#अधूरीआजादी : 1947 के पहले भी होता रहा है भारत का विभाजन

अनिरुद्ध जोशी 'शतायु'|
#अधूरी आजादी @कॉपीराइट
सन् 1947 में भारत का विभाजन जो हुआ उसे 'स्वतंत्रता दिवस' कहना थोड़ा अटपटा ही लगता है। ढूंढना चाहिए कि यह कौन से नंबर का विभाजन था। 24वां या 25वां विभाजन? दरअसल अंग्रेजों, फ्रांसीसियों, पुर्तगालियों और मुगलों द्वारा इससे पहले किए गए 'भारत विभाजन' को लोग भूलते गए। 1947 के पहले किए गए विभाजन के कई कारणों में से एक कारण यह रहा कि अंग्रेज नहीं चाहते थे कि स्वतंत्रता संग्राम में भारतीयों की जनशक्ति बढ़े। इस संग्राम से उन्होंने भारत के कई बड़े भू-भाग को काट दिया।
की पुस्तकों में दर्ज है कि पिछले 2,500 वर्षों में भारत पर यूनानी, यवन, हूण, शक, कुषाण, सिरयन, पुर्तगाली, फ्रेंच, डच, अरब, तुर्क, तातार, मुगल और अंग्रेजों ने आक्रमण किए हैं। कहीं पर भी यह दर्ज नहीं है कि अफगानिस्तान, पाकिस्तान, म्यांमार, श्रीलंका, नेपाल, तिब्बत, भूटान, पाकिस्तान, मालदीव या बांग्लादेश पर आक्रमण किया। 'के जनपदों या रियासतों पर आक्रमण किया गया' ऐसा लिखा दर्ज है। 1857 के पहले भारत का क्षेत्रफल 83 लाख वर्ग किमी था। वर्तमान भारत का क्षेत्रफल लगभग 33 लाख वर्ग किमी से थोड़ा ही कम है। पड़ोसी 9 देशों का क्षेत्रफल 50 लाख वर्ग किमी बनता है।
किसे कहते हैं अखंड भारत?
आज जिसे हम कहते हैं वह पहले कभी नाभि खंड, फिर अजनाभखंड और बाद में भारतवर्ष कहा जाने लगा। यह क्षेत्र 16 महाजनपदों में बंटा हुआ था। हालांकि सभी क्षेत्रों के राजा अलग-अलग होते थे लेकिन कहलाते सभी भारतवर्ष के महाजनपद थे। आज इस संपूर्ण क्षेत्र को अखंड भारत इसलिए कहा जाता है, क्योंकि अब यह खंड-खंड हो गया है।
कैसे बना भारत?
प्राचीनकाल में संपूर्ण धरती को आर्यों ने 7 द्वीपों में बांट रखा था। यथाक्रम- जम्बू, प्लक्ष, शाल्मली, कुश, क्रौंच, शाक एवं पुष्कर। इसमें से जम्बूद्वीप सभी के बीचोबीच स्थित है। अनुमानित रूप से लगभग 9057 ईसा पूर्व जम्बूद्वीप के प्रथम राजा प्रथम स्वायंभुव मनु थे। बाद में उनके पुत्र राजा प्रियवृत इसके शासक बने। राजा प्रियवृत के बाद अग्नीन्ध्र ने शासन भार संभाला। अग्नीन्ध्र ने जम्बूद्वीप को 9 खंडों में बांटकर अपने अलग-अलग पुत्रों को इन 9 खंडों का राजा बना दिया। ये 9 खंड हैं- इलावृत, भद्राश्व, किंपुरुष, नाभि, हरि, केतुमाल, रम्यक, कुरु और हिरण्यमय। ये सभी खंड उनके पुत्रों के नाम पर ही आधारित थे।
अग्नीन्ध्र ने अपने पुत्र नाभि को जो स्थान दिया था उसे नाभि खंड कहा गया। नाभि की एक पत्नी मेरू देवी से जो पुत्र पैदा हुआ उसका नाम ऋषभ था। ऋषभ के पुत्र भरत और बाहुबली थे। उन्होंने भरत को राज्य सौंप दिया तब इस नाभि खंड का नाम भरत के नाम पर भारतवर्ष पड़ा, क्योंकि महान चक्रवर्ती सम्राट भरत ने ही इस संपूर्ण नाभि खंड को एकछत्र शासन देकर न्याय, धर्म और राजनीतिक व्यवस्था की स्थापना की थी। भरत ने नाभि खंड के संपूर्ण महाजनपदों को अपने अधीन रखकर शासन किया था। चक्रवर्ती सम्राट भरत के बाद कालांतर में भारतवर्ष के सबसे बड़े शासक हुए वैवस्वत मनु। वैवस्वत मनु के बाद ययाति और उनके 5 पुत्र यदु, कुरु, पुरु, द्रुहु और अनु ने शासन किया। फिर राजा हरिशचन्द्र, राजा रामचन्द्र, राजा सुदास, संवरण पुत्र कुरु, राजा दुष्यंत और शकुंतला के पुत्र भरत, राजा युधिष्ठिर, महापद्म, सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य, सम्राट अशोक, सम्राट विक्रमादित्य, चन्द्रगुप्त द्वितीय, राजा भोज और हर्षवर्धन ने एकछत्र राज किया। ये सभी चक्रवर्ती कहलाए। हर्षवर्धन के बाद भारत का पतन होने लगा।
प्राचीन भारतवर्ष की सीमा :
पुराणों के अनुसार समुद्र के उत्तर तथा हिमालय के दक्षिण में भारतवर्ष स्थित है। इसका विस्तार 9 हजार योजन है। इसमें कुल 7 पर्वत हैं- महेन्द्र, मलय, सह्य, शुक्तिमान, ऋक्ष, विंध्य और पारियात्र। इसमें चतुर्दिक लवण सागर स्थित है। संपूर्ण भारत के मुख्यत: 9 खंड हैं- इन्द्रद्वीप, कसेरु, ताम्रपर्ण, गभस्तिमान, नागद्वीप, सौम्य, गन्धर्व और वारुण तथा यह मलय समुद्र से घिरा हुआ द्वीप उनमें नौवां है।
इस संपूर्ण भारत में कुभा (काबुल नदी), क्रुगु (कुर्रम), सिन्धु, सरस्वती, शुतुद्री (सतलज), वितस्ता (झेलम), चन्द्रभागा, वेद, स्मृति, नर्मदा, सुरसा, तापी, परुष्णी (रावी), निर्विन्ध्या, गोमती (गोमल), गोदावरी, भीमरथी, गंगा, यमुना, कृष्णवेणी, कृतमाला, ताम्रपर्णी, त्रिसामा, आर्यकुल्या, ऋषिकुल्या, कुमारी, ब्रह्मपुत्र, कावेरी आदि नदियां जिनकी सहस्रों शाखाएं और उपनदियां हैं।

