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Sun, 1 Nov 2026

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हिन्दी कविता : शब्द

Shabd
श्रीमती गिरिजा अरोड़ा
शब्द 
जब ब्रह्मा जी के मुख से चलते हैं
शांत तेजस
वेद ऋचा बनते हैं 
शब्द 
जब प्रशासक के मुख से चलते हैं
आदेशात्मक और दृढ़ 
व्यवस्था के रस्ते हैं
 
शब्द 
जब सिद्ध ऋषि के मुख से चलते हैं
सौम्य विनम्र 
प्रार्थना के मनके हैं
 
शब्द 
जब क्रांतिकारी के मुख से चलते हैं
उग्र तीव्र 
परिवर्तन के जलसे हैं
 
शब्द 
जब जन मानस के मुख से चलते हैं
बनते छोटी छोटी बात 
जैसे पत्ते जंगल में जलते हैं
 
शब्द शब्द हैं
शब्दों की ताकत
कहने भर में
कभी बनें मील का पत्थर
 
कभी
अर्थहीन लगते हैं
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