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भगवान परशुराम का प्राकट्य दिवस, जानिए कैसा था उनका जीवन...

शनिवार,अप्रैल 14, 2018
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भक्तमाल के सुप्रसिद्ध टीकाकार प्रियदास के अनुसार संत शिरोमणि सेन महाराज का जन्म विक्रम संवत 1557 में वैशाख कृष्ण-12 ...
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कृष्ण भक्त और पुष्टिमार्ग के प्रवर्तक वल्लाभाचार्य की जयंती वैशाख कृष्ण एकादशी के दिन मनाई जाती है। वैशाख कृष्ण एकादशी ...
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राष्ट्रसंत गाडगे बाबा का कहते थे कि मनुष्य को चाहिए कि वह हर जीव के अंदर के भगवान को पहचाने और उसकी तन-मन-धन से सेवा ...
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शिरडी सांईं बाबा, साई बाबा, कोलंबा, भिक्षा पात्र, पांच घर, सखाराम पाटील शैलके, वामनराव गोंदकर, बय्याजी अप्‍पा कोते ...
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समर्थगुरु श्री रामदास स्वामी का जन्म औरंगाबाद जिले के जांब नामक स्थान पर हुआ। वे बचपन में बहुत शरारती थे। गांव के लोग ...
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संत कुलभूषण कवि संत शिरोमणि रविदास (रैदास) का जन्म काशी में हुआ था। उनकी माता का नाम कर्मा देवी तथा पिता का नाम संतोख ...
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महर्षि महेश योगी का जन्म 12 जनवरी 1918 को छत्तीसगढ़ के राजिम शहर के पास ही स्थित पांडुका गांव में हुआ। उनके पिता का नाम ...
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आदि जगदगुरु स्वामी रामानंदाचार्य का जन्म माघ माह की सप्तमी को कान्यकुब्ज ब्राह्मण के कुल में हुआ था। उनके पिता का नाम ...
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गुरु गोकुलदास महाराज का जन्म 6 जनवरी 1907 को उत्तरप्रदेश के बेलाताल गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम करणदास तथा माता ...
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एक लकड़ी, फटी-पुरानी चादर और मिट्टी का एक बर्तन जो खाने-पीने और कीर्तन के समय ढपली का काम करता था, यही संत गाडगे बाबा की ...
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शंकराचार्य का जन्म केरल के मालाबार क्षेत्र के कालड़ी नामक स्थान पर नम्बूद्री ब्राह्मण के यहां हुआ। मात्र 32 वर्ष की ...
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दादाजी धूनीवाले का अपने भक्तों के बीच वही स्थान है जैसा कि शिर्डी के सांईबाबा का। उनका समाधि स्थल खंडवा शहर में है। ...
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23 नवंबर 1926 को जिस क्षण श्री सत्य साईं ने जन्म लिया, उस समय घर में रखे सभी वाद्ययंत्र स्वत: बजने लगे और एक रहस्यमय ...
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महान संत और ईश्वर के अवतार श्री सांई बाबा की जन्मतिथि, जन्म स्थान और माता-पिता का किसी को भी ज्ञान नहीं है। इस संबंध ...
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संत नामदेवजी का जन्म महाराष्ट्र के जिला सातारा के नरसी बामनी गांव में कार्तिक शुक्ल एकादशी को हुआ था। उनके पिता का नाम ...
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देश भर में महर्षि वाल्मीकि की जयंती को श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है। इस अवसर पर शोभायात्राओं का आयोजन भी होता ...
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तुलसी और 'श्री रामचरित मानस' एक-दूसरे के पर्याय लगते हैं। तुलसी का मानस केवल राम के चरित्र का ही वर्णन नहीं है, अपितु ...
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भारतीय संस्कृति में गुरु का बहुत महत्व है। महर्षि वेद व्यास चारों वेदों के प्रथम व्याख्याता थे जिन्होंने हमें वेदों का ...
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साधू भूखा भाव का, धन का भूख नाहिं। धन का भूखा जो फिरै, सो तो साधु नाहिं।।
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