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महान भारतीय कवि और दार्शनिक गोस्वामी तुलसीदास की जयंती

शुक्रवार,अगस्त 17, 2018
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महर्षि अरविन्द आध्यात्मिक क्रां‍ति की पहली चिंगारी थे। वे बंगाल के महान क्रांतिकारियों में से एक थे। उनका जन्म 15 अगस्त ...
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सन् 1925 में अवतार मेहर बाबा ने मात्र 29 वर्ष की अवस्था में 10 जुलाई से मौन प्रारंभ किया था जो सदैव अखंड रहा। इसीलिए 10 ...
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देवर्षि नारद दुनिया के प्रथम पत्रकार या पहले संवाददाता हैं, क्योंकि देवर्षि नारद ने इस लोक से उस लोक में परिक्रमा करते ...
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आचार्य महाश्रमण एक ऐसी आलोकधर्मी परंपरा का विस्तार है, जिस परंपरा को महावीर, बुद्ध, गांधी, आचार्य भिक्षु, आचार्य तुलसी ...
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सत्य साईं बाबा आध्यात्मिक गुरु व प्रेरक व्यक्तित्व थे, जिनके संदेश और आशीर्वाद ने पूरी दुनिया के लाखों लोगों को सही ...
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श्री रामानुजाचार्य का जन्म सन् 1017 में श्री पेरामबुदुर (तमिलनाडु) के एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम ...
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भगवान परशुराम का प्रादुर्भाव वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को हुआ, इसलिए उक्त तिथि अक्षय तृतीया कहलाती है। भगवान ...
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भक्तमाल के सुप्रसिद्ध टीकाकार प्रियदास के अनुसार संत शिरोमणि सेन महाराज का जन्म विक्रम संवत 1557 में वैशाख कृष्ण-12 ...
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कृष्ण भक्त और पुष्टिमार्ग के प्रवर्तक वल्लाभाचार्य की जयंती वैशाख कृष्ण एकादशी के दिन मनाई जाती है। वैशाख कृष्ण एकादशी ...
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राष्ट्रसंत गाडगे बाबा का कहते थे कि मनुष्य को चाहिए कि वह हर जीव के अंदर के भगवान को पहचाने और उसकी तन-मन-धन से सेवा ...
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शिरडी सांईं बाबा, साई बाबा, कोलंबा, भिक्षा पात्र, पांच घर, सखाराम पाटील शैलके, वामनराव गोंदकर, बय्याजी अप्‍पा कोते ...
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समर्थगुरु श्री रामदास स्वामी का जन्म औरंगाबाद जिले के जांब नामक स्थान पर हुआ। वे बचपन में बहुत शरारती थे। गांव के लोग ...
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संत कुलभूषण कवि संत शिरोमणि रविदास (रैदास) का जन्म काशी में हुआ था। उनकी माता का नाम कर्मा देवी तथा पिता का नाम संतोख ...
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महर्षि महेश योगी का जन्म 12 जनवरी 1918 को छत्तीसगढ़ के राजिम शहर के पास ही स्थित पांडुका गांव में हुआ। उनके पिता का नाम ...
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आदि जगदगुरु स्वामी रामानंदाचार्य का जन्म माघ माह की सप्तमी को कान्यकुब्ज ब्राह्मण के कुल में हुआ था। उनके पिता का नाम ...
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गुरु गोकुलदास महाराज का जन्म 6 जनवरी 1907 को उत्तरप्रदेश के बेलाताल गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम करणदास तथा माता ...
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एक लकड़ी, फटी-पुरानी चादर और मिट्टी का एक बर्तन जो खाने-पीने और कीर्तन के समय ढपली का काम करता था, यही संत गाडगे बाबा की ...
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शंकराचार्य का जन्म केरल के मालाबार क्षेत्र के कालड़ी नामक स्थान पर नम्बूद्री ब्राह्मण के यहां हुआ। मात्र 32 वर्ष की ...
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दादाजी धूनीवाले का अपने भक्तों के बीच वही स्थान है जैसा कि शिर्डी के सांईबाबा का। उनका समाधि स्थल खंडवा शहर में है। ...
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