स्वाधीनता दिवस पर आत्मावलोकन आवश्यक

सोमवार,अगस्त 14, 2017
स्वतंत्रता के परिप्रेक्ष्य में जब भी बात उठती है, सबसे पहले हमारे जेहन में देश की आजादी का ख्याल आता है। स्वाभाविक भी ...
आजाद भारत के 70 वर्ष बीत गए हैं, 71वें वर्ष में हम प्रवेश करेंगे। क्या कहते हैं आज के भारत के सितारे। रात्रि को जब 12 ...
आज भी भारत की पवित्र भूमि ऐसे वीर-वीरांगनाओं की कहानियों से भरी पड़ी है जिन्होंने 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से ...
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इस साल 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस और श्रीकृष्ण जन्माष्टमी दोनों साथ-साथ पड़े हैं। दोनों पर्वों का अपना-अपना महत्व है। ...
आपसी कलह के कारण से। वर्षों पहले परतंत्र हुआ।। पन्द्रह अगस्त सन् सैंतालीस। को अपना देश स्वतंत्र हुआ।। उन वीरों को हम ...
आज का दिन! हिन्द के इतिहास का सबसे सुनहरा दिवस प्यारा! आज का दिन! देश मेरा! जो धरा पर था प्रखर मार्तण्ड सा। पर ग्रसित ...
'दिल्ली चलो।' यह समाचार जिसने सुना, वह चल पड़ा था। पंजाब राज्य ने पूछा- आप कौन? तमिलनाडु ने जवाब दिया- मुझे तमिलनाडु ...
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जन्म तो 'पाकिस्तान' का हुआ था ना कि भारत का, भारत का तो विभाजन हुआ था। विभाजन के आधार पर यदि भारत का जन्म माने तो भारत ...
नई शती है, खड़ी प्रगति के, द्वार यहां पर खोले। देख-देख, भारत की ताकत, सबकी हिम्मत डोले। पुनर्प्रतिस्थापन का देखें, समय ...
हे ध्वजा! राष्ट्र की, नील-गगन पर फहरो, उन्मुक्त पवन में, लहर-लहर तुम लहरो। तेरा केशरिया रंग, वीर का बाना, सीखा है ...

ओ सरहदों के निगहबानों...

सोमवार,अगस्त 14, 2017
ओ सरहदों के निगहबानों, तुमको मेरा नमन, तुम्हारे दम पर ही तो है रोशन ये सारा चमन। इस देश के जन-जन को तुम पर नाज है, ...
मैं करूं वंदना भारत मां... कल-कल झरने, शीतल जल के, वन-उपवन, फल से लदे हुए, है मलय गंध-युत, शीत पवन, श्यामल-श्यामल, धरती ...
भारत हमको जान से प्यारा है, ये तो सारे जहां से न्यारा है। सर हिमालय है इसका, कश्मीर इसका ताज है। लहराता है तिरंगा शान ...
हे जन्म-भूमि मेरी, तुझको मेरा नमन है। दुनिया से खूबसूरत‍, मेरा यही चमन है। सागर जिन्हें पखारें, तेरे युगल चरण हैं।
( ये गीत आजादी की लड़ाई के दौरान आजादी के उन परवानों के द्वारा लिखे गए थे, जिन्‍हें आज कोई नहीं जानता। ब्रिटिश हुकूमत ...
प्रस्तावना - सदियों की गुलामी के पश्चात 15 अगस्त सन् 1947 के दिन आजाद हुआ। पहले हम अंग्रेजों के गुलाम थे। उनके बढ़ते ...
कई सरहदें बनीं लोग बंटते गए, हम अपनों ही अपनों से कटते गए। उस तरफ कुछ हिस्से थे मेरे मगर, कुछ अजनबी से वो सिमटते गए।
स्वतंत्रता के बाद से ही महिलाओं का विकास हमारी आयोजना का केंद्रीय विषय रहा है, परंतु पिछले 20 वर्षों में कई नीतिगत ...