कुंवर नारायण : विश्व कविता के अनुवाद पर अनूठी पुस्तक देने वाले



खबर दुखी कर देने वाली है। में सन्नाटा है कि काव्य संसार के
एक प्रमुख हस्ताक्षर नहीं रहे। प्रस्तुत है उनकी स्मृति में उनकी रची कविता और उनके पर पिछले दिनों आई पुस्तक की समीक्षा....


कुंवर नारायण की कविता
सतहें इतनी सतहीं नहीं होती

न वजहें इतनी वजही

न स्पष्ट इतना स्पष्ट ही

कि सतह को मान लिया जाए कागज

और हाथ को कहा जाए हाथ ही।

जितनी जगह में दिखता है एक हाथ

उसका क्या रिश्ता है उस बाकी जगह से

जिसमें कुछ नहीं दिखता है?

क्या वह हाथ

जो लिख रहा

उतना ही है

जितना दिख रहा?

या उसके पीछे एक और हाथ भी है

उसे लिखने के लिए बाध्य करता हुआ?
* आज सारे दिन बाहर घूमता रहा

और कोई दुर्घटना नहीं हुई।

आज सारे दिन लोगों से मिलता रहा

और कहीं अपमानित नहीं हुआ।

आज सारे दिन सच बोलता रहा

और किसी ने बुरा नहीं माना।

आज सबका यकीन किया

और कहीं धोखा नहीं खाया।

और सबसे बड़ा चमत्कार तो यह

कि घर लौटकर मैंने किसी और को नहीं

अपने ही को लौटा हुआ पाया।
कुंवर नारायण भारत ही नहीं विश्व के श्रेष्ठ कवियों में से थे। विश्व साहित्य के गहन अध्येता कुंवर नारायण ने आधी सदी से अधिक समय में अनेक विदेशी कवियों की कविताओं का हिन्दी में अनुवाद किया, जो समय-समय पर पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहे हैं। ‘न सीमाएं न दूरियां’ उनमें से कुछ उपलब्ध अनूदित कविताओं का संकलन है - हालांकि सारे अनुवाद, खासतौर से शुरुआती अनुवाद, खोजे नहीं जा सके।

जो बात इस पुस्तक को सबसे अनूठी और विशिष्ट बनाती है, वह यह है कि इसमें प्राचीन से लेकर अब तक के अनेक उत्कृष्ट विश्व कवियों की कविताओं के अनुवाद स्वयं आज के श्रेष्ठ हिन्दी कवि द्वारा किए गए हैं। इस संकलन का एक और विशिष्ट पक्ष विभिन्न कवियों पर सारगर्भित बातें और अनुवाद-संबंधी टिप्पणियां भी है। कुंवर नारायण के लिए‘अनुवाद का मतलब कविता की भाषाई पोशाक को बदलना भर नहीं रहा है, बल्कि उसके उस अंतरंग तक पहुंचना रहा है, जो उसे कविता बनाता है।’उन्होंने अनुवाद की अवधारणा को अनुरचना की हद तक विस्तृत किया है और अनुवाद-कर्म को अपनी रचनात्मकता की तरह ही महत्त्व दिया है।”

अनुवाद करने के साथ अनुवाद-प्रक्रिया के रहस्यों का प्रकटन अत्यंत महत्त्वपूर्ण है, जिसे बोर्हेस और कुंवर नारायण के यहां हम अनुवाद-प्रक्रिया पर की गई दुर्लभ टिप्पणियों में देख सकते हैं। यहां अनुवादों में वह समावेशी दृष्टि अहम है, जो कुंवर नारायण के संपूर्ण लेखन में मौजूद है। अनुवाद के लिए जिस कवि को उन्होंने चुना, थोड़ा उसके प्रभाव में ढले, थोड़ा उसे अपने प्रभाव में ढाला। अनुवाद-कर्म के विशेष महत्व को रेखांकित करती यह किताब नई पीढ़ी के लिए एक अनूठा दस्तावेज है।

