनमानस और आतंकवाद का नग्न तांडव, तंत्र-मंत्र का मिथ्या भ्रम-जाल से समाज और राष्ट्र आज भी उबर नहीं पाया है।
 
छह सौ वर्षों के सुदीर्घ प्राकट्यकाल के बाद भी कबीर हमारे वैयक्तिक एवं सामाजिक जीवन के लिए बेहद प्रासंगिक एवं समीचीन लगते हैं। वे हमारे लोकजीवन के इर्द-गिर्द घूमते नजर आते हैं। साहेब की बीजक वाणी में हिन्दू और मुस्लिम के साथ-साथ ब्रह्मांड के सभी लोगों को एक ही धरती पर प्रेमपूर्वक आदमी की तरह रहने की हिदायत देते हैं।
 
वे कहते हैं : 'वो ही मोहम्मद, वो ही महादेव, ब्रह्मा आदम कहिए, को हिन्दू, को तुरूक कहाए, एक जिमि पर रहिए।' कबीर मानवीय समाज के इतने बेबाक, साफ-सुथरे निश्छल मन के भक्त कवि हैं जो समाज को स्वर्ग और नर्क के मिथ्या भ्रम से बाहर निकालते हैं।
 
वे काजी, मुल्ला और पंडितों को साफ लफ्जों में दुत्कारते हैं- 'काजी तुम कौन कितेब बखानी, झंखत बकत रहहु निशि बासर, मति एकऊ नहीं जानी/दिल में खोजी देखि खोजा दे/ बिहिस्त कहां से आया?' कबीर ने घट-घट वासी चेतन तत्व को राम के रूप में स्वीकार किया है। उन्होंने राम को जीवन आश्रय माना है, इसीलिए कबीर के बीजक में चेतन राम की एक सौ सत्तर बार अभिव्यंजना हुई है।
 
कबीर आज भी दहकते अंगारे हैं। कानन-कुसुम भी हैं कबीर जिनकी भीनी-भीनी गंध और सुवास नैसर्गिक रूप से मानवीय अरण्य को सुवासित कर रही है। हिमालय से उतरी हुई गंगा की पावनता भी है कबीर। कबीर भारतीय मनीषा के भूगर्भ के फौलाद हैं जिसके चोट से ढोंग, पाखंड और धर्मांधता चूर-चूर हो जाती है। कबीर भारतीय संस्कृति का वह हीरा है जिसकी चमक नित नूतन और शाश्वत है।

वेबदुनिया हिंदी मोबाइल ऐप अब iOS पर भी, डाउनलोड के लिए क्लिक करें। एंड्रॉयड मोबाइल ऐप डाउनलोड करने के लिए क्लिक करें। ख़बरें पढ़ने और राय देने के लिए हमारे फेसबुक पन्ने और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं।

और भी पढ़ें :

दुर्घटनाएं अमावस्या और पूर्णिमा पर ही क्यों होती है? आइए ...

दुर्घटनाएं अमावस्या और पूर्णिमा पर ही क्यों होती है? आइए जानते हैं यह रहस्य-
पूर्णिमा के दिन मोहक दिखने वाला और अमावस्या पर रात में छुप जाने वाला चांद अनिष्टकारी होता ...

सूर्य-चन्द्र ग्रहण से कैसे जानें शकुन-अपशकुन, पढ़ें 9 काम ...

सूर्य-चन्द्र ग्रहण से कैसे जानें शकुन-अपशकुन, पढ़ें 9 काम की बातें...
अथर्ववेद में सूर्य ग्रहण तथा चन्द्र ग्रहण को अशुभ तथा दुर्निमित कहा गया है। यहां पाठकों ...

कुरुक्षेत्र के युद्ध में कौन किस योद्धा का वध करता है,

कुरुक्षेत्र के युद्ध में कौन किस योद्धा का वध करता है, जानिए
महाभारत का युद्ध 18 दिनों तक चला और लगभग 45 लाख सैनिक और योद्‍धाओं में हजारों सैनिक लापता ...

जया-पार्वती व्रत 25 जुलाई को, जानिए पूजन विधि और पौराणिक ...

जया-पार्वती व्रत 25 जुलाई को, जानिए पूजन विधि और पौराणिक व्रत कथा
जया-पार्वती व्रत अथवा विजया-पार्वती व्रत सौभाग्य सुंदरी व्रत की तरह है। इस व्रत से माता ...

प्राचीनकाल के नायक और नायिकाओं की जाति का रहस्य जानिए

प्राचीनकाल के नायक और नायिकाओं की जाति का रहस्य जानिए
अक्सर आपने प्राचीन मंदिरों के बाहर स्तंभों पर देवी, देवता, यक्ष और अप्सराओं की मूर्तियां ...

देवताओं की रात्रि प्रारंभ, क्यों नहीं होते शुभ कार्य कर्क ...

देवताओं की रात्रि प्रारंभ, क्यों नहीं होते शुभ कार्य कर्क संक्रांति में...
कर्क संक्रांति में नकारात्मक शक्तियां प्रभावी होती हैं और अच्छी और शुभ शक्तियां क्षीण हो ...

सूर्य कर्क संक्रांति आरंभ, क्या सच में सोने चले जाएंगे सारे ...

सूर्य कर्क संक्रांति आरंभ, क्या सच में सोने चले जाएंगे सारे देवता... पढ़ें पौराणिक महत्व और 11 खास बातें
सूर्यदेव ने कर्क राशि में प्रवेश कर लिया है। सूर्य के कर्क में प्रवेश करने के कारण ही इसे ...

यदि आप निरोग रहना चाहते हैं, तो पढ़ें यह चमत्कारिक मंत्र

यदि आप निरोग रहना चाहते हैं, तो पढ़ें यह चमत्कारिक मंत्र
भागदौड़ भरी जिंदगी में आजकल सभी परेशान है, कोई पैसे को लेकर तो कोई सेहत को लेकर। यदि आप ...

ज्योतिष सच या झूठ, जानिए रहस्य

ज्योतिष सच या झूठ, जानिए रहस्य
गीता में लिखा गया है कि ये संसार उल्टा पेड़ है। इसकी जड़ें ऊपर और शाखाएं नीचे हैं। यदि कुछ ...

व्रत कथा : देवशयनी एकादशी की पौराणिक एवं प्रा‍माणिक कहानी ...

व्रत कथा : देवशयनी एकादशी की पौराणिक एवं प्रा‍माणिक कहानी यहां पढ़ें...
धर्मराज युधिष्ठिर ने कहा- हे केशव! आषाढ़ शुक्ल एकादशी का क्या नाम है? इस व्रत के करने की ...

राशिफल