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#MeToo पर लघुकथा : सीढ़ियां

शुक्रवार,अक्टूबर 12, 2018
MeToo
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मैं वह भाषा हूं, जिसमें तुम जीवन साज पे संगत देते मैं वह भाषा हूं, जिसमें तुम, भाव नदी का अमृत पीते मैं वह भाषा ...
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शिक्षक रामप्रसाद के हाथों में रवि की शादी का आमंत्रण था। रवि, रामप्रसाद का होनहार छात्र था, जो अब पढ़-लिखकर एक ...
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अनिकेतजी रोज की तरह सुबह की सैर से लौटे। अखबार को गेट से निकाला व तारीख पर नजर पड़ते ही आंखों में जो नमी उतरी, उसने हर ...
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लघुकथा : दशा

शुक्रवार,अगस्त 3, 2018
वह आनंदित मन से मोटर साइकिल चलाता हुआ जा रहा था कि ठीक आगे चल रही सिटी बस से धुंआ निकला और उसके चेहरे से टकराया
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आज न सुबह उठते ही स्नेहल के लिए टिफिन बनाने की जल्दी है, न ही सलिल को नाश्ता दे उनका टिफिन भेजना है, न ही सब कुछ ...
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’मां, पता है आज मैंने आपके जैसा हलवा बनाना सीख लिया।’ बेटे ने चम्मच भर गरमागरम हलवा मुंह में डालते हुए कहा।
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विमल बहुत परेशान था। उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वो इस परिस्थिति से कैसे निबटे। वो अपनी मां को बहुत चाहता था किंतु ...
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एक दिन हरे और भगवे रंग में विवाद छिड़ गया। हरा रंग गुर्राकर बोला-
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वृद्धाश्रम के दरवाजे से बाहर निकलते ही उसे किसी कमी का अहसास हुआ, उसने दोनों हाथों से अपने चेहरे को टटोला और फिर पीछे ...
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तोता और मैना अपनी मधुर प्रेमवार्ता में तल्लीन थे। मैना मान भरे स्वर में बोली-"देखो,शादी के बाद मुझे एक बड़ाssssssssss सा ...
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पृथ्वी पर जब जीवन-क्रम आरम्भ हुआ,तब उसका समीकरण था-प्रकृति+मनुष्य=जीवन।
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आखिर बहू ने शांत स्वर में कह ही दिया-"मां ,मैं बुखार में तप रही हूं। चक्कर आ रहे हैं। मीनाक्षी दीदी कोई मेहमान तो नहीं। ...
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मुख्य मार्ग पर काफी भीड़ जमा थी। शायद कोई दुर्घटना हो गई थी। सामने से इस ओर ही आ रही कार में बैठे पिता-पुत्री ने यह ...
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लघुकथा : धर्मात्मा?

शुक्रवार,अप्रैल 27, 2018
वे नगरसेठों में गिने जाते थे। दान-पुण्य करने में नगर के शीर्षस्थ व्यक्ति। एक दिन वे अपनी नई चमचमाती कार में बैठकर मंदिर ...
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एक राजनेता की किसी समारोह के दौरान चप्पलें गुम हो जाने की वजह से समारोह-स्थल से अपनी कार तक के मात्र दस कदम के फासले को ...
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लघुकथा : इंटरव्यू

शुक्रवार,अप्रैल 20, 2018
इंटरव्यू वाले दिन उसने पड़ोस के धोबी से अनुनय-विनय कर एक अच्छा शर्ट मांगकर पहना और जूते दोस्त से उधार लिए।
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लघुकथा : धरती मां

शुक्रवार,अप्रैल 20, 2018
एक दिन सौरमंडल के ग्रहों की सभा जुटी। सभी को अपनी-अपनी विशिष्टताओं का गुमान था।
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लघुकथा : ठंडक

रविवार,अप्रैल 15, 2018
वह पिछले दिनों बीमार थी। ऑफिस आई तो साथ की सहकर्मी सहनुभूति जताने लगी... अरे, कितनी कमजोर हो गई आप?
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राष्ट्र पर 'राजनीति' का एकछत्र राज चल रहा था। उसके राज में 'तंत्र' सतत् प्रगतिशील और 'लोक' निरंतर पतनशील था।फिर भी ...
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