वर्तमान संदर्भ के अनुसार इसकी सीमाएं हिन्दूकुश पर्वतमाला (ईरान के कुछ हिस्से और संपूर्ण अफगानिस्तान) से लेकर अरुणाचल और कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक फैली हैं तो दूसरी ओर अरुणाचल से लेकर इंडोनेशिया तक और पश्चिम में हिन्दूकुश से लेकर अरब की खाड़ी तक फैली है जिसके अंतर्गत ईरान के कुछ हिस्से, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, हिन्दुस्थान, बांग्लादेश, नेपाल, तिब्बत, भूटान, म्यांमार, श्रीलंका, मालद्वीप, थाईलैंड, मलेशिया, इंडोनेशिया, कंबोडिया, वियतनाम, लाओस तक आते हैं। हालांकि यह शोध का विषय हो सकता है कि कौन से हिस्से नहीं आते हैं।

महाजनपदों में बंटा भारत :
प्राचीनकाल में संपूर्ण भारत महाजनपदों में बंटा हुआ था। प्रत्येक महाजनपद के अंतर्गत जनपद और उप-जनपद होते थे। ये महाजनपद आपस में अपने वर्चस्व की लड़ाई लड़ते रहते थे। जिस भी राजा का संपूर्ण भारत पर एकछत्र राज हो जाता था उसे चक्रवर्ती सम्राट मान लिया जाता था। ये जनपद कालांतर में छोटे-बड़े होते रहे लेकिन सभी मिलकर भारतवर्ष ही कहलाते थे जिनका केंद्र कभी अयोध्या, कभी अवंती, कभी मथुरा, कभी हस्तिनापुर, कभी तक्षशिला तो कभी पाटलीपुत्र रहा।
राम के काल 5114 ईसा पूर्व में 9 प्रमुख महाजनपद थे जिसके अंतर्गत उप-जनपद होते थे। ये 9 इस प्रकार हैं- 1. मगध, 2. अंग (बिहार), 3. अवंती (उज्जैन), 4. अनूप (नर्मदा तट पर माहिष्मती), 5. सूरसेन (मथुरा), 6. धनीप (राजस्थान), 7. पांडय (तमिल), 8. विंध्य (मध्यप्रदेश) और 9. मलय (मलाबार)।

महाभारत काल 3112 ईसा पूर्व में 16 प्रमुख महाजनपद होते थे, जो इस प्रकार हैं- 1. कुरु, 2. पंचाल, 3. शूरसेन, 4. वत्स, 5. कोशल, 6. मल्ल, 7. काशी, 8. अंग, 9. मगध, 10. वृज्जि, 11. चे‍दि, 12. मत्स्य, 13. अश्मक, 14. अवंती, 15. गांधार (अफगानिस्तान) और 16. कंबोज (अफगानिस्तान)।
प्राग्ज्योतिष (असम),
कश्मीर, अभिसार (राजौरी), दार्द (अफगानिस्तान), हूण हुंजा, अम्बिस्ट आम्ब, पख्तू (पाकिस्तान), कैकेय (पाकिस्तान), गंधार, कम्बोज (अफगानिस्तान), वाल्हीक बलख, शिवि शिवस्थान-सीस्टान-सारा बलूच क्षेत्र (पाकिस्तान), सिन्ध (पाकिस्तान), सौवीर सौराष्ट्र समेत सिन्ध का निचला क्षेत्र दंडक महाराष्ट्र सुरभिपट्टन मैसूर, चोल, आंध्र, कलिंग तथा सिंहल सहित लगभग 200 जनपद महाभारत में वर्णित हैं, जो कि भारतवर्ष के जनपद कहलाते थे।
* अब सवाल यह उठता है कि एक धर्म और संस्कृति को मानने वाला यह संपूर्ण भरतखंड कैसे और कब खंड-खंड हो गया? तो आओ जानते हैं इसके बारे में विस्तार से....अगले पन्ने पर जारी...


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