21 जून, विश्व संगीत दिवस : संगीत हमसे अलग नहीं...

 
जब भी हम बेहद खुश होते हैं, तो दिल से निकलता है संगीत...। जब कभी उदास होते हैं, तो खुश कर देता है संगीत...। कुछ पलों को कभी भावुक कर देता है संगीत... तो कभी मन में सपने संजोने केे लिए, पंख लगा देता है संगीत...। 
 
जी हां, से हर किसी का रिश्ता ही कुछ ऐसा होता है, कि जीवन के महत्वपूर्ण पल संगीत से ही होकर गुजरते हैं। जब चाहें, जैसा चाहें.... मूड को जो बदल देता है संगीत। इसलिए तो, जब भी हम तनाव में या दुखी होते हैं, तुरंत रेडि‍यो या फोन में मौजूद एफएम की बटन पर हाथ जाता है और गीतों के जरिए हम अपना मूड ठीक करने की के‍शि‍श करते हैं। भला, संगीत से अच्छा माध्यम और क्या हो सकता है, खुद को खुश, उर्जावान और तनावमु्क्त करने का।
 
यही नहीं, गीत कोई भी हो, हम हर परिस्थि‍ति में खुद को उससे जोड़ लेते हैं, जैसे यदि कोई प्रेम संगीत हो तो उसे सुनकर हम अपने प्रिय को याद कर उसी भाव में खो जाते हैं। या फिर कोई इमोशनल गाना सुनते समय हम भी उन्हीं भावनाओं में बहने लगते हैं। देशभक्ति गीत सुनकर हमारा मन देशभक्ति की भावना से भर उठता है। इसी तरह से गीत हमारी भावनाओं से जुड़कर हमें भावनात्मक सहयोग प्रदान करते हैं। 
 
यही कारण है कि आज बाजार में हर मूड के अनुसार गीत उपलब्ध हैं। इन गीतों को अलग अलग श्रेणी में रखा गया है जैसे- भजन, गीत, गज़ल, रोमांटिक व सेड म्यूजिक। इस तरह से हर केटेगरी के लिए ढेरों गीत आसानी से मिल जाते हैं। 
 
उदाहरण के लिए देखें तो-  में जय जय संतोषी माता, गणपति बप्पा मोरया जैसे गीत काफी प्रचलित हुए, तो दिल के अरमां, पत्थर के सनम, क्या से क्या हो गया जैसे गीत उदास मूड के लिए। इसके अलावा प्यार हुआ इकरार हुआ जैसे गीत प्रेम के शुरूआती दौर और हमें जबसे मोहब्बत हो गई है ..ये दुनिया खूबसूरत हो गई है जैसे गीत प्रेमियों के भावों को दर्शाते हैं।

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