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Sat, 1 Aug 2026

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कविता : एक रात थी वह

poem
राजकुमार कुम्भज 
एक रात थी वह
एक रात में एक बरसात थी वह
बरसात की एक रात थी वह
 
एक बात थी वह
एक बात की रात थी वह
एक रात की बात थी वह
एक रात थी वह
भीगने-भिगाने की रात थी वह
एक रात में एक बरसात थी वह
बरसात की एक रात थी वह
 
आने पर जाने से बचती वह
जाने पर आने से बचती वह
आने में जाने की थी बात वह
जाने में आने की थी बात वह
आने-जाने में जाने-आने की
एक बात थी वह
 
बरसात की एक रात थी वह
एक रात थी वह।