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शहीद भगत सिंह से जुड़ा एक मार्मिक संस्मरण : उस दिन लाहौर की जनता सड़क पर उतर आई थी

बुधवार,सितम्बर 26, 2018
Shaheed Bhagat Singh
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मैं अटल तो हूं पर 'बिहारी' नहीं हूं। तब लोगों ने इसे अजीब ढंग से लिया था। लोगों को लगा कि वे 'बिहार' का अपमान कर रहे ...
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नीरज ने जिस कोमलता और रोमांस को फूलों के शबाब की तरह घोला, दिल की कलम से दर्शकों को जो इतनी नाजुक पाती लिखी वह कई कई ...
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शानदार मोबाइल, टेबल पर कम्प्यूटर, गोदी में लैपटॉप, चांदी-सी चमकती रेशमी सड़कों पर चमचमाती हुईं कारें, आधुनिक सुविधाओं से ...
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अकविता की कठिन अराजकता से मोहमुक्त होकर समकालीन हिन्दी कविता में अपनी बेहद खास पहचान बनाने वाले धूमिल और जगूड़ी के ...
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चंद्रकांत देवताले, क्या यह सिर्फ एक नाम था किसी वरिष्ठतम कवि का ....इस नाम के साथ उभरती है एक निहायत ही मासूम से ...
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बात उन दिनों की है जब मेरे पापा, ऑडिनेंस फैक्ट्री, कानपुर में कार्यरत थे। फैक्ट्री के ही कैंपस में हमें बड़ा-सा घर मिल ...
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कुमार गंधर्व जी की 'उड़ जाएगा हंस अकेला... बोर चेता.. झीनी-झीनी चदरिया... सुनता है गुरु ज्ञानी... रचनाएं ऐसी है जो बरबस ...
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मेरे ख्याल से साहस का कोई काम केवल शारीरिक क्षमता से ही ताल्लुक नहीं रखता, बल्कि मानसिक शक्ति से किसी को उज्जवल भविष्य ...
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गर्मी के दिनों में छत पर सोया था। सपने में देखा की गर्मियों की छुट्टियों में श्यामलाल के यहां उनकी साली आई। श्यामलाल की ...
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हम लोग लखनऊ से देहरादून वापस जा रहे थे। परिस्थिति कुछ ऐसी बनी कि मेरे और पतिदेव के कोच अलग-अलग हो गए। पति का कोच आगे और ...
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बंगाल की हमारी बहुत प्रिय लेखिका और कार्यकर्ता महाश्वेता दी ने सदियों से पीड़ित जनजातियों के लिए अपना सारा जीवन और लेखन ...
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वे साधारण परिवार में जन्मे, साधारण से प्राइमरी स्कूल में पढ़े और साधारण से प्राइमरी स्कूल टीचर के बच्चे हैं। उनके पिता ...
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पंडित देवधर की सुयोग्य शिष्या और बेटी वसुंधरा ताई ग्वालियर से देवास आने के बाद मालवा में ऐसी रच-बस गई कि यहां के लोग ...
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23 अप्रैल 2003 की सुबह राष्ट्रपति भवन से एक फोन आया। दूरभाष के दूसरी तरफ से आवाज आई, मैं राष्ट्रपति का प्रेस सचिव एमएम ...
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उससे मेरी दोस्ती कब और कैसे हुई, कुछ याद नहीं, और इसकी कोई जरूरत भी नहीं। हां, लेकिन यह कभी नहीं भूला जा सकता कि क्या ...
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भारत के इतिहास में नेताजी सुभाष चंद्र बोस के समान कोई व्यक्तित्व दूसरा नहीं हुआ, जो एक महान सेनापति, वीर सैनिक, राजनीति ...
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श्रीराम ताम्रकर सर नहीं रहे लिखते हुए ना सिर्फ लेखनी बल्कि मैं पूरी कांप रही हूं। लग रहा है जैसे सघन छांव का वटवृक्ष ...
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राष्ट्रपति राजेंद्र बाबू अत्यंत सौम्य और गंभीर प्रकृति के व्यक्ति थे। सभी वर्ग और बाद के व्यक्ति उन्हें सम्मान देते थे। ...
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बचपन को याद करना और उसे किसी खास संदर्भ में याद करना एक बहुत मुश्किल काम होता है। यादें व्यवस्थित नहीं होती हैं इसलिए ...
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