ईसा मसीह के बैपटिज्म का शहर- अम्मान

Author अनवर जमाल अशरफ|
की लगभग 98 फीसदी आबादी मुसलिम है लेकिन का बैपटिज्म यानी बपतिस्मा इसकी राजधानी के पास हुआ था। बैपटिज्म ईसा के जीवन के पांच अहम पड़ावों में गिना जाता है। इसके अलावा उनका रूप परिवर्तन, सलीब पर चढ़ाया जाना, पुनर्जीवन और आकाश यात्रा दूसरे चार पड़ाव हैं। बैपटिज्म की वजह से अम्मान ईसाई धर्म के लोगों के लिए पवित्र और तीर्थ का शहर बन गया है।
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बैपटिज्म साइट मृत सागर के करीब और जॉर्डन नदी के किनारे स्थित है। कुछ इतिहासकार बैपटिज्म साइट को इस जगह से दूर मौजूदा फलीस्तीन के पास बताते थे। लेकिन खनन में पुरानी इमारतों के मिलने और दूसरे तथ्यों के आधार पर तय हो गया है कि ईसा मसीह का बपतिस्मा अम्मान में ही हुआ था।
 
पोप जॉन पॉल द्वितीय साल 2000 में जब इस जगह पहुंचे, तो उन्होंने कहा, 'मुझे लग रहा है कि ईसा मसीह जब जॉर्डन नदी के किनारे पहुंचे, तो वह इस जगह से ज्यादा दूर नहीं था और यहीं जॉन द बैपटिस्ट ने उनका बैपटिज्म किया।' ईसाई धर्म के मानने वाले आज भी बच्चों का बैपटिज्म कराते हैं।
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पोप जॉन पॉल की मुहर के बाद इस जगह की अहमियत बढ़ती चली गई और अब यह यूनेस्को के विश्व धरोहरों में शामिल हो गया है। पड़ोसी देश इराक से ईसाइयों की एक टोली जब इस जगह पहुंची, तो वे अपनी खुशी रोक नहीं पाए। इसमें शामिल एंटोनियो एहुद ने बताया कि उनके देश में 'ईसाइयों के लिए हालात खराब हो गए हैं पर यहां पहुंच कर काफी संतुष्टि मिल रही है।'
 
लंदन के जेफ्री प्राइस लगभग हर साल इस जगह आते हैं, 'मेरा मानना है कि चूंकि इस जगह पर ईसा मसीह का बैपटिज्म हुआ था, यहां एक तरह की पवित्रता महसूस की जा सकती है। मैं यह भी मानता हूं कि इस जगह के पानी में अलग शक्ति है, जो हमारी आत्मा को साफ करती है।'
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दस लाख से भी कम आबादी वाले जॉर्डन में ज्यादातर लोग राजधानी अम्मान और इसके आस पास रहते हैं। देश की सीमा इराक, सीरिया, सऊदी अरब, इसराइल और फिलीस्तीन से मिलती है। ये सारे देश संकटग्रस्त देश हैं, जबकि जॉर्डन अपेक्षाकृत सुरक्षित है। सुरक्षित होने की वजह से यह शरणार्थियों की पनाहगाह भी बन गया है। अनुमान है कि देश की एक तिहाई आबादी शरणार्थियों की है, जिनमें फलीस्तीन और सीरिया से आए लोग सबसे ज्यादा हैं।

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