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कहानी : जन्म और मृत्यु से परे मैं कौन हूं

मंगलवार,फ़रवरी 20, 2018
universe
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मित्र मोहन को होली की मस्ती बचपन में कुछ ज्यादा ही रहती थी। पापा से उसका रंग और पिचकारी के लिए जिद करना, मां का डांटना ...
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रमा के मौन व्रत का आज 7वां दिन था। उसने परिवार में सबसे बोलना बंद कर दिया था। दिनभर सबके काम करना और फिर चुपचाप अपने ...
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प्रवीणा और अतुल एक ही ऑफिस में काम करते हैं। दोनों के विचार आपस में बहुत मिलते हैं इसलिए दोनों में अच्छी दोस्ती हो गई। ...
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कहानी : मानवता का एक दिन?

बुधवार,जनवरी 31, 2018
पूजाघर से मंत्रों के उच्चारण की मधुर ध्वनि पूरे शर्मा निवास में गूंज रही थी। शर्माजी कुंआरी कन्याओं को दान-दक्षिणा ...
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विश्व पुस्तक मेले के 8वें दिन राजकमल प्रकाशन स्टॉल पर बॉम्बे की बार बालाओं की जिंदगी को वास्तविक ढंग से सामने लाती ...
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कहानी : नाम गुम

मंगलवार,जनवरी 16, 2018
हल्की फिनाइल की खुशबू से आंख खुल गई। बहुत से लोगों की आवाजें आ रही थीं जिसे समझ पाना मुश्किल था। 4-5 लोग ऐसी भाषा बोल ...
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आज दो महीनों बाद कुसुमताई अपने घर इंदौर लौट रही थीं। मुंबई स्टेशन पर अवंतिका एक्सप्रेस का इंतजार करते हुए अपने सामान की ...
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संपन्न और शिक्षित परिवार में जब रमेश के यहां पहली पुत्री का जन्म हुआ तो पूरे कुटुम्ब में खुशी की लहर दौड़ गई। ऐसा नहीं ...
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लघुकथा : विरोध का सच

शनिवार,दिसंबर 30, 2017
'अंग्रेजी नववर्ष नहीं मनेगा... देश का धर्म नहीं बदलेगा...' जुलूस पूरे जोश में था। देखते ही मालूम हो रहा था कि उनका ...
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रमा कई दिनों से अपने पति सुरेश को बेचैन देख रही थी। दिन तो कामकाज में कट जाता, पर रात को उसे करवटें बदलते रहने का कारण ...
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मेडिकल कॉलेज के गर्ल्स हॉस्टल के सामने से एप्रन पहने 3 लड़कियां दौड़ पड़ी सड़क किनारे। सुबह के 9 बजने में कुछ ही मिनट बचे ...
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संगति का असर तो होता ही है। यह बात रमेश को उस समय समझ आई, जब 1 माह तक अपनी बुरी आदतों को छोड़कर वह सादगी से अपने कर्म ...
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लघु कथा : चोर

गुरुवार,नवंबर 16, 2017
आज शाम से मैंने अपनी छत पर गुलेल और कुछ कंकर इकट्ठा कर रख लिए थे। कल सुबह सूरज निकलने के पहले वह फूल तोड़ने आएगा तो ...
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अरे मेरी अर्द्धांगिनी, तुम नहीं समझोगी कि कितनी मुश्किल से टिकट मिली है। महिला सीट है और मैं इस पर चुनाव नहीं लड़ सकता, ...
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एक अमीर महिला मोहल्ले में बड़ी-बड़ी डींगे हाकती रहती थी। उसके पास पैसा है। उसी मोहल्ले में गरीब व मध्यम परिवार के लोग भी ...
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आज मैं दीपावली की सफाई में पत्नी का हाथ बंटा रहा था कि अचानक मेरे हाथ में अपने गांव की पुरानी फोटो लग गई जिसमें पूरा ...
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लघुकथा - रक्तदान

मंगलवार,सितम्बर 26, 2017
छोटे बेटे की बीमारी से परेशान सुनीता जैसे-तैसे अपने दिन काट रही थी। मजदूर पति सुरेश सुबह ही दिहाड़ी के लिए निकल जाता। ...
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65 पार कर चुके रमेश को अपनी जिंदगी से कोई शिकायत नहीं थी। सदा प्रसन्न रहने वाले सेवानिवृत रमेश का भरा-पूरा परिवार था। ...
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लघुकथा : "उलझनों के पार "

मंगलवार,सितम्बर 19, 2017
मेरी नाव चल पढ़ी थी बारिश के पानी की बहती धरा के साथ। जैसे ही वो हिचकोले खाती, मेरे दिल की धड़कन भी ऊपर नीच हो जाती। वो ...
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