वेबदुनिया हिंदी मोबाइल ऐप अब iOS पर भी, डाउनलोड के लिए क्लिक करें। एंड्रॉयड मोबाइल ऐप डाउनलोड करने के लिए क्लिक करें। ख़बरें पढ़ने और राय देने के लिए हमारे फेसबुक पन्ने और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं।

और भी पढ़ें :

अटल जी की कविता : जीवन की ढलने लगी सांझ

अटल जी की कविता : जीवन की ढलने लगी सांझ
जीवन की ढलने लगी सांझ उमर घट गई डगर कट गई जीवन की ढलने लगी सांझ।

अटल जी की लोकप्रिय कविता : मेरे प्रभु! मुझे इतनी ऊंचाई कभी ...

अटल जी की लोकप्रिय कविता : मेरे प्रभु! मुझे इतनी ऊंचाई कभी मत देना
मेरे प्रभु! मुझे इतनी ऊँचाई कभी मत देना गैरों को गले न लगा सकूँ इतनी रुखाई कभी मत ...

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी : बेदाग रहा राजनीतिक ...

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी : बेदाग रहा राजनीतिक पटल, बहुत याद आएंगे अटल
देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। वह ना केवल एक ...

शिक्षा और भाषा पर अटल बिहारी वाजपेयी के 6 विचार, बदल सकते ...

शिक्षा और भाषा पर अटल बिहारी वाजपेयी के 6 विचार, बदल सकते हैं सोच...
अटल बिहारी वाजपेयी ने शिक्षा, भाषा और साहित्य पर हमेशा जोर दिया। उनके अनुसार शिक्षा और ...

अटल बिहारी वाजपेयी की कविता : जीवन को शत-शत आहुति में, जलना ...

अटल बिहारी वाजपेयी की कविता : जीवन को शत-शत आहुति में, जलना होगा, गलना होगा
बाधाएं आती हैं आएं घिरें प्रलय की घोर घटाएं, पांवों के नीचे अंगारे, सिर पर बरसें यदि ...

बारिश में बिल्कुल न खाएं अंकुरित अनाज, जानिए कारण ...

बारिश में बिल्कुल न खाएं अंकुरित अनाज, जानिए कारण ...
वैसे तो अंकुरित अनाज सेहत के लिए बेहद फायदेमंद है और इसे नियमित तौर पर अपनी डाइट में ...

वाजपेयीजी ऐसे राजनेता जिसे हम भूल नहीं सकते

वाजपेयीजी ऐसे राजनेता जिसे हम भूल नहीं सकते
अटलबिहारी वाजपेयी की पूरी जीवन यात्रा के मूल्यांकन के लिए कुछ आधार बनाना होगा। उनको ...

जो चाहें वो पाएं, ऐसे इस्तेमाल करें अपना 'सब कॉन्शस माइंड'

जो चाहें वो पाएं, ऐसे इस्तेमाल करें अपना 'सब कॉन्शस माइंड'
जीवन में हमारे साथ जो भी घटित होता है उसमें असल खेल तो हमारे 'सब कॉन्शस माइंड' का होता है ...

माखन-मिश्री के सेहत से जुड़े ये 6 मीठे फायदे आप भी जानिए...

माखन-मिश्री के सेहत से जुड़े ये 6 मीठे फायदे आप भी जानिए...
माखन मिश्री भगवान श्रीकृष्ण का प्रिय भोग है। यह स्वाद में जितना मधुर लगता है, उतने ही ...

ईद-उल-अजहा को क्यों कहते हैं ईदे कुरबां, जानिए

ईद-उल-अजहा को क्यों कहते हैं ईदे कुरबां, जानिए
ईद-उल-अजहा मुस्लिम भाइयों का एक महत्वपूर्ण त्योहार है। कुरबानी से जुड़ी होने की वजह से इसे ...