परसाई के बहाने

गुरुवार,अगस्त 24, 2017
हिन्दी पत्रकारिता के अमिट हस्ताक्षर और बहुमुखी प्रतिभा के धनी राजेन्द्र माथुर (रज्जू बाबू) की 7 अगस्त को जन्मतिथि है। ...
नई दिल्ली। दिल्ली हिन्दी अकादमी की उपाध्यक्ष एवं सुप्रसिद्ध लेखिका मैत्रेयी पुष्पा को आज यहां उदयराज सिंह स्मृति सम्मान ...
राजनीति में विचारों के लिए सिकुड़ती जगह के बीच पं. दीनदयाल उपाध्याय का नाम एक ज्योतिपुंज की तरह सामने आता है। अब जबकि ...
युगदृष्टा साहित्यकार दिनकर ने अपने समय की कठिनाइयों को बड़ी पैनी दृष्टि से देखा व पहचाना। युवा आक्रोश तथा अनुशासनहीनता ...
Widgets Magazine
यह बात आश्चर्यजनक है लेकिन सच है कि लेखन कभी उन्होंने घर में रहकर एयरकंडीशंड रूम में नहीं किया बल्कि विषय की आवश्यकता ...
उदारीकरण की बयार का सबसे बड़ा हमला संस्कृति पर हुआ है..भारतीय समाज में तमाम ऊंच-नीच के बावजूद आत्मीयता की एक अजस्र धारा ...
हिंदी तथा पंजाबी लेखन में स्पष्टवादिता और विभाजन के दर्द को एक नए मुकाम पर ले जाने वाली अमृता प्रीतम ने अपने साहस के बल ...
टैगोर दुनिया के संभवत: एकमात्र ऐसे कवि हैं जिनकी रचनाओं को दो देशों ने अपना राष्ट्रगान बनाया। बचपन से कुशाग्र बुद्धि के ...
Widgets Magazine
प्रेमचंद एक सच्चे भारतीय थे। एक सामान्य भारतीय की तरह उनकी आवश्यकताएँ भी सीमित थी। उनके कथाकार पुत्र अमृतराय ने एक जगह ...
आज हिंदी साहित्य को 'उसने कहा था' जैसी कालजयी कहानी देने वाले पं. श्री चंद्रधर शर्मा 'गुलेरी' की जयंती है। गुलेरी की ...
रमाकान्त पाण्डेय अकेले के अब तक सोलह उपन्यास प्रकाशित हो चुके हैं। इनमें से अधिकाँश साहित्यागार जयपुर से प्रकाशित हुए ...
बीसवीं सदी के पूर्वार्द्ध में अनेक महापुरुषों ने राष्ट्रीय परिदृश्य पर अपने बहुआयामी व्यक्तित्व और कालजयी कृतित्व की ...
'मधुशाला' के रचयिता डॉ. हरिवंश राय बच्चन हिंदी साहित्य के महत्वपूर्ण हस्ताक्षर हैं। उनका जन्म 27 नवंबर, 1907 को ...
प्राण कुमार शर्मा ने आज 75 साल की उम्र में अपनी अंतिम सांस ली। प्राण नाम से पहचाने जाने वाला यह रचयिता अपने पीछे एक ऐसी ...
भोजपुरी साहित्यकार रामनाथ पांडेय का नाम इतिहास-पुरुष के रूप में प्रतिष्ठित है। यों तो वे 16 जून 2006 को बयासी वर्ष की ...
अनादिकाल से रवाँ वक्त का दरिया अपने भीतर न जाने कितने युग समोता चला गया। ऐसे लोग, जो पैदा हुए और गुमनाम-सी ज़िंदगी जीकर ...
बीसवीं सदी के आरंभ में भूख, बेकारी, भ्रष्टाचार और अव्यवस्था से बिखराव के कगार पर खड़े चीन और बीसवीं सदी के अंत में ...
उन्होंने रेडियो पर अपना ऐतिहासिक उद्बोधन दिया- 'यह मैं हूं जनरल द गॉल' और उन्होंने अपने प्रभावी वक्तव्य में सभी ...
कहा जाता है कि बचपन में उनके कपड़े भी धुलने के लिए लंदन जाते थे! खानदान की जन्मभूमि कश्मीर की खूबसूरती। दादा पंडित ...