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लघुकथा : अनोखा दहेज

मंगलवार,फ़रवरी 12, 2019
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मेरा घर है ये ! ...नहीं बाबा नहीं, कोई घर नहीं है मेरा ! जब तक मेरी शादी नहीं हुई थी, तब तक भी यह कहने को ही मेरा घर ...
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लघुकथा : मौकापरस्त मोहरे!

गुरुवार,दिसंबर 20, 2018
वह तो रोज की तरह ही नींद से जागा था, लेकिन देखा कि उसके द्वारा रात में बिछाए गए शतरंज के सारे मोहरे सवेरे उजाला होते ही ...
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दीपावली का पर्व ज्यों-ज्यों पास आ रहा था, शोभा के चेहरे की आभा अपनी कांति खोती जा रही थी जिसे वह चाहकर भी छुपा नहीं ...
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एक बड़ी रेल दुर्घटना में वह भी मारा गया था। पटरियों से उठा कर उसकी लाश को एक चादर में समेट दिया गया। पास ही रखे ...
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'नवरात्रि पर्व' के चलते ग्रामीण अंचल के कुछ व्यक्तियों से रमेश की मुलाकात हुई। वे 'कहीं' सलाह लेने आए थे। मुखिया थे ...
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लघुकथा : सत्यव्रत

बुधवार,अक्टूबर 17, 2018
'व्रत ने पवित्र कर दिया।' मानस के हृदय से आवाज आई। कठिन व्रत के बाद नवरात्रि के अंतिम दिन स्नान आदि कर आईने के समक्ष ...
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#MeToo पर लघुकथा : सीढ़ियां

शुक्रवार,अक्टूबर 12, 2018
"इन लम्पट पुरुषों का चेहरा तो उजागर होना ही चाहिए....!" "और क्या... कमीनों की करतूतों के बारे में सबको पता तो ...
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मैं वह भाषा हूं, जिसमें तुम जीवन साज पे संगत देते मैं वह भाषा हूं, जिसमें तुम, भाव नदी का अमृत पीते मैं वह भाषा ...
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शिक्षक रामप्रसाद के हाथों में रवि की शादी का आमंत्रण था। रवि, रामप्रसाद का होनहार छात्र था, जो अब पढ़-लिखकर एक ...
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अनिकेतजी रोज की तरह सुबह की सैर से लौटे। अखबार को गेट से निकाला व तारीख पर नजर पड़ते ही आंखों में जो नमी उतरी, उसने हर ...
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लघुकथा : दशा

शुक्रवार,अगस्त 3, 2018
वह आनंदित मन से मोटर साइकिल चलाता हुआ जा रहा था कि ठीक आगे चल रही सिटी बस से धुंआ निकला और उसके चेहरे से टकराया
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आज न सुबह उठते ही स्नेहल के लिए टिफिन बनाने की जल्दी है, न ही सलिल को नाश्ता दे उनका टिफिन भेजना है, न ही सब कुछ ...
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’मां, पता है आज मैंने आपके जैसा हलवा बनाना सीख लिया।’ बेटे ने चम्मच भर गरमागरम हलवा मुंह में डालते हुए कहा।
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विमल बहुत परेशान था। उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वो इस परिस्थिति से कैसे निबटे। वो अपनी मां को बहुत चाहता था किंतु ...
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एक दिन हरे और भगवे रंग में विवाद छिड़ गया। हरा रंग गुर्राकर बोला-
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वृद्धाश्रम के दरवाजे से बाहर निकलते ही उसे किसी कमी का अहसास हुआ, उसने दोनों हाथों से अपने चेहरे को टटोला और फिर पीछे ...
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तोता और मैना अपनी मधुर प्रेमवार्ता में तल्लीन थे। मैना मान भरे स्वर में बोली-"देखो,शादी के बाद मुझे एक बड़ाssssssssss सा ...
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पृथ्वी पर जब जीवन-क्रम आरम्भ हुआ,तब उसका समीकरण था-प्रकृति+मनुष्य=जीवन।
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आखिर बहू ने शांत स्वर में कह ही दिया-"मां ,मैं बुखार में तप रही हूं। चक्कर आ रहे हैं। मीनाक्षी दीदी कोई मेहमान तो नहीं। ...
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