लघुकथा - रक्तदान

मंगलवार,सितम्बर 26, 2017
65 पार कर चुके रमेश को अपनी जिंदगी से कोई शिकायत नहीं थी। सदा प्रसन्न रहने वाले सेवानिवृत रमेश का भरा-पूरा परिवार था। ...

लघुकथा : "उलझनों के पार "

मंगलवार,सितम्बर 19, 2017
मेरी नाव चल पढ़ी थी बारिश के पानी की बहती धरा के साथ। जैसे ही वो हिचकोले खाती, मेरे दिल की धड़कन भी ऊपर नीच हो जाती। वो ...

लघु कहानी : वास्तुदोष

शुक्रवार,सितम्बर 15, 2017
बड़े शौक से घर के मुख्य द्वार पर सुंदर-सा झूमर टांगा। हवा के स्पंदन से झूमर की क्रिस्टल वाली छड़ें टकराकर मधुर ध्वनियां ...

हिन्दी कहानी : मैं बूढ़ा हूं...

बुधवार,सितम्बर 13, 2017
आईने के सामने कुछ बचे-कुचे शेष बालों पर कंघी फेरते हुए भौंहों के मध्‍य से झांकते हुए दो सफेद बालों को देखकर एक दम चौंक ...
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पुराने जमाने मे मिजो जनजातियां भोजन के लिए मक्का, ज्वार-बाजरा, फल-फूल, साग-सब्जियों एवं विभिन्न पशु-पक्षियों के मांस का ...

लघुकथा - देह की दुर्गति

मंगलवार,अगस्त 29, 2017
चार भाई बहनों में बड़ी, नाजों से पली राजो का बचपन हंसते खेलते बीत गया था। कैशोर्य की अल्हड़ता और प्रस्फुटित हो रही मादकता ...
सहजता से चल रही रमा और राजन की गृहस्थी में बेखबर फासले दस्तक दे चुके थे। मन के किसी कोने में दोनों ही एक अलगाव-सा महसूस ...
उत्साह और उम्र का भला क्या संबंध? उत्साह पैदा होते ही उम्र को कहीं पीछे धकेल देता है। उम्र कितनी ही हो जाए, बेटियों का ...
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दीपा क्लास के दरवाजे पर इस तरह खडी हो गई कि अवनि क्लास के अंदर नहीं आ पाए, जानबूझकर दीपा ऐसे काम करती जिससे अवनि को ...
आज वैभव का पत्र आया था। भाई के पत्र का कितने दिनों का इंतजार आज खत्म हुआ। पर आज जब पत्र उसके हाथ में है, अंजली उसे ...

लघुकथा - संस्कारों का मान

सोमवार,जुलाई 24, 2017
बात रमेश के अस्तित्व पर आकर अटक गई थी। रह-रह कर उसका मन अपनी जिंदगी को यूं ही खत्म करने के लिए उकसाता था, पर वह इन ...
कल सुबह नींद खुली तो मैंने देखा कि एक चिड़िया, जिसका सिर्फ एक ही पैर था, आंगन में फुदक रही थी। बहुत मुश्किल से वह अपना ...

कब्र का अजाब

बुधवार,जुलाई 19, 2017
नहीं, मदरसे में रूही नहीं जाएगी। 'पर क्यों अम्मी?' 'कहा ना अब वो नहीं जाएगी मदरसे में बस...।' 'तो क्या रूही आपा ...

लघुकथा : खाना खाया !

गुरुवार,जुलाई 13, 2017
सोना बॉटम न्यूज को तीसरी बार लगाते हुए चिडचिड़ा गई थी, आखिर एक बार में ही न्यूज फाइनल क्यों नहीं करते बॉस! फिर खुद पर ...
बात पुरानी है। किसी जमाने में किसी नगर में एक राजा को अच्छे-अच्छे घोड़े जमा करने का शौक था। उसके अस्तबल में एक से बढ़कर ...
रात के 11 बजे थे। दरवाजे पर खटखटाहट हुई। शुभा ने दरवाजा खोला। आनंद खड़ा था। वह शुभा को लगभग धकेलता हुआ अंदर आया। दोनों ...
मुंबई से बिहार जाने वाली ट्रेन से वह सफर कर रहा था। अत्यधिक गर्मी थी। बोगी ठसाठस भरी थी। वह बोगी के गेट पर बैठा था। ...
मुक्ता को समझ में नहीं आ रहा है कि मोहित को कैसे समझाएं कि शादी के बिना एकसाथ रहना आज भी समाज में गुनाह माना जाता है।

कहानी - इंसान की इंसानियत

शुक्रवार,जून 2, 2017
गांव से शहर को जाते मुख्य रास्ते पर एक घना एवं छायादार आम का पेड़ लगा हुआ था, जिसके नीचे एक बड़ा चबतूरा बन हुआ था। उस ...