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आदर्श वीरांगना झांसी की रानी लक्ष्मीबाई पर हिन्दी निबंध...

शनिवार,नवंबर 18, 2017
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स्वाधीनता दिवस एक बार फिर आत्मावलोकन का अवसर लेकर उपस्थित हुआ है। इसमें संदेह नहीं कि देश ने विगत सात दशकों में ...
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स्वाधीनता दिवस एक बार फिर आत्मावलोकन का अवसर लेकर उपस्थित हुआ है। इसमें संदेह नहीं कि देश ने गत 7 दशकों में ...
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स्वतंत्रता के परिप्रेक्ष्य में जब भी बात उठती है, सबसे पहले हमारे जेहन में देश की आजादी का ख्याल आता है। स्वाभाविक भी ...
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आजाद भारत के 70 वर्ष बीत गए हैं, 71वें वर्ष में हम प्रवेश करेंगे। क्या कहते हैं आज के भारत के सितारे। रात्रि को जब 12 ...
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आज भी भारत की पवित्र भूमि ऐसे वीर-वीरांगनाओं की कहानियों से भरी पड़ी है जिन्होंने 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से ...
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इस साल 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस और श्रीकृष्ण जन्माष्टमी दोनों साथ-साथ पड़े हैं। दोनों पर्वों का अपना-अपना महत्व है। ...
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आपसी कलह के कारण से। वर्षों पहले परतंत्र हुआ।। पन्द्रह अगस्त सन् सैंतालीस। को अपना देश स्वतंत्र हुआ।। उन वीरों को हम ...
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आज का दिन! हिन्द के इतिहास का सबसे सुनहरा दिवस प्यारा! आज का दिन! देश मेरा! जो धरा पर था प्रखर मार्तण्ड सा। पर ग्रसित ...
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'दिल्ली चलो।' यह समाचार जिसने सुना, वह चल पड़ा था। पंजाब राज्य ने पूछा- आप कौन? तमिलनाडु ने जवाब दिया- मुझे तमिलनाडु ...
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जन्म तो 'पाकिस्तान' का हुआ था ना कि भारत का, भारत का तो विभाजन हुआ था। विभाजन के आधार पर यदि भारत का जन्म माने तो भारत ...
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नई शती है, खड़ी प्रगति के, द्वार यहां पर खोले। देख-देख, भारत की ताकत, सबकी हिम्मत डोले। पुनर्प्रतिस्थापन का देखें, समय ...
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हे ध्वजा! राष्ट्र की, नील-गगन पर फहरो, उन्मुक्त पवन में, लहर-लहर तुम लहरो। तेरा केशरिया रंग, वीर का बाना, सीखा है ...
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ओ सरहदों के निगहबानों...

सोमवार,अगस्त 14, 2017
ओ सरहदों के निगहबानों, तुमको मेरा नमन, तुम्हारे दम पर ही तो है रोशन ये सारा चमन। इस देश के जन-जन को तुम पर नाज है, ...
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मैं करूं वंदना भारत मां... कल-कल झरने, शीतल जल के, वन-उपवन, फल से लदे हुए, है मलय गंध-युत, शीत पवन, श्यामल-श्यामल, धरती ...
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भारत हमको जान से प्यारा है, ये तो सारे जहां से न्यारा है। सर हिमालय है इसका, कश्मीर इसका ताज है। लहराता है तिरंगा शान ...
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हे जन्म-भूमि मेरी, तुझको मेरा नमन है। दुनिया से खूबसूरत‍, मेरा यही चमन है। सागर जिन्हें पखारें, तेरे युगल चरण हैं।
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( ये गीत आजादी की लड़ाई के दौरान आजादी के उन परवानों के द्वारा लिखे गए थे, जिन्‍हें आज कोई नहीं जानता। ब्रिटिश हुकूमत ...
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प्रस्तावना - सदियों की गुलामी के पश्चात 15 अगस्त सन् 1947 के दिन आजाद हुआ। पहले हम अंग्रेजों के गुलाम थे। उनके बढ़ते ...
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कई सरहदें बनीं लोग बंटते गए, हम अपनों ही अपनों से कटते गए। उस तरफ कुछ हिस्से थे मेरे मगर, कुछ अजनबी से वो सिमटते गए।